व्यायाम करते समय बरती जानेवाली सावधानियां ।

सर्वप्रथम सम्पूर्ण शरीर को तेल लगाएं । इसके लिए नारियल तेल, तिल का तेल, बिनौला (कपास का बीज) तेल इत्यादि में से किसी भी तेल का उपयोग कर सकते हैं । इस प्रक्रिया को अभ्यन्ग कहते हैं । नियमित अभ्यन्ग करने से त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार होता है, ताजगी का अनुभव होता है, दृष्टि में सुधार होता है और शरीर पुष्ट होकर बलवान बनता है ।

व्यायाम में शक्ति का प्रमाण

अभ्यंग के पश्‍चात व्यायाम हेतु शरीर की आधी शक्ति का उपयोग करें । अर्थात व्यायाम करते समय श्‍वसन मुख से प्रारम्भ होनेपर यह समझें कि शरीर की आधी शक्ति का उपयोग हो चुका है । यदि और व्यायाम करना हो, तो थोडा रुकें तथा पुनः नाक से सुचारू रूप से श्‍वसन प्रारम्भ होनेपर व्यायाम प्रारम्भ करें । व्यायाम न्यूनतम २० मिनट करें । सूर्यनमस्कार भी कर सकते है ।

व्यायाम से संबंधित कुछ प्रायोगिक सूचनाएं

१. यदि आप व्यायाम पहली बार ही कर रहे हों, तो प्रथम दिन अधिक व्यायाम न करें । व्यायाम प्रतिदिन थोडा-थोडा बढाएं और जितना व्यायाम आप कर सकते हों उतना ही व्यायाम करें ।

२. व्यायाम के उपरांत शरीर के तापमान में वृद्धि होती है । सर्दी के दिनों में सवेरे उठने पर यदि अधिक ठंडका अनुभव हो, तो २मिनट अपने स्थान पर ही दौडने से (जॉगिन्ग करने से) ठंडकी मात्रा न्यून हो जाती है ।

३. व्यायाम के पश्‍चात २मिनट सूखे तौलिये से अथवा अपने हाथों से सर्व शरीर को रगडें । इससे व्यायाम के कारण बढा हुआ वात न्यून होता है । इस के साथ ही घर्षण से विशिष्ट विद्युतप्रवाह उत्पन्न होकर यह प्रवाह रोगों को नष्ट करता है ।

४. व्यायाम के आधे घंटे पश्‍चात स्नान करें । बीच की कालावधि में कपडे धोना, पढना अथवा नामजप कर सकते हैं ।

५. अभ्यंग के उपरांत यदि व्यायाम नहीं करना है, तो २०मिनट के पश्‍चात स्नान कर सकते है । यदि आप को शीघ्रता है, तो अभ्यंग के ५मिनट उपरांत स्नान कर सकते है । तेल ५मिनट में ही त्वचा में सन जाता है । शरीरपर ५मिनट तक मर्दन करने से यह साध्य हो जाता है । तब भी तेल लगाकर २०मिनट तक रुकना उत्तम है ।

६. व्यायाम के पश्‍चात १५मिनट शांत बैठकर पढाई अथवा नामजप करें । तदुपरांत ५मिनटतक शरीर को तेल लगाकर कुछ समय रुककर स्नान करें ।

७. ऐसा नहीं है कि, अभ्यन्ग करने के (शरीर को तेल लगाकर) पश्‍चात व्यायाम करने पर पसीना नहीं आता । अपितु अभ्यन्ग कर व्यायाम करने से तेलका कार्य उचित पद्धति से पूर्ण होता है ।

– वैद्य मेघराज पराडकर, आयुर्वेदाचार्य, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

संदर्भ : दैनिक सनातन प्रभात