शिष्य की परीक्षा

रामानुजाचार्य शठकोपस्वामीजीके शिष्य थे । स्वामीजीने रामानुजजीको ईश्वरप्राप्तिका रहस्य बताया था । परंतु उसे किसीको न बतानेका निर्देश दिया था; किंतु रामानुजजीने अपने गुरुकी इस आज्ञाको नहीं माना.. Read more »

स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज

आबाजी सोनदेव ने आगे बढकर शिवाजी महाराज को अभिवादन किया और सील-बंद कोशका संदूक प्रस्तुत करते हुए कहा, ‘‘आपके आशीर्वाद से हमने बीजापुर का यह कोश अपने अधिकार में ले लिया है । Read more »

विश्व को सुधारना असंभव होने के कारण स्वयं को सुधारना आवश्यक !

बहुत पहले एक राजाकी पुत्री के पांव में कांटा चुभा । साधारणतः राजाएं कुछ प्रमाण में सनकी होते हैं । Read more »

संतद्वारा जिज्ञासु को उसकी क्षमतानुसार साधना बताना

एक साधु के पास एक जिज्ञासु युवक आया और उसने साधु से पूछा, ‘‘क्या मुक्ति प्राप्त करने के लिए वन में जाना चाहिए ?’’ Read more »

एकता का सामर्थ्य

एक स्थानपर धार्मिक कार्यक्रम था । कार्यक्रम समाप्त होनेपर पुरूषमंडली बाहर निकली । महिलाएं भी बाहर निकल रहीं थी । उसी समय दो गोरे आरक्षक मद्य पीकर महिलाओंके व्दार के सामने आकर खडे हो गए । Read more »

अंतिम क्षण तक साथ देनेवाला महाराणा प्रताप का स्वामीनिष्ठ घोडा चेतक !

बालमित्रों, भारत के इतिहास में राजा महाराणा प्रताप का नाम अमर है । महाराणा प्रताप राजस्थान के शूरवीर एवं स्वाभिमानी राजा थे । Read more »

प्रल्हाद कथा

यह कथा श्री वसिष्ठजी द्वारा श्रीरामजी को योगवसिष्ठ में विद्यमान उपशम प्रकरण में कथन की गई है । इससे यह स्पष्ट होता है कि उपासना के योग से ईश्वर की कृपा प्राप्त कर ज्ञान संपन्नता आती है और आत्मज्ञान प्राप्त होने हेतु स्वयं के प्रयासों एवं विचारों की आवश्यकता है । Read more »

लाल बहादुर शास्त्री

अपने गरीब माता-पितापर बोझ न बनकर उनके पैसे बचाने के लिए प्रतिदिन गंगा नदी तैरकर पाठशाला में जानेवाला असामान्य साहसी बालक लाल बहादुर शास्त्री ! Read more »

मेरे पास भयंकर शस्त्र है । – स्वातंत्र्यवीर सावरकर

‘एक समय लंदन में गुप्तचरों ने स्वा. सावरकरजी को जांच-पडताल के लिए रोका और कहा, ‘‘महाशय, क्षमा कीजिए, हमें आपपर शंका है । Read more »