श्री वासुदेवानंद सरस्वती (१८५४ – १९१४ ) : इनको श्री टेंबेस्वामीजीके नामसे भी जाना जाता है । इनका वास्तविक नाम वासुदेव था; पिताजीका नाम गणेशभट्ट,माताजीका नाम रमाबाई और दादाजीका नाम हरीभट्ट था । लूनर (चंद्र) दिनदर्शिकाके अनुसार इनका जन्म सूर्योदयके उपरांत श्रावण वद्य ५, शालीवाहन शक १७७६, २६ घटिकाको हुआ ।१८७५ को गोवाके पास सावंतवाडीके बाबूजीपंत गोडेकी २१ वर्षीय कन्या अन्नपूर्णाबाईसे इनका विवाह हुआ । बचपनसे ही वे संस्कृत भाषाके प्रकांड पंडित एवं अति उच्च कोटिके विद्वान थे । प्रतिवर्ष उनकी कीर्ति बढती ही गई । नरसोबावाडी दत्तात्रय देवालयके लिए प्रसिद्ध है । इस क्षेत्रमें आनेके उपरांत वे वासुदेवानंद सरस्वतीजीके नामसे पहचाने जाने लगे । जहां ५०० वर्ष पूर्व श्री नरसिंह सरस्वतीने १२ वर्ष तक निवास किया था । श्री वासुदेवानंद सरस्वतीजीने ‘दत्त महात्म’ नामक ग्रंथ भी लिखा । १८९१ में पत्नीकी मृत्युके उपरांत केवल १३ दिनमें वे संन्यासी बन गए । उन्होंने गुरु श्रीमंत गोंविदस्वामीजीसे संन्यासकी दीक्षा दी ।
( ज्येष्ठ अमावस्या ) अर्थात १९१४ में वे परमात्मासे एकरूप हो गए । उन्हें नर्मदाके तटपर अंतिम विदाई दी गई ।
तुकारामबीज : संत तुकाराम महाराजजी का सदेह वैकुंठगमन !
प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी की कालीमाता भक्ति !
सभी में ब्रह्म देखनेवाले संत एकनाथ महाराज !
संत ज्ञानेश्वरजी का योग सामर्थ्य !
अक्कलकोट के श्री स्वामी समर्थ !
विठ्ठलभक्त नरहरि सुनार !