भगवान परशुराम


वैशाख शुक्ल द्वितीया को परशुराम जयंती है । इस उपलक्ष्यमें भगवान परशुरामसे संबंधित जानकारी प्राप्त करते हैं ।

परशुरामकी कथाएं रामायण, महाभारत एवं कुछ पुराणोंमें पाई जाती हैं । पूर्वकेअवतारोंके समान इनके नामका स्वतंत्र पुराण नहीं है ।

अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः ।
इदं ब्राह्मं इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि ।।

अर्थ : चार वेद मौखिक हैं अर्थात् पूर्ण ज्ञान है एवं पीठपर धनुष्य-बाण है अर्थात् शौर्यहै । अर्थात् यहां ब्राह्मतेज एवं क्षात्रतेज, दोनों हैं । जो कोई इनका विरोध करेगा, उसेशाप देकर अथवा बाणसे परशुराम पराजित करेंगे । ऐसी उनकी विशेषता है ।

मूर्ति : भीमकाय देह, मस्तकपर जटाभार, कंधेपर धनुष्य एवं हाथमें परशु, ऐसी होती हैपरशुरामकी मूर्ति ।

पूजाविधि: परशुराम श्रीविष्णुके अवतार हैं, इसलिए उन्हें उपास्य देवता मानकर पूजाजाता है । वैशाख शुक्ल तृतीयाकी परशुराम जयंती एक व्रत और उत्सवके तौरपर मनाईजाती है ।

संदर्भ : विष्णु एवं विष्णुके रूप