समय का व्यवस्थापन

समय के व्यवस्थापन के संबंध में ऐसा कह सकते हैं कि हम अपने ८० प्रतिशत समय का उपयोग ऐसी बातों के लिए करते हैं, जो अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं तथा उसका प्रतिफल २० प्रतिशत प्राप्त करते हैं । अर्थात, अधिक महत्वपूर्ण बातों के लिए हम २० प्रतिशत समय का ही उपयोग करते हैं । इसलिए हम समय के अभाव का अनुभव करते हैं । समय की योजना बनाते समय आगे निम्नांकित बातोंपर ध्यान देना चाहिए ।

१. ध्येय निश्चित करें ।

२. पश्चात दीर्घकालीन तथा तुरंत साध्य किए जा सकनेवाले ध्येय पृथक करें ।

३. अब, आपके पास जो कार्य अपूर्ण रह गए हैं, तथा जिन्हें भविष्य में करनेका विचार है, उनकी सूची अलग-अलग बनाएं ।

४. इस सूची को तीन भागों में बनाएं; जैसे शीघ्र किए जानेवाले महत्वपूर्ण कार्य, शीघ्र परंतु अल्प महत्वपूर्ण कार्य तथा महत्वपूर्ण परंतु धीमी गतिसे किए जानेवाले कार्य ।

५. उनमें से शीघ्रता से किए जानेवाले महत्वपूर्ण कार्य को प्रथम करनेपर बल दीजिए । तत्पश्चात, क्रमशः अगला कार्य योजनाबद्ध ढंग से करते जाइए । इस पद्धति से कार्य करनेपर आपका कार्य सरल हो जाएगा ।

६. उपलब्ध समय का सदुपयोग करने का विचार करें तथा प्रतीक्षाकाल को ईश्वर का वरदान समझें ।

७. हाथ में लिया हुआ कार्य अधिकाधिक उत्तम रीति से पूर्ण करने का प्रयास करें ।

८. प्रत्येक बात ध्यान से सुनें, उदा. कोई संदेश लेते समय वह ठीकसे समझ गए हैं, यह निश्चित करें ।

९. किसी व्यक्ति को संदेश देते समय यह निश्चित करें कि वह व्यक्ति उस संदेश को भलीभांति समझ गया है ।

व्यर्थ जानेवाले समय को बचाने हेतु दैनंदिनी लिखें ।

किस कार्य में मेरा समय व्यर्थ जाता है, इसपर ध्यान देना आवश्यक है । तभी हम समय को व्यर्थ जाने से रोक सकते हैं । इसके लिए अपनी दिनचर्या दैनंदिनी में लिखें । उसमें आपका जो समय व्यर्थ गया है, उसका कारण लिखें तथा उसपर उपाय भी लिखें !

ध्यान रखें, समय का व्यवस्थापन, अर्थात स्वयं का व्यवस्थापन । जो उत्तम प्रकार से अपने कार्यों का व्यवस्थापन कर सकता है, वह अन्यों का व्यवस्थापन भी भलीभांति कर सकता है । इससे आपकी कार्यक्षमता बढती है !