१८५७ के स्वतंत्रता संग्रामका प्रथम क्रांतिकारी वीर मंगल पांडे

मंगल पांडे ३४ वीं पलटन के युवा ब्राह्मण सैनिक थे । वे क्रांतिदल के सदस्य थे । कोलकाता के निकट बैरकपुर की १९ वीं पलटन को उस समय अंग्रेज अधिकारियोंने गाय और सूअर की चरबी लगे नए कारतूस देने का निर्णय लिया । Read more »

मेवाड के सिसोदिया राजवंश के शूरवीर राजपूत राजा : बाप्पा रावळ एवं राणासंग

मेवाडकी भूमिपर रचा गया इतिहास एवं चितौड, उदयपुर, हल्दी घाटी ये धर्मक्षेत्र अपनी तेजस्वी परंपराके कारण चिरकाल तक अमर रहेंगे, उनकी इतनी महत्ता है । Read more »

तात्या टोपे : स्वतंत्रता संग्राम १८५७ के सेनापति

तात्या टोपे का जन्म १८१४ में येवला में हुआ । उनके पिता का नाम पांडुरंग त्र्यंबक भट था । उनके पिता बाजीराव पेशवा के धर्मदाय विभाग के प्रमुख थे ।
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हरगढ

इतिहास में इस किले का कोई विशेष वर्णन नहीं है । क्योंकि यहां कोई बडा युद्ध नहीं हुआ । मुल्हेर गांव में जाने के उपरांत हरगढ के दर्शन होते हैं । Read more »

संत नामदेव

एक बार संत ज्ञानेश्वर और संत नामदेव दोनों एक साथ तीर्थयात्रापर निकले । वाराणसी, गया, प्रयाग घूमते-फिरते वे औंढ्या नागनाथ पहुंचे । Read more »

अपनी आयु के १८ वें वर्ष में मातृभूमिपर अपने प्राणों को न्योछावर करनेवाले हुतात्मा अनंत कान्हेर !

अनंतराव का जन्म १८९१ में रत्नागिरी जनपद के आयनी-मेटे गांव में हुआ । अंग्रेजी शिक्षण हेतु वह अपने मामा के पास संभाजीनगर (औरंगाबाद) गए थे । Read more »

महिपतगढ

खेड तहसील के पूर्व में रसालगढ-सुमारगढ और महिपतगढ इन पहाडों की पंक्ति हैं । इन पंक्तियों में उत्तर की ओर महिपतगढ है । यह सबसे ऊंचा एवं बडा विस्तृत भी है । Read more »

भारत माता के वीर सपूत और अंग्रेज अत्याचारियों के काल : चापेकर बंधू

दामोदर हरि चापेकर का घराना मूल कोकण के वेळणेश्वर का था; किन्तु उनके पूर्वज पुणे के निकट चिंचवड में आकर बस गए । Read more »

रायरेश्वर

इसी रायरेश्वर के पर्वतपर शिवाजी महाराजने स्वराज्य की शपथ ली । मात्र यह घटना काल्पनिक है कि सत्य, इस विषय में कुछ निश्चित कहना कठिन है । Read more »

वराहमिहिर

ग्रहोंका वैज्ञनिक दृष्टिसे अध्ययन करनेवाले ५वें शतकके सुप्रसिद्ध भारतीय खगोलशास्त्री वराहमिहिरजीने खगोलशास्त्र, फलज्योतिषविज्ञान आदि विषयोंका गहन अध्ययन किया था । Read more »