अंग्रेजों के विरोध में विद्रोह करनेवाले उमाजी नाईक !

‘भारतीय समाज में जिन्हें कनिष्ठ तथा अपराधी माना जाता है ऐसी ‘रामोशी’ नामक जाति में जन्में उमाजी नाईक थे । उनके विषय में संक्षिप्त जानकारी देखेंगे ! Read more »

राजा शिबी !

शिबी राजा एक बहुत दयालू और न्यायी राजा था । उसके इस वृत्ती से उसने शरण में आए एक कबुतर के प्राण बचाने के लिए अपने प्राणों को अर्पित करने की सिद्धता दिखार्इ, यही कथा विस्तार से देखेंगे । Read more »

तत्त्वनिष्ठ लोकमान्य तिलकजी !

लोकमान्य तिलक बचपन से ही अत्यंत बुद्धिमान विद्यार्थी थे । उन्होने अपने पिता से संस्कृत भाषा के पाठ पढे । उनके बचपन के कुछ प्रसंग हम यहा देखेंगे । Read more »

समय का महत्त्व

क्रांतिकारियों की मालिका में चापेकर बंधुओं का नाम बडे आदर से लिया जाता है । तीनों भाई देश को स्वतंत्र कराने के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदेपर लटके । Read more »

प्रश्न का निषेध कर सीधे सभागृह से बाहर जानेवाले राष्ट्राभिमानी सुभाषचंद्र बोस !

‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंग्लैंड में ‘आय.सी.एस.’की परीक्षा देकर भारत लौट आए । तत्पश्चात उन्हें एक लिखित परीक्षा देनी पडी । परीक्षा की प्रश्नपत्रिका देखते ही सुभाषबाबू एकदम संतप्त हुए । Read more »

हिंदु धर्म के अभिमानी पं. मदनमोहन मालवीय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदनमोहन मालवीय हिंदु धर्म और संस्कृति के अनन्य पुजारी थे । उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत मां की सेवा में समर्पित किया था । Read more »

वस्तू अर्पित करते समय उसके मूल्य की अपेक्षा उस समय रखा गया भाव महत्त्वपूर्ण है ! – गुरु गोविंदसिंह

यमुना के पावन तटपर शिखों के दसवे एवं अंतिम गुरु गोविंदसिंह अपने अमृतवचनोंद्वारा श्रोतागणों के हृदय प्रफुल्लित कर रहे थे । Read more »