बच्चो, अच्छी संगत में रहने का महत्त्व ज्ञात करे !

कर्ण दानवीर और महापराक्रमी योद्धा के रूप में सर्वज्ञात है; पर इतिहास ने उसका कभी गौरव नहीं किया । इसका कारण है उसकी दुर्योधन से कुसंगत ! व्यसनी, नटखट, पढाई न करनेवाले, उलटा उत्तर देनेवाले दुर्गुणी लोगों के संग रहने से हम भी उनके जैसा बनते हैं । इसके विपरीत, सज्जनों के संग रहने से हम सद्गुणी और सुसंस्कारित बनते हैं । इसलिए नम्र, अभ्यासी, आज्ञापालक और सत्यशील विचारों की मित्रमंडली के संग रहें ! संस्कारहीन कहानी की पुस्तके, दूरदर्शन आदि के सान्निध्य में भी हम रहते हैं । इनसे हमें बचना है तथा सद्गुणी और सुसंस्कारित होने में सहायता करनेवाली पुस्तकें ही पढनी है अथवा दूरदर्शन-कार्यक्रम देखना है !

संदर्भ : सनातन निर्मित ग्रंथ ‘ सुसंस्कार एवं उत्तम व्यवहार’