पुस्तकों की देखभाल इस प्रकार कीजिए !

पुस्तकोंपर प्लास्टिक का वेष्टन चढाकर ही पढें!
उंगलियों को थूक लगाकर पन्ने न पलटें !
चिन्ह के लिए पृष्ठ का कोना तथा पृष्ठ को नहीं मोडना चाहिए !
पुस्तक अलमारी में रखते समय उसे लिटाकर रखें!
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पाठशाला को विद्या का मंदिर समझकर आदर्श पद्धति से आचरण करें !

बच्चो, आगामी जीवन में सफल होने के लिए पाठशाला में प्रामाणिकता से आचरण कर एवं गुणसंपन्न बनकर हिंदुस्थान के भावी आधारस्तंभ बनें !
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विद्यार्थियों, शिक्षकों के साथ आपका आचरण ऐसा होना चाहिए . . .

‘शिक्षक वह व्यक्ति है जो विद्यार्थियों को प्रतिदिन नवीन ज्ञान देते हैं । शिक्षक विद्यार्थियों के लिए तन एवं मन का त्याग करते हैं । उनके कारण विद्यार्थियों को जीवन की दिशा मिलती है । Read more »

हस्ताक्षर सुंदर एवं सुवाच्य हों !

अक्षर से मानव की परख करना संभव है, यह कहना अनुचित न होगा । किसी के हस्ताक्षर देखते ही उसके व्यवस्थितता, अनुशासन, कलात्मकता आदि अनेक गुण हमारे ध्यान में आते हैं । Read more »

वाचन करते समय अपने नेत्रों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें !

‘पढोगे तो बचोगे’ ये कहावत आपने सुनी ही होगी ।पढते समय आगे दी गई बाते ध्यान में रखने छोटी-छोटी बीमारियां टाल सकते हैं। पढते समय ध्यान कैसे रखें । Read more »

हमेशा अच्छे मित्रों की संगत में रहना !

हमारे जीवन में मित्रों का अधिक महत्त्व रहता है; क्योंकि शालेय जीवन में हमें अनेक सहेलीयां तथा मित्र रहते हैं । उनकी कृतीयां अथवा उनकी आदतों का हमारे मनपर कुछ ना कुछ परिणाम होता रहता है । Read more »

नई कलाएं सीखकर छुट्टी को सार्थक करें !

विद्यार्थी मित्रो, अब अपकी परीक्षाएं समाप्त होकर छुट्टी आरंभ हुई है । छुट्टी अपने व्यक्तित्त्व को सुंदर आकार देनेवाली एवं नए-नए कलाकौशल सीखने की मुक्त पाठशाला ही है । Read more »