हिंदु वेदोंको मान्यता देते हैं और वेदोंमें विज्ञान बताया गया है । केवल सौ वर्षोंमें पृथ्वीको नष्टप्राय बनानेके मार्गपर लानेवाले आधुनिक विज्ञानकी अपेक्षा, अत्यंत प्रगतिशील एवं एक भी समाजविघातक शोध न करनेवाला प्राचीन ‘हिंदु विज्ञान’ था ।
पूर्वकालके शोधकर्ता हिंदु ऋषियोंकी बुद्धिकी विशालता देखकर आजके वैज्ञानिकोंको अत्यंत आश्चर्य होता है । पाश्चात्त्य वैज्ञानिकोंकी न्यूनता सिद्ध करनेवाला शोध सहस्रों वर्ष पूर्व ही करनेवाले हिंदु ऋषिमुनि ही खरे वैज्ञानिक शोधकर्ता हैं ।
हिंदुस्तानके गौरवशाली वैज्ञानिक इतिहासके स्मरणकी आवश्यकता क्यों ?
आज हिंदुस्तानमें सर्वत्र आधुनिक विज्ञानका उदात्तीकरण हो रहा है । ‘भारतीय ऋषिमुनियोंद्वारा किए गए शोधके नाम बताएं’, ऐसे पूछनेपर अधिकांश भारतीयोंके लिए बताना असंभव हैं ! हिंदुस्तानको अपना गतवैभव प्राप्त हो, इसके लिए उन्हें अपने गौरवशाली वैज्ञानिक इतिहासका स्मरण गर्वसे करना चाहिए । यह गौरवशाली वैज्ञानिक इतिहास पाठशाला एवं महाविद्यालयोंमें पढानेकी मांग भी करनी चाहिए । इस प्रयासके आरंभस्वरूप हिंदुस्तानके इस इतिहासके संग्रहमेंसे कुछ अनमोल रत्न आपके सामने रख रहे हैं ।
भारत में मैकाले के आने से पहले ब्रिटेन में अंग्रेजोंद्वारा भारतीय शिक्षाप्रणाली अपनाने का प्रयास
भगवान परशुराम
संपूर्ण विश्वके गणितज्ञोंको विस्मयचकित करनेवाला ‘वैदिक गणित’ !
परमाणुशास्त्रके जनक आचार्य कणाद !
गुरुत्वाकर्षणका गूढ उजागर करनेवाले भास्कराचार्य !
कर्करोग प्रतिबंधित करनेवाला पतंजलीऋषिका योगशास्त्र !