बच्चों पर अल्पायु में ही संस्कार कैसे करें ?

संस्कार की नींव अर्थात अनुशासन । प्रत्येक कृति के लिए यदि अनुशासन, नियम नहीं बनाए, तो वह कृति अपूर्ण होती है । प्रात: उठने से लेकर रात्री सोनेतक अनुशासन का अचूकता से पालन करें, तो अध्यात्म में शीघ्र प्रगति होती है । उसके लिए बाल्यावस्था में ही अनुशासन का संस्कार बालमनपर अंकित करना चाहिए । Read more »

बच्चों के व्यक्तित्व का विकास कैसे करें ?

‘अभिभावकों, हम केवल एक बच्चे के अभिभावक न होकर राष्ट्र के अभिभावक हैं । आज हम देखते हैं कि समाज एवं राष्ट्र की स्थिति अच्छी नहीं है । इसका कारण यह है कि हम अभिभावक के रूप में राष्ट्र को सुसंस्कारित पीढी नहीं दे सके । Read more »

आज प्रत्येक को जीजामाता का आदर्श लेना आवश्यक है !

‘छत्रपति शिवाजी ने हिंदवी राज्य की, अर्थात आदर्श हिंदू राष्ट्र की स्थापना की । हिंदू राष्ट्र निर्माण हो, इसकी जन्मघुट्टी जीजामाता ने उन्हें बाल्यवस्था में ही पिलाई थी । Read more »

माता-पिता एवं घर के बडे व्यक्तियों को झुककर नमस्कार करें !

भारतीय परंपरानुसार संध्या के समय दिया-बाती के उपरांत घर से बाहर निकलते समय, यात्रा से घर लौटनेपर, नए कपडे परिधान करनेपर, ऐसे विविध प्रसंगों में घर के बडों के पैर छूने की रीति है । Read more »

आदर्श अभिभावक

जो अपने बच्चे को उसमें स्थित दोष दूर कर उसमें सदगुण लाने हेतु सहायता करता है, वास्तवमें वही अभिभावक । वर्तमान में अभिभावक की परिभाषा क्या होती है ? Read more »

अभिभावक अपने बच्चों के साथ किस प्रकार के व्यवहार करें ?

१. बच्चे पर अपना अधिकार नहीं जमाएं; अपितु उनके साथ मित्रता का व्यवहार करें ।
२. प्रत्येक कृत्य करने के लिए प्रेम से कहें । Read more »

अभिभाव को, बच्चों को सफलता प्राप्त करने में सहायता करें !

अपने बच्चे को उत्तम गुण प्राप्त हों, वे जीवन में सफलता प्राप्त करें, प्रत्येक अभिभावक की ऐसी इच्छा रहती है । अर्थात उसमें उसकी कोई भी भूल नहीं; परंतु सफलता प्राप्त करने के संदर्भ में अभिभावकों को सभी संकल्पनाएं सुस्पष्ट होनी चाहिए ! Read more »

माता-पिता से कैसा व्यवहार करें ?

माता-पिता एवं घर के सभी बडे व्यक्तियों को झुककर अर्थात उनके चरण छूकर प्रणाम करना चाहिए ।‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।’ अर्थात् ‘माता-पिता ईश्वर के समान हैं ।’ यह हमारी महान हिंदू संस्कृति की शिक्षा है । Read more »

बच्चों को अच्छी आदतें लगने हेतु उनपर करने योग्य घरेलू मानसोपचार

‘विश्व ही एक रंगभूमि है’, एक मानसशास्त्री कहता है, ‘‘घर ही प्राथमिक रंगभूमि है । वहां कौन से पात्र को कैसे निभाना है, यह बच्चे सीखते हैं ।’’ Read more »