हिंदुओंका धर्म-परिवर्तन करनेके पीछे अहिंदुओंका उद्देश्य !

वर्तमानमें हिंदुस्थानमें ईसाई, मुसलमान और बौद्ध धर्मीय हिंदुओंका धर्म-परिवर्तन करवा रहे हैं । उनका उद्देश्य विस्तृतरूपसे आगे दे रहे हैं ।

१. हिंदुस्थानका ईसाईकरण

ईसाइयोंद्वारा धर्म-परिवर्तन करवानेका यह मूल उद्देश्य है । इसीलिए हिंदुस्थानमें ईसाई मिशनरी और चर्च कार्यरत हैं, इसका प्रमाण देनेवाले कुछ विचार आगे दे रहे हैं ।

१ अ. पोप जॉन पॉल द्वितीय

‘प्रथम सहदाब्दीमें यूरोपमें ईसाई पंथने पैर जमाए । द्वितीय सहदाााब्दीमें वह अमरीका एवं अफ्रीका खंडोंमें बढा । अब तृतीय सहदाााब्दीमें शेष विश्वमें और हिंदुस्थानमें ईसाई पंथ दृढ हो, ऐसी हम प्रार्थना करते हैं ।’ – पोप जॉन पॉल द्वितीय (१९९९ में भारत-भ्रमणके समय व्हृाक्त किए गए विचार)

१ आ. मदर टेरेसा

‘(लोगोंका) धर्म-परिवर्तन करना, ईसाई मिशनरियोंकी कार्यप्रणालीका प्राण है । वह न हो, तो मिशनरी मृतवत् हो जाएंगे ।’ – मदर टेरेसा
ऐसे दृष्टिकोणसे भारतमें सेवाकार्य करनेवाली मदर टेरेसाको धर्मनिरपेक्ष सरकारने देशका सर्वोच्च पुरस्कार ‘भारतरत्न’ प्रदान किया, यह ध्यानमें रखें !

१ इ. फादर जॉन्सन

‘हम पाश्चात्योंपर विश्वको ईसाई बनानेका दबाव रहता है । ‘ईसाई धर्म न माननेवाले नरकमें जाएंगे’, हम यह मानते हैं । इस कारण ईसा मसीहका संदेश सर्वत्र पहुंचाते रहते हैं । ‘सर्व धर्म एकसमान हैं’, यह हिंदु समझते हैं । इसलिए, हिंदुस्थान धर्म-परिवर्तनके लिए उचित देश है ।’ – फादर जॉन्सन (१०)

भारतमें १० वर्षसे हिंदुओंका धर्म-परिवर्तन करनेवाले अमरीकी फादर जॉन्सनने अज्ञानी भारतीयोंको एकल देवताकी उपासना करनेके लिए प्रवृत्त करनेका कार्य किया; इसलिए केंद्रशासनने उनका स्वागत किया था, यह ध्यानमें रखिए !

 

२. हिंदुस्थानका इस्लामीकरण

‘दारुल इस्लाम’ (इस्लामी देशोंका जगत्) और ‘दारुल हरब’ (इस्लामेत्तर देशोंका जगत्) इस प्रकारसे मानवजातिका विभाजन इस्लामने किया है । ‘दारुल हरब’का संपूर्ण इस्लामीकरण अर्थात् ‘दारुल इस्लाम’ होनेतक ‘जिहाद’, अर्थात् धर्मयुद्ध करनेकी शिक्षा इस्लामकी देन है ।’

‘धर्मांतरण भी इस्लामकी दृष्टिसे एक प्रकारका जिहाद है । ‘दारुल-हरब’ हिंदुस्थानको इस्लाममय करनेके लिए गत १ सहदाा ३०० वर्षसे तलवार, बंदूक, प्रेमका नाटक (लव जिहाद) आदि माध्यमोंसे हिंदुओंका धर्म-परिवर्तन जारी है ।’ साप्ताहिक ‘वङ्काधारी’ (१७.२.२०११)

 

३. बौद्धमय भारतका निर्माण

हिंदुस्थान बौद्ध राष्ट्र बने, इसके लिए चीन और जापानके धनसे भारतके पिछडे क्षेत्रोंमें ‘ड्रैगन पैलेस’ खडे किए जा रहे हैं । इस माध्यमसे हिंदुओंका धर्म-परिवर्तन किया जा रहा है । विशेषरूपसे दिल्ली, उत्तरप्रदेश और बिहार आदि राज्योंमें इस प्रकारके प्रयत्न किए जा रहे हैं । हिंदुओंकी कथित पिछडी जातियोंके मनमें कथित उच्चवर्णियोंके विषयमें द्वेष उत्पन्न कर उन्हें बौद्ध बनानेका प्रयत्न भी देशके नवबौद्धोंद्वारा किया जा रहा है । प्रत्यक्षमें गौतम बुद्धको हिंदु धर्मने नौवां अवतार माना है ।

संदर्भ : हिंदू जनजागृति समिति’द्वारा समर्थित ग्रंथ ‘धर्म-परिवर्तन एवं धर्मांतरितोंका शुद्धिकरण’

राष्ट्र एवं धर्म रक्षा के लिए कार्यरत
हिन्दू जनजागृति समिति को
दिया गया धर्मदान ‘सत्पात्र दान’ होगा !