श्रद्धा की कसौटी ! 

एक साधु महाराज श्री रामायणजी की कथा सुनाते थे । उनकी कथा सुनकर लोग आनंद विभोर हो जाते थे । साधु महाराज का एक नियम था, प्रतिदिन वह कथा प्रारंभ करने से पहले हनुमानजी को कथा सुनने के लिए आमंत्रित करते थे । एक महाशय ने साधु महाराज से पूछा, ‘महाराज, आप जो गद्दी प्रतिदिन हनुमान जी को देते हैं, उसपर क्‍या हनुमानजी वास्‍तव में विराजमान होते हैं ?’ Read more »

लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा का वध ! 

हमे पता है कि प्रभु श्रीराम विष्‍णु के अवतार और मर्यादा पुरुषोत्तम थे । उनके अवतार काल मे उन्‍होंने अनेक राक्षसों का वध किया । श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण ने शूर्पणखा नामक राक्षसी का वध किया । अब हम यह कथा सुनेंगे । Read more »

सत्‍यनिष्‍ठ राजा हरिश्‍चंद्र ! 

महाराज त्रिशंकु के पश्‍चात हरिश्‍चंद्र अयोध्‍या के राजा बने । महाराज हरिश्‍चंद्र सत्‍यवादी थे । उन्‍होंने अपने जीवन में कभी झूठ नहीं बोला था । वह बहुत बडे धर्मात्‍मा भी थे । वह अपना वचन पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकते थे । सत्‍यवादी और धर्मात्‍मा राजा हरिश्‍चंद्र की कीर्ति चारों ओर फैली हुई थी । इंद्रदेव ने महर्षि विश्‍वामित्र को हरिश्‍चंद्र की परीक्षा लेने के लिए कहा । Read more »

निरपेक्ष प्रेम ! 

एक गांव में एक बूढी माई रहती थी । उसका इस संसार में कोई नहीं था । इसलिए वह अकेली ही अपना जीवन बिता रही थी ।
एक दिन उस गांव में एक साधु महाराज आए । जब साधु महाराज जाने लगे तो बूढी माई ने कहा, ‘महात्‍मा जी ! आप तो ईश्‍वर के परम भक्‍त है । कृपा करके मेरा अकेलापन दूर करने का उपाय बताएं । ‘ Read more »

अनंत चतुर्दशी की कथा !

आप कौरवों तथा पांडवों की कथा तो जानते ही हैं । पांडवों के बडे भाई युधिष्‍ठिर थे । वह इन्‍द्रप्रस्‍थ के राजा थे । युधिष्‍ठिर ने वहां एक ऐसा महल बनवाया था जो कि बहुत ही सुंदर और अद्भुत था । उस महल की विषेशता यह थी कि उसमें जल और स्‍थल में अंतर ही नहीं दिखाई देता था । जल के स्‍थानपर स्‍थल और स्‍थल के स्‍थानपर जल के जैसा भ्रम उत्‍पन्‍न होता था । Read more »

गजेन्‍द्र मोक्ष ! 

यह बहुत प्राचीन काल की बात है । द्रविड देश में इंद्रद्युम्न राजा राज्‍य करते थे । वह भगवान श्रीविष्‍णु के परम भक्‍त थे । वह भगवान की आराधना में ही अपना अधिक समय व्‍यतीत करते थे । उनके राज्‍य में सर्वत्र सुख-शांति थी । प्रजा संतुष्ट थी । इंद्रद्युम्‍न का ऐसा भाव था कि भगवान श्रीविष्‍णु ही उनके राज्‍य की व्‍यवस्‍था करते हैं । Read more »

रामभक्‍त त्‍यागराज ! 

लगभग ४०० वर्ष पूर्व तमिलनाडु में त्‍यागराज नामक एक रामभक्‍त रहते थे । वह उत्तम कवि भी थे । वह प्रभु राम के भजनों की रचना करते तथा उन्‍हीं भजनों को वह गाते भी थे । वह सदैव रामनाम में ही डूबे रहते थे । Read more »

घमंड का परिणाम !

राजा भोज के दरबार में कालिदास नामक एक महान और विद्वान कवि थे । उन्‍हें अपनी कला और ज्ञान का बहुत घमंड हो गया था । एक बार कवि कालिदास भी यात्रा पर निकले । मार्ग में उन्‍हें बहुत प्‍यास लगी । वह अपनी प्‍यास बुझाने के लिए मार्ग में किसी घर अथवा झोपडी को ढूंढ रहे थे, जहां से पानी मांगकर वह अपनी प्‍यास बुझा सकें । Read more »

भगवान श्रीकृष्‍णजी की कृपा ! 

भगवान श्रीकृष्‍ण का एक बहुत धनवान भक्‍त था; परंतु वह पैरों में अत्‍यधिक पीडा होने के कारण चल नहीं पाता था । उसे एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर जाने के लिए उठाकर ले जाना पडता था । उसी ग्राम में भगवान श्रीकृष्‍ण का एक और बहुत गरीब भक्‍त था और उसी मंदिर में वह अपनी पुत्री के विवाह के लिए पूर्ण श्रद्धा से प्रार्थना कर रहा था । Read more »

कुबेर का अहंकार ! 

क्‍या आप जानते हैं कि, कुबेर कौन थे ? कुबेर रावण के भाई थे । कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनवान हैं । अभी भी किसी धनवान व्‍यक्‍ति को समाज के लोग कहते हैं कि, उसके पास तो कुबेर का खजाना है ।

एक दिन कुबेर के मन में विचार आया कि उनके पास इतनी सारी संपत्ति है, परन्‍तु बहुत ही कम लोगों को इसकी जानकारी है । इसलिए उन्‍होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्‍य भोज का आयोजन किया । अर्थात उन्‍हें अपनी संपत्ति का अहंकार हो गया था । Read more »