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आपका विद्यार्थी जीवन आदर्श कैसे बनेगा ?

बालमित्रों, आगामी जीवन में सफल होने के लिए माता-पिता आपको विद्यालय भेजते हैं । उनका आपपर से विश्वास उठ जाए, ऐसा कार्य न करें । प्रामाणिकता से भरा आचरण कर एवं गुण संपन्न बनकर हिंदुस्थान के भावी आधारस्तंभ बनें ! इसके लिए क्या करना चाहिए यह आपको ध्यान में आने के लिए आपके लिए उपयुक्त जानकारी यहां प्रस्तुत कर रहे हैं ।

विद्यालय में निम्नानुसार आचरण करें !

१. साइकिल कतार में खडी करें और कक्षा में जाकर अपना बस्ता रखें ।

२. विद्यालय के प्रांगण में प्रार्थना के लिए एकत्र होते समय कक्षा से कतार में निकलें एवं कतार में ही खडे रहें । प्रार्थना के उपरांत पुनः कक्षा में कतार में ही जाएं ।

३. कक्षा में जाने के पश्चात् वास्तुदेवता, स्थानदेवता तथा विद्या के देवता श्री गणेश एवं श्री सरस्वतीदेवी को मन-ही-मन प्रणाम कर प्रार्थना करें कि ‘आपकी कृपा से ही मुझे इस वास्तु में ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला है । आज सिखाए जानेवाले सर्व विषयों का ज्ञान मैं एकाग्र मन से ग्रहण कर पाऊं ।’

४. प्रत्येक विषय का घंटा आरंभ होने पर प्रथम कुलदेवता अथवा उपास्यदेवता से प्रार्थना करें कि, ‘मुझे शिक्षक में आपका रूप दिखाई दे तथा अब कक्षा में अध्यापक जो पढाएंगे, उसे मैं भली-भांति समझ पाऊं ।’

५. विषय समाप्तिका घंटा बजने पर देवता के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करें कि ‘आपकी कृपा से अध्यापक का पढाया हुआ विषय मैं समझ पाया । इसलिए मैं आपके चरणों में कृतज्ञ हूं ।’

६. कागद के (कागज के) टुकडे, पेंसिल छीलने पर निकले छिलके, रबर से मिटाने पर निकले छोटे-छोटे कण अथवा अन्य कूडा कक्षा में इधर-उधर न फेंकें अपितु उसे कूडेदान में ही डालें । कक्षा एवं पाठशाला का परिसर सदैव स्वच्छ रखें ।

७. मित्र एवं सहेलियों से प्रेमपूर्वक एवं अपने-पनसे व्यवहार करें । उनकी सदैव सहायता करें ।

८. विद्यालय के सभी अध्यापक, कर्मचारी तथा चपरासी से आदरपूर्वक बात करें ।

विद्यालय में ऐसा आचरण न हो !

१. कक्षा में अनुपस्थित मित्र की उपस्थिति न लगाएं ।

२. जब कक्षा चल रही हो, उस समय चॉकलेट अथवा अन्य पदार्थ न खाएं ।

३. दो सत्र के मध्य के अवकाश में कक्षा में ऊधम न मचाएं ।

४. अपने सहपाठियों को चिढाना, मारना, उनके कपडों पर लेखनी से (पेन से) रेखाएं खींचना जैसे अनुचित कार्य न करें ।

५. अध्यापक से किसी की झूठी शिकायत न करें ।

६. अपनी बही एवं पुस्तकोंपर स्याही के धब्बे न लगाएं । इसी प्रकार, बही एवं पुस्तकों में छपे चित्रों पर दाढी-मूंछ बनाकर, उन्हें कुरूप न करें ।

७. कक्षा की बेंच तथा दीवारों पर नाम लिखना अथवा रेखाएं खींचना आदि कृत्य न करें ।

८. शारीरिक प्रशिक्षण से (पी.टी. से) बचने के लिए अस्वस्थता का झूठा बहाना न बनाएं ।

बालमित्रो, ‘विद्यालय’ विद्याकी देवी माता सरस्वती का देवालय है, यह भाव रखकर इस विद्यामंदिर की पवित्रता बनाए रखें ! इससे सरस्वतीदेवी प्रसन्न होंगी और आपको अच्छी विद्या प्राप्त होगी ।

विद्यालय ले जाने के लिए भोजन के डिब्बे में घर में बने खाद्य पदार्थ ही रखें !

बालमित्रो, दुकान में मिलनेवाले केक, बिस्कुट, वेफर्स, चिप्स इत्यादि खाद्यपदार्थ उत्पादन के पश्चात् अनेक दिनों तक पडे रहते हैं तथा उनमें मिलावट होने की भी आशंका होती है । इसलिए ऐसे पदार्थां से अल्प मात्रा में ही पोषक तत्त्व प्राप्त होते हैं । इनके सेवन से स्वास्थ्य बिगडता है । इस कारण ऐसे पदार्थ विद्यालय में न ले जाएं । घरमें बनी रोटी-तरकारी, सूजीका हलवा, चिउडा आदि पदार्थ ताजे तथा शुद्ध पदार्थां से अधिक पोषक-तत्त्व प्राप्त होते हैं । इसके अतिरिक्त मां के हाथ से बने इन खाद्य पदार्थां में मां का अनमोल प्रेम भी होता है । इसलिए विद्यालय जाते समय घर में बने पदार्थ ही लेकर जाएं ।

संदर्भ : सनातन-निर्मित मराठी ग्रंथ ‘संस्कार हीच साधना’