जलप्रदूषण अर्थात नदियोंपर अत्याचार !

जल प्रदूषित न करें

धर्मशास्त्र कहता है जल कभी एवं कहीं प्रदूषित न होने दें । जल नारायण का है । इसलिए नदियों की पवित्रता‘भारतीयों की वाहिनियों में प्रवाहित हो रहा है । नदियों में साबुन लगाकर स्नान करना वर्जित है । नदी में कुल्ला करना भी वर्जित है । इतनी सावधानी रखी जाती है । यदि वह जल ही प्रदूषित हो जाए तो … ? जल प्रदूषित करनेवाले को गोहत्या का पाप लगना : स्मृतिकार कहते हैं कि, ‘जल प्रदूषित होनेपर जीवन ही समाप्त हो जाएगा । जल प्रदूषित करनेवाला महापापी होता है । जो जल में मलमूत्र करता है, दूषित जल प्रवाहित करता है तथा गांव की नालियों का दूषित जल प्रवाहित करता है वह अनेक पापों से लिप्त हो जाता है । वह गोहत्या के पाप से ग्रस्त हो जाता है ।’

१. पवित्र नदी का नाली में रूपांतर

देहली के अति निकट से बहनेवाली यमुना नदीपर इस नगरद्वारा अक्षरशः अत्याचार हो रहे हैं । नगर का पूर्ण ५७ प्रतिशत, अर्थात प्रतिदिन ३ अरब लीटर दूषित पानी नदी में छोडा जाता है । केवल एक घंटे में २४ लोगोंने लोकनायक सेतू नामक नए पुलपर से निर्माल्यसहित कई चुटपुट वस्तुएं नदी में डाल दी, तो एक पंचतारांकित उपहारगृह में (होटल में) बचा तथा ग्राहकों का जूठा अन्न एक बंद ‘पॅजो’ रिक्शा से लाकर निर्लज्जता से पुलपर से यमुना में फैंका गया, ऐसा स्थानीय लोगोंने बताया ।

२. नदी का कूडेदान में रूपांतर करनेवाली कृतघ्न जनता !

प्लास्टिक के कचरे का तो यमुना के पात्र में अक्षरशः ढेर पडा रहता है । नदी के तटपर कुछ दूरीपर इकट्ठा किया हुआ कचरे का ढेर देखने से आंखें चकाचांद हो जाती हैं । इसमें पानी की बोतलें बडी संख्या में दिखाई देती हैं । बिक्री के लिए इन्हें इकट्ठा कर जीवन-यापन चलाने का बडा उद्योग यहां चलता है ।

३. विश्वविख्यात वास्तू का किया गया अनादर

आग्रा में ताजमहल के निकट से बहनेवाली यमुना का फेनयुक्त और काला-सा, दुर्गंधयुक्त पानी, ताज के पीछे फैली गंदगी और कचरा घृणा उत्पन्न करनेवाला था । इस वर्ष यमुना में आई बाढ के कारण ताजमहल के सामने दूसरी छोर के तटपर भारी मात्रा में कचरा फंसा हुआ था । इससे संपूर्ण परिसर विरुप हुआ था । पर्यटन का ऋतू (सीजन) रहते हुए भी उसकी स्वच्छता नहीं हुई थी ।कानपूर में गंगाजी का प्रदूषण सर्वाधिक होता है ।

– शिवाजी निकुंभ, जलगांव, महाराष्ट्र.
संदर्भ : दैनिक लोकमत, १.४.२०११