तुलसी विवाह

यह विधि कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमातक किसी भी दिन करते हैं । श्रीविष्णु (बालकृष्ण की मूर्ति) का तुलसी से विवाह करने की यह विधि है । इस हेतु, विवाह के पहले दिन तुलसी-वृंदावन को रंगकर सुशोभित करते हैं । वृंदावन में गन्ना, गेंदे के पुष्प डालते हैं एवं जड के पास इमली एवं आंवला रखते हैं । यह विवाह समारोह संध्या समय करते हैं ।

विशेषताएं : कार्तिक शुक्ल द्वादशीपर तुलसी विवाह उपरांत चातुर्मास में रखे गए सर्व व्रतों का उद्यापन करते हैं । जो पदार्थ वर्जित किए हों, वह ब्राह्मण को दान कर, फिर स्वयं सेवन करते हैं ।