विद्यार्थियो, दुर्गुणों का त्याग करो और सद्गुणी बनो !

१. अपने सहपाठियों को चिढाना, मारना जैसे कष्ट न दें !

२. कक्षा के चलते खाद्यपदार्थ न खाएं !

३. सवेरे शीघ्र उठने में आलस्य न करें और विद्यालय में समयपर पहुंचें !

४.विद्यलय में बताया गया गृहपाठ अपूर्ण न रखें !

५.‘पी.टी.’ करने का मन नहीं करता, इसलिए अस्वस्थ होने का झूठा कारण न बताएं !

६.परीक्षा के समय ‘कॉपी’ न करें अथवा एक-दूसरे को उत्तर न बताएं !

७. विद्यार्थियों के गणवेश को रंग लगाने जैसी अयोग्य चेष्टा न करें !

८. मित्र अनुपस्थित होते हुए भी उसकी उपस्थिति न लगाएं !

९. किसी विद्यार्थी ने खाने का डिब्बा न लाया हो, तो उसे अपने डिब्बे का पदार्थ दें !

१०.शिक्षकों के विनोदी नाम न रखें । उनका अनादरपूर्वक उल्लेख न करें !

११.शिक्षक के पढाते समय उसकी अनदेखी कर, उपद्रव न मचाएं !

१२.शिक्षकों को उल्टा उत्तर देना, नए शिक्षकों की भांड (नकल) करना इत्यादि न करें !

विद्यार्थी मित्रों, ‘अपना विद्यालय विद्याकी देवी श्री सरस्वती का देवालय है’, ऐसा भाव रख अपना ‘विद्यामंदिर’ पवित्र रखें । इससे सरस्वतीदेवी प्रसन्न होंगी और हमें अच्छी विद्या मिलेगी ।