विद्यार्थियो, केवल परीक्षार्थी न बनें, तो वास्तव में विद्यार्थी बनने का प्रयास करें !

आजकल अधिकांश विद्यार्थी एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने को ही अध्ययन समझते हैं । उनके लिए यही अध्ययन की परिभाषा है । इसलिए बच्चे अज्ञानवश विद्यार्थी बनने के स्थान पर परीक्षार्थी बनते जा रहे हैं । बच्चो, आपका ध्येय केवल परीक्षा में उत्तीर्ण होना नहीं है; अपितु बडे होकर अर्जित विद्या से (ज्ञान से) विद्यादान करना, विद्या का उपयोग राष्ट्र एवं धर्म के लिए करना यह आपका ध्येय रहना चाहिए ।

१. ज्ञानप्राप्ति में अर्थात सीखने में वास्तविक आनंद है !

बच्चो, कोई नई बात सीखने पर आपको आनंद मिलता है न ? अध्ययन करते समय मन में ऐसा विचार रखिए, अध्ययन करने से मुझे ज्ञान मिलेगा, कुछ नया सीखने को मिलेगा ।लोकमान्य तिलक गणित के प्रश्नपत्र के सरल प्रश्नों को नहीं; अपितु कठिन प्रश्नों को सुलझाने का प्रयास करते थे । वे कहते थे, जो सरल है, वह तो मुझे आता ही है ।

जो कठिन है, उसे सुलझाना वास्तविक निपुणता है । इससे समझ में आता है कि वे पढाई परीक्षा में अंक अर्जित करने के लिए नहीं; अपितु सीखने के लिए अर्थात ज्ञानी होने के लिए करते थे । बच्चो यह ध्यान में रखिए, ज्ञान प्राप्त करने में अर्थात सीखने में ही वास्तविक आनंद है ।

२. अध्ययन से अर्जित ज्ञान दैनिक जीवन में आचरण में लाइए !

किसी विषय का अध्ययन करने का अर्थ केवल परीक्षा के लिए उस विषय को रटना नहीं; अपितु वह विषय समझकर दैनिक जीवन में उसके अनुसार आचरण करना है ।

अ. नागरिकशास्त्र में पढाया जाता है कि वाहन सदैव सडक के बार्इं ओर से चलाना चाहिए । आप को भी दुपहिया वाहन (साइकिल) सदैव बाएंसे चलाना चाहिए ।

आ. विज्ञान में हम पढते हैं, खुले रखे अन्नपदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं । अतः यात्रा करते समय इसका स्मरण रखें एवं खुले में रखे अन्नपदार्थ खाने से बचें ।

२. परीक्षा का भय अथवा चिंता मन से कैसे दूर करें ?

परीक्षा का सहजता से सामना कैसे करें ? इस विषय के लिए कुछ उपयुक्त सूचनाएं :

बच्चो, परीक्षा निकट आते ही, आप में से अनेक बच्चों के मन में परीक्षा के नाम से ही भय उत्पन्न हो जाता होगा । परीक्षा से लगनेवाला भय अथवा चिंता दूर करने हेतु निम्नांकित सूचनाओं पर ध्यान दीजिए –

१.अपने विषय में नकारात्मक सोच न रखें । नकारात्मक विचार मन में आनेपर उन्हें लिख लें तथा उन विचारों के विषय में माता-पिता से चर्चा करें ।

२.अपनी क्षमता को समझें । दूसरों से तुलना न करें ।

३.ऐसा न मानें कि परीक्षा में अर्जित अंक ही सबकुछ है ।

४.विगत वर्षों के प्रश्नपत्रों के उत्तर लिखें, इससे आत्मविश्वास बढता है ।

५.परीक्षा के लिए जाने से पहले मार-काट, हत्या आदि दृश्योंवाले चलचित्र न देखें । आनंददायक क्षणों का स्मरण करें ।

६.परीक्षा के लिए जाने से पूर्व घर में बने अन्नपदार्थ ही खाएं ।

७. अपने मन को स्वयंसूचना दें : बच्चो, सर्वप्रथम स्वयंसूचना का अर्थ समझ ले सकते हैं, तत्पश्चात परीक्षा का भय दूर कर सकते हैं ।

विविध स्वयंसूचनाएं बनाने की पद्धतियां, स्वयंसूचनाएं कैसे देनी चाहिए,स्वयंसूचनाओं के उदाहरण आदिका विवेचन ‘दोष दूर करें एवं गुण संजोएं !’ इस ग्रंथ में किया गया है । यह ग्रंथ आप अवश्य पढें ।