`वदनि कवळ घेता नाम घ्या श्रीहरीचे !’बच्चो, निम्नलिखित भोजनसंबंधी सूचनाओं का पालन करें ।

१. भोजन का स्थान एवं भोजन परोसने की सामग्री को स्वच्छ रखें ।

२. भोजन करना प्रारंभ करते समय हाथ, पांव एवं मुख धोकर बैठें ।

३. टेबल-कुर्सी अथवा केवल भूमिपर बैठने की अपेक्षा आसन बिछाकर अथवा पटेपर बैठें ।

४. भोजन प्रारंभ करनेपूर्व निम्नलिखित श्लोकका उच्चारण करें ।

वदनि कवळ घेता नाम घ्या श्रीहरीचे ।
सहज हवन होते नाम घेता फुकाचे ।
जिवन करि जिवित्वा अन्न हे पूर्णब्रह्म ।
उदरभरण नोहे जाणिजे यज्ञकर्म॥१॥

जनीं भोजनी नाम वाचे वदावे ।
अती आदरे गद्यघोषे म्हणावे ।
हरीचिंतने अन्न सेवित जावे ।
तरी श्रीहरी पाविजेतो स्वभावे॥२॥

५. अन्नग्रहण करनेपूर्व की जानेवाली प्रार्थना – ‘हे भगवन, यह अन्न आपके चरणों में अर्पण कर यह आपका प्रसाद है, इस भाव से मैं ग्रहण कर रहा हूं ।इस प्रसादद्वारा मुझे शक्ति एवं चैतन्य प्रदान करें ।’

६. अन्न भगवानजी को अर्पण करें तथा उसके उपरांत भगवानजी का प्रसाद समझकर नामजप के साथ ग्रहण करें ।

७. एक दूसरे का जूठा अन्न खाने से अनिष्ट शक्तियों की पीडा होने की संभवना होती है अतः जूठा अन्न न खाएं ।

८. अन्नपर पैर न पडे इसके लिए भोजन के उपरांत बर्तन के नीचे पडे हुएअन्न के कण उठाएं ।