स्नान के उपरांत यह किजीए !

भगवान की पूजा करें

पूजाघर में पूजा हो चुकी हो, तो स्नान के उपरांत प्रथम पूजाघर के सामने खडे होकर भगवान को हलदी-कुमकुम एवं फूल चढाएं । भगवान के सामने अगरबत्ती जलाएं एवं उसे घुमाएं यदि पूजा न हुई हो, तो बडों से अनुमति लेकर स्वयं पूजा करें ।

श्री गणेशवंदन एवं अन्य श्लोक पाठ करें

भगवान की पूजा के उपरांत श्री गणेशजी को वंदन करें एवं दोनों हाथ जोडकर निम्नलिखित श्लोक बोलें ।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।

अर्थ : (दुर्जनों का नाश करनेवाली) टेढी सूंडवाले, महाकाय (शक्तिमान) एवं कोटि-कोटि (करोडों) सूर्यां का तेज धारण करनेवाले श्री गणेशजी, मेरे सर्व कार्य बिना किसी विघ्न के सदा सफल होने दीजिए ।

तदुपरांत स्मरण किए अन्य श्लोकों का पाठ करें ।

भगवान से प्रार्थना करें !

अ. हे प्रभु, दिनभर अच्छे कार्य करने में आप मेरी सहायता कीजिए एवं बुरे कार्यों से मुझे दूर रखिए ।

आ. हे कुलदेवता, आपके नामजप का मुझे निरंतर स्मरण रहे, ऐसी कृपा कीजिए ।

इ. हे श्रीराम, मुझे सर्व बडों का आदर करना सिखाइए ।

ई. हे श्रीकृष्ण, मुझे अपने देश एवं धर्म के प्रति प्रेम अनुभव होने दीजिए ।

भगवान को नमस्कार करें

कुलदेवता अथवा उपास्यदेवता तथा अन्य देवता को मनःपूर्वक साष्टांग नमस्कार करें । साष्टांग नमस्कार करना संभव न हो, तो हाथ जोडकर नमस्कार करें ।

भगवान का नामजप करें

अंतमें न्यूनतम १० मिनट बैठकर भगवान का नामजप करें । कौन से भगवान का नामजप करें, यह प्रश्न आपके मन में उत्पन्न होगा ।

अ. छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने अपनी कुलदेवी श्री भवानीमाता की उपासना की । श्री भवानीमाता के आशीर्वाद से वे ‘हिंदवी स्वराज्य’ की स्थापना कर पाए । बच्चो, अन्य देवी-देवताओं की अपेक्षा हमारे कुलदेवता हमारी पुकार को तत्काल सुनते हैं; इसलिए उनकी उपासना करने के लिए उनका नामजप करें ।

आ. नामजप करते समय देवी-देवता के नामके पूर्व ‘श्री’ लगाएं, नाममें चतुर्थी का प्रत्यय लगाएं एवं अंतमें ‘नमः’ कहें, उदा. कुलदेवता भवानीदेवी हो, तो ‘श्री भवानीदेव्यै नमः,’ ऐसा नामजप करें । उपास्यदेवता गणेश हों, तो ‘श्री गणेशाय नमः,’ ऐसा नामजप करें । कुलदेवता ज्ञात न हो, तो उपास्यदेवता का नामजप करें ।

इ. दिनभर में भी बीच-बीच में नामजप करने का प्रयत्न करें

सूर्यास्त के समय यह करें !

‘शुभं करोति’ का पाठ करें ! : सूर्यास्त के उपरांत संधिकाल आरंभ होता है । इसके लिए हाथ-पांव एवं मुंह धोकर भगवान के पास दीप जलाएं एवं भगवान के सामने हाथ जोडकर आगे दिया श्लोक बोलें ।

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसंपदाम् ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ।।

अर्थ : दीपज्योति शुभ एवं कल्याण करती है, स्वास्थ्य एवं धनसंपत्ति देती है, शत्रुबुद्धि का अर्थात द्वेष का नाश करती है, इसलिए हे दीपज्योति आपको नमस्कार है ।

स्तोत्रपठन करें : श्रीरामरक्षास्तोत्र‘, ‘हनुमानचालीसा‘ जैसे स्तोत्र का पाठ करें ।

संदर्भ : सनातन निर्मित ग्रंथ ‘ सुसंस्कार एवं उत्तम व्यवहार’