पाठशाला जाने की पूर्वसिद्धता कर, साधिए मन की एकाग्रता

बच्चो, स्मरण कीजिए कि हम पाठशाला जाते समय कैसे जाते हैं ? देर रात तक दूरदर्शन के कारण प्रातः उठने के लिए देर होती है। स्नान नहीं करते, बाल व्यवस्थित करने के लिए समय नहीं मिलता । इस कारण आप केवल बालों को हाथ से ही ठीक कर लेते हैं । गडबडी में चाय पीकर, बहियां-पुस्तकें झोले में भरकर शीघ्रता से बस पकडते हैं । इस गडबडी में पाठशाला पहुंचते हैं, उसी समय कक्षा आरंभ होती है । उस समय ध्यान में आता है कि कल गृहपाठ करना रह गया था । अब तो कोई-न-कोई दंड अवश्य मिलेगा । मन की इस स्थिति में जो पढाया जाता है, वह अच्छी प्रकार से ग्रहण नहीं होता । इसलिए निम्नलिखित बातों पर प्रयास कीजिए !

पाठशाला जाने की पूर्वसिद्धता

१. पाठशाला में दिया गृहपाठ समय पर पूरा करें ।

२. समय-सूची में बताए विषयों के अनुसार बहियां, पुस्तकें एवं अन्य शालेय सामग्री स्वयं ही अपने बस्ते में अच्छे से रखें ।

३. नख कटे हुए होने चाहिए । (उन्हें सप्ताह में एक बार काटें ।)

४. पाठशाला का गणवेश स्वच्छ धुला एवं इस्त्री किया हो ।

५. छात्र माथे पर तिलक लगाएं ।

६. छात्राएं चूडियां पहनें, कुमकुम लगाएं और एक अथवा दो चोटियां करें । चोटी में यथासंभव गणवेश के पूरक रंग का फीता (रिबन) लगाएं, उदा. नीले गणवेश पर नीले रंग की रिबन लगाएं ।

७. भोजन का डिब्बा और पानी की बोतल अवश्य लें ।

पाठशाला में जाना

१. घर से इस प्रकार निकलें कि पाठशाला समयपर पहुंच सकें ।

२. घर से बाहर जाते समय मां अथवा घर के अन्य बडे व्यक्ति (उदा. दादा-दादी) को बताकर और भगवान को नमस्कार कर बाहर निकलें ।

३. मार्ग में मन-ही-मन कुलदेवता अथवा उपास्य देवता का नामजप करें ।

पाठशाला से घर आना

१. पाठशाला से घर लौटते समय मार्ग में मस्ती अथवा आपस में धक्कामुक्की न करें ।

२. घर लौटने पर जूते निकालकर व्यवस्थित रखें । बस्ता व्यवस्थित रखें । हाथ-पैर और मुंह धोएं ।

३. पाठशाला का गणवेश (यूनिफॉर्म) निकालक दूसरे कपडे पहनें ।

४. मांसे पूछकर अल्पाहार अथवा अन्य पदार्थ खाएं ।

५. पाठशाला का डिब्बा स्वयं ही मांजकर, पोंछकर रखें ।