पढाई में मन न लगना, यह सभी बच्चों की नित्य की समस्या है ! पिताजी दूरदर्शन पर समाचार देखते हैं और भैया उंचे स्वर में गाना सुनते है; तब कैसे होगी पढाई ?
बच्चो, पढाई में मन एकाग्र करने के लिए प्रथम आगे दिए अनुसार अनुकूल परिस्थिति निर्माण करें
१.जहां दूरदर्शन, शोरगुल आदि की अडचनें न हों, ऐसा शांत कमरा अभ्यास के लिए चुनें ।
२.पढाई का कमरा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें । पढाई के लिए बैठने से पूर्व हाथ-पैर धो लिया करें ।
३. पढाई के कमरे में का देवता चित्र रखकर उसे प्रतिदिन पुष्प अर्पित करें और देवता के समक्ष उदबत्ती जलाएं ।
४. अभ्यास के पूर्व तथा बीच-बीच में श्री गणेशजी से प्रार्थना करें – ‘हे विघ्नहत्र्ता और बुद्धिदाता श्री गणेश, मेरे अभ्यास में आनेवाली अडचनें दूर कीजिए । मुझे सुबुद्धि और शक्ति दीजिए ।’
५. पढाई, भोजन, खेल आदि की समय-सारणी बनाकर समय का यथा तथ्य पालन करें ।
शिक्षा से निम्न बातें साध्य होने पर ही उसे खरी शिक्षा कह सकते हैं !
अभ्यास के माध्यम से गुणसंवर्धन
अध्ययन के लिए बैठने के स्थलपर देवताओं के चित्र रखें !
विद्यार्थियों अभ्यास हेतु समय सारणी तैयार करें !
रात्रि में अधिक समय जागकर अभ्यास करने की अपेक्षा प्रात: शीघ्र उठकर अभ्यास करें !
श्री संकष्टनाशन गणपतिस्तोत्र का पारायण करें !