रामनवमी

रामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम समान गुण
आत्मसात कर आदर्श एवं आनंदी जीवन व्यतीत करने का निश्चय करें !

‘विद्यार्थीमित्रो, अपना जीवन आनंदी एवं आदर्श रहे’, क्या ऐसी आपकी इच्छा है? तो इसके लिए आपको स्वयंमें स्थित रावणरूपी दुर्गुणों का नाश करना होगा, तो ही आपका जीवन श्रीराम समान आदर्श एवं आनंदी होगा । जब तक आप अपने में सदगुणों के विकास का प्रयास नहीं करेंगे, तब तक यह संभव नहीं । मित्रो, आज हम सभी की यह भ्रांत धारणा है कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त हुए एवं गुणवत्ता सूची में अपना नाम आया,बस हो गया । क्या इससे हम वास्तविक रूप से आनंदी हो सकते हैं? यह बात विचार करने के जैसी है । श्रीराम के समान आदर्श एवं आनंदी जीवन जीने के लिए सदगुणों का विकास किए बिना अन्य कोई भी मार्ग नहीं । मित्रो, सदगुण ही जीवन का आधार है । आधार नहीं रहेगा, तो क्या कोई भवन खडा रह सकता है ? वैसा ही आज हमारे जीवन के विषय में हुआ है । आज हम सभी के जीवन में तनाव एवं दुःख दिखाई दे रहा है । पढाई के समय भी उत्तम गुण प्राप्त करने के तनाव के कारण विद्यार्थी ज्ञान के आनंद से वंचित रहते हैं । कुछ विद्यार्थी अल्पायु में नशे के अधीन हो रहे हैं, तो कुछ उत्तम गुण प्राप्त न होने के कारण निराश होकर आत्महत्या कर रहे हैं । मित्रो, क्या यही हमारे जीवन का उद्देश्य हैं ? अच्छे गुण प्राप्त कर हमें अच्छे वेतन की नौकरी प्राप्त होगी; किंतु आनंदी जीवन जी सकेंगे, इसकी कोई निश्चिति नहीं । अत एव १४ वर्ष वनवास में रहते हुए भी आनंदी जीवन जीनेवाले प्रभु श्रीराम के गुण आत्मसात करने का निश्चय करेंगे ।

अब हम रामनवमी के दिन किए जानेवाले पूजाविधीयों की शास्त्रीय जानकारी देनेवाला व्हीडिआे देखेंगे ।

जीवन के सूत्र

सदगुण : आनंदी एवं आदर्श जीवन

दुर्गुण : दुःखी एवं तनाव से ग्रस्त जीवन

जब व्यक्ति एवं समाज के जीवन में दुर्गुणों की प्रबलता बढती है, तब व्यक्ति,समाज एवं राष्ट्र दुःखी एवं तनावग्रस्त जीवन जीते हैं । आज हम सभी इसी परिस्थिति में अपना जीवन जी रहे हैं । अतः हम प्रभु श्रीराम के आदर्श जीवन एवं हमारा जीवन इसमें रहनेवाले अंतर के विषय में अधिक जानकारी लेंगे ।

आदर्श पुत्र

प्रभु श्रीराम माता-पिता की प्रत्येक आज्ञा का पालन करते थे । माता-पिताद्वारा की गई आज्ञा तुरंत आचरण में लाते थे; अत एव आज भी हम उन्हें ‘आदर्श पुत्र’ कहते हैं ।

वर्तमान में हम देखते हैं कि, बच्चे माता-पिता के साथ अशिष्टता से बातें करते हैं। उन्हें उलटे उत्तर देते हैं एवं ‘स्वयं को सभी कुछ पता है’, इस गर्व से व्यवहार करते हैं । वर्तमान में बच्चे माता-पिता को साधारणसा नमस्कार भी नहीं करते । मित्रो, क्या इसे हम आदर्श जीवन कह सकते हैं? इसीलिए आज हम दुःखी जीवन जी रहे हैं । आज प्रभु श्रीराम के जन्मदिन पर हम उन्हीं के समान आदर्श पुत्र होने का प्रयास करेंगे । मित्रो, इस प्रकार के प्रयास करेंगे ना ?

संस्कृति अर्थात माता-पिता एवं ज्येष्ठों का आदर करना तथा विकृति अर्थात माता-पिता एवं ज्येष्ठों का अनादर करना, यह ध्यान में रखें ।

आदर्श बंधु

विद्यार्थीमित्रो, आदर्श भाई कैसा होना चाहिए, इस आदर्श का उदाहरण अर्थात राम-लक्ष्मण ! प्रभु श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करते थे । प्रत्येक प्रसंग में वह उनकी सहायता एवं उचित मार्गदर्शन करते थे । उनके लिए एक दूसरे के बिना रहना कठिन था।

वर्तमान के भाई एक दूसरे के विषय में अधिक नहीं जानते, साथ ही लगातार झगडा करते हैं ।एक दूसरे के साथ अशिष्टता से बातें करते हैं । अपनी कोई भी वस्तु भाई को नहीं देते ।

मित्रो, क्या इन्हें हमआदर्श बंधु कह सकते हैं ? आज हम अनेक पदवियां प्राप्त करते हैं । तो हमें अपने आपमें उचित परिवर्तन क्यों नहीं दिखाई देता, इसका कारण अर्थात पढाई में बच्चों के आचरण में अच्छी प्रकार से सुधार हो,ऐसी व्यवस्था ही नहीं है ।

मित्रो, आज से हम भक्ति में वृदि्ध कर एवं दुर्गुण नष्ट कर स्वयं में समझदारी बढाने का निश्चय करेंगे । वास्तव में यही सच्ची रामनवमी होगी ।

आदर्श मित्र

विद्यार्थीमित्रो, प्रभु श्रीराम एक आदर्श मित्र थे । उन्होंने सुग्रीव एवं बिभीषण को संकट के समय सहायता की, सहायता के पश्चात उनसे कोई भी अपेक्षा नहीं की ।

क्या वर्तमान के मित्र ऐसे होते हैं ? नहीं ना ? मुझे कुछ लाभ होगा, तो ही सहायता करूंगा,बच्चों की ऐसी ही मनोवृत्ति दिखाई देती है । अर्थात मित्रता भी अपेक्षा एवं स्वार्थ के स्तर पर की जाती है । मित्रो, जहां स्वार्थ है, वहां वास्तविक मित्रता हो ही नहीं सकती । आज समाज में सर्वत्र हमें स्वार्थही दिखाई देता है ।अत एव प्रत्येक व्यक्ति दुःखी है; इसलिए रामनवमी के उपलक्ष्य में हम निरपेक्ष वृत्ति से मित्रता करने एवं आनंदी जीवन जीने का निश्चय करेंगे । मित्रो, करेंगे ना ?

जहां निरपेक्षता होती है वहां आनंद एवं जहां अपेक्षा होती हैं, वहां दुःख रहता है,यह ध्यान में रखें ।

सत्य बोलनेवाला एकवचनी

प्रभु श्रीराम सत्यवादी थे । एक बार दिया गया वचन वह पूरा करते थे । सत्य अर्थात ईश्वर ! देवता कभी भी झूठ नहीं बोलते ।

वर्तमान में हम देखते हैं कि बच्चे सहजता से झूठी बातें करते हैं । इतना ही नहीं, झूठी बातें कर हम अन्यो को किस प्रकार फंसाते हैं, ऐसा हम गौरव से बताते हैं । मित्रो, क्या ऐसी झूठी बातें करने से हमें आनंद प्राप्त होगा ? कुछ बच्चे कभी कभी मां के साथ झूठ बोलते हैं, तो कभी कभी अध्यापकों के साथ भी झूठ बोलते हैं । मित्रो, देवता हमारे हृदय में ही वास करते हैं । हम जितने भी झूठ बोलेंगे, ईश्वर के पास उसकी गणना रहती ही है । बच्चो, यदि आपको देवता का प्यारा एवं आनंदी होना है तो आप कभी भी झूठी बातें नहीं करेंगे ।

झूठ बोलनेवाला निरंतर तनाव ग्रस्त एवं दुःखी रहता है, तो सत्य बोलनेवाला निरंतर आनंदी एवं अन्यों को प्यारा होता है, यह ध्यान में रखें ।

आज रामनवमी के दिन प्रभु श्रीराम के पास प्रार्थना करेंगे, ‘हे प्रभु श्रीराम, मुझे आप अपने जैसे सत्य बोलने की शक्ति प्रदान करें ।

आदर्श राजा

प्रभु श्रीराम एक आदर्श राजा थे । वह प्रजा का पालन माता के समान करते थे ।माता जैसे अपने बच्चे के विकास एवं उसका जीवन आनंदी रहे; इसके लिए निरंतर प्रयास करती है, वैसे ही प्रभु श्रीराम निरंतर प्रजा का विचार करते थे; अत एव रामराज्य में प्रजा / जनता आनंदी थी । मित्रो, क्या आपको भी इस प्रकार का राजा चाहिए ?, तो उसके लिए हमें भी आदर्श बनना होगा । आज भी लोगो की इच्छा है कि रामराज्य स्थापित होना चाहिए ।

मित्रो, रामराज्य के नागरिक भी आदर्श थे । हम भविष्य के आदर्श राजा के नागरिक के नाते इस रामनवमी के निमित्त राम के सभी गुण आत्मसात करने का प्रयास करेंगे एवं ‘शीघ्र से शीघ्र आदर्श राज्य आए’, ऐसी प्रभु श्रीराम के चरणों में प्रार्थना करेंगे ।

हम देखते हैं कि वर्तमान में राजनेता भ्रष्टाचारी, झूठ बोलनेवाले, गुंडे एवं मलिन आचरण करनेवाले होते हैं । मित्रो, यदि ऐसे राजनेता होंगे, तो क्या प्रजा आनंदी रह सकती है ?माता के समान प्रजा का पालन करने की अपेक्षा आज के राजनेता प्रजा की संपत्ति लूटनेवाले लुटेरे बन गए हैं । इन लुटेरों को निकालकर बाहर भगाना, नष्ट करना तथा इन्हें जडसे उखाड पेंâकना, प्रभु श्रीराम को यही पि्रय एवं अपेकि्षत होगा । मित्रो, मुझे बताएं, जो अन्न लोगों को खाने के लिए दे सकते हैं, उसी अन्न की दारू बनानेवाले राजनेता कभी प्रजा का पालन अच्छी प्रकार कर सकते हैं क्या ? मित्रो, इनमें परिवर्तन नहीं होगा । राम ने रावण को मार दिया एवं उसके उपरांत रामराज्य आया, उसी प्रकार हमें इन रावणरूपी राजनेताओं का नाश करना पडेगा, तो ही पुनः रामराज्य आएगा । मित्रो, हम प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करेंगे, ‘हे श्रीराम, हमें इन रावणरूपी राजनेताओं का नाश करने की शक्ति, बुदि्ध एवं क्षमता प्रदान करें । ’

आदर्श राजा : प्रजा का पालन पुत्र के समान करते एवं उन्हें आनंदी रखते हैं ।

वर्तमान के राजा (राजनेता ) : प्रजा को लूटने एवं उन्हें दुःखी करनेवाले होते हैं ।

धर्मपालन करनेवाला

प्रभु श्रीराम स्वयं धर्म का पालन करते थे । वह स्वयं प्रत्येक कृत्य धर्म के अनुसार करते थे एवं प्रजा को वैसा ही करने के लिए बताते थे । धर्म अर्थात ईश्वर ! प्रत्येक कृत्य ईश्वर को पि्रय हो, ऐसा करना, अर्थात धर्मपालन करना । धर्मपालन करनेवालों को ‘देवता ही मुझसे सभी करवा रहे हैं, इसका भान निरंतर रहता है ।

वर्तमान के राजनेता धर्म  मानते ही नहीं हैं । वे कहते हैं , ‘हमीं सर्वस्व हैं ।देवता आदि कुछ भी नहीं हैं । हम ही कर्ता-धर्ता हैं ।’ देवता को न माननेवाले राजा के राज्य में प्रजा आनंदी नहीं रह सकती;अत एव आज हमें सर्वत्र दुःखी एवं तनाव में जीवन जीनेवाली प्रजा दिखाई दे रही है ।
मित्रो, रामनवमी के शुभ अवसर पर हम प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करेंगे, ‘हे प्रभु श्रीराम, आप के समान धर्मपालन करनेवाले राजनेता हमें प्राप्त हों एवं शीघ्र से शीघ्र रामराज्य स्थापित हो’, आप के चरणों में यही विनम्र प्रार्थना है ।

‘हे प्रभु श्रीराम, हमें आदर्श राज्य के आदर्श नागरिक होने की शक्ति, बुदि्ध एवं क्षमता प्रदान करें । हमें आप के समान धर्मपालन करनेवाले एवं माता के समान प्रजा का पालन करनेवाले राजनेता प्राप्त हों एवं शीघ्राति शीघ्र रामराज्य की स्थापना हो’, यही आप के चरणों मे प्रार्थना !

– श्री. राजेंद्र पावसकर (अध्यापक), पनवेल