पू. गोलवलकर गुरुजी

पू. गोलवलकर गुरुजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय अध्यक्ष थे । उन्होंने संघ के लि्ए दिया हुआ अपना महत्त्वपूर्ण योगदान इस लेख से हम देखेंगे । Read more »

अवंतीबाई लोधी – पराक्रमी, धैर्यशील स्वतंत्रताप्रेमी वीरांगना !

स्वतंत्रताप्रेमी वीरांगना अवंतीबाई लोधी एक पराक्रमी, धैर्यशील और प्रसंगावधानी स्त्री थीं । शौर्यमूर्ति रानी अवंतीबाईने राज्य का नेतृत्व संभालकर अपने साहस, धैर्य आणि प्रसंगावधान, इन गुणों का परिचय दिया । Read more »

निळकंठ कृष्णन् – पाकिस्तानी युद्धनौका ‘गाझी’की आखेट करनेवाले भारतीय नौकाधिपती !

पाकिस्तान की युद्धनौका गाझी को पानी में डूबा देने का सफल पराक्रम भारतीय नाविक दल ने किया । इस युद्धनीति में नौकाधिपती कृष्णन्का महत्त्वपूर्ण योगदान था । उनके विषय में इतिहास बतानेवाला यह लेख… Read more »

गुरु गोविंद सिंहजी – खालसा पंथ के संस्थापक

गुरु गोविंद सिंह सिख पंथ के १० वे गुरु थे । गुरु गोविंद सिंहने सब सिखों को संगठित कर धर्म के लिए मर-मिटनेवाले ५ शिष्यों को चुना, जिन्हें पंच प्यारे कहते हैं । Read more »

संत निवृत्तीनाथ

संत निवृत्तीनाथ संत ज्ञानेश्वर के बडे भाई तथा गुरु थे । उनके माता-पिता के देहत्याग के बाद सारा भार निवृत्तीनाथपर आया था । निवृत्तीनाथने ज्ञानदेव, सोपानदेव तथा मुक्ताबाई का माता-पिता की तरह ममता से पालन किया । Read more »

बच्चो, राष्ट्र की रक्षा करनें का निश्चय कर स्वतंत्रता दिवस मनाएं !

अपने स्वतंत्रतासैनिकोंने १५० वर्ष की अंग्रेजों की दास्यता से हमारे देश को मुक्त किया । इसीलिए स्वतंत्रतादिन का यह समारोह हमें मनाना संभव हो रहा है । अंग्रेजों की दास्यता से हमारा देश मुक्त हो गया । इसके स्मरण के रूप में हम प्रतिवर्ष यह समारोह मनाते हैं । Read more »

छत्रपती शिवाजी महाराज जैसा आदर्श राजा बनाना ही खरा शिवराज्याभिषेक दिन !

विद्यार्थी मित्रो, ज्येष्ठ शु. त्रयोदशी, कलियुग वर्ष ५११५ को शिवराज्याभिषेक दिन है । आज के शासकों की मानसिकता देखकर हमें ज्ञात होगा कि आज छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राजा की आवश्यकता क्यों है । शिवाजी महाराज जैसे राजा के कारण ही राष्ट्र की, धर्म की एवं हमारी भी रक्षा होगी । Read more »

श्री गाडगे महाराज (इ.स. १८७६-१९५६)

श्री डेबूजी झिंगराजी उर्फ गाडगे महाराजजी का जन्म विदर्भ के कोते नामक गांव में हुआ था । वे धोबी समाज के थे । गाडगे महाराजने अपनी आयु के आठवें वर्ष से अपने घर की विपन्न/संकटग्रस्त परिस्थिति का, अपने समाज के पिछडेपन का, समाज के अनपढ होने का निरीक्षण किया । Read more »

श्रीपाद श्रीवल्लभ

भगवान दत्तात्रेय के प्रथम अवतार श्रीपाद वल्लभ के विषय में अत्यल्प बातें ज्ञात हैं । इस पार्श्वभूमिपर गणेश चतुर्थी के अवसरपर श्रीपाद श्रीवल्लभ के अलौकिक कार्य तथा उनके इस जन्मक्षेत्र पीठापुरम के संदर्भमें संक्षिप्त ब्यौरा । Read more »