सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ।।
अर्थ : जो सब मंगलकार्यों में मांगल्यस्वरूप हैं, जो सबका कल्याण करनेवाले शिव समान हैैं, जिन्हें त्र्यंबके, गौरी और नारायणी नामों से संबोधित किया जाता है, उस (दुर्गादेवी) को मैं नमस्कार करता हूं ।
विघ्न हरने के लिए की जानेवाली श्रीगणेश की प्रार्थना
श्रीविष्णु के स्मरण हेतु श्लोक
भगवान श्रीकृष्ण की प्रार्थनास्वरूप श्लोक
श्रीरामरक्षास्तोत्र में हनुमानजी की प्रार्थना से युक्त प्रसिद्ध श्लोक
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श्री सूर्यदेव से प्रार्थना