बच्चो, अच्छी संगत में रहने का महत्त्व ज्ञात करे !

कर्ण दानवीर और महापराक्रमी योद्धा के रूप में सर्वज्ञात है; पर इतिहास ने उसका कभी गौरव नहीं किया । इसका कारण है उसकी दुर्योधन से कुसंगत ! Read more »

प्रार्थना : ईश्वर को प्रसन्न करने का सरल मार्ग !

ईश्वर के चरणों में शरणागत होकर इच्छित वस्तु उत्कंठा से एवं याचना के स्वरूप में मांगने को `प्रार्थना’ कहते हैं । प्रार्थना करने से ईश्वर का आशीर्वाद, शक्ति एवं चैतन्य का लाभ होता है Read more »

बच्चों पर संस्कार कब से करें ?

गर्भपर उचित संस्कार कैसे करें ? : मां-पिता एवं परिवार के व्यक्तियों के सात्त्विक विचारों का भी गर्भ के मनपर प्रभाव पडता है । इस सात्त्विक वातावरण का शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकासपर अच्छा परिणाम होता है । Read more »

संस्कार का अर्थ क्या है ?

प्रत्येक कार्य अच्छे संस्कार से युक्त होना चाहिए, उदा. हम केले खाकर छिलके डाल देते हैं, यह कृत्य है । केले खाकर छिलके कूडेदान में डालना, यह प्रकृति है । छिलके मार्गपर फेकना यह विकृति है । किसी अन्य के द्वारा मार्गपर फेका हुआ छिलका कूडेदान में डालना, यह है ‘संस्कृति’ । Read more »

सोलह संस्कार करने के उद्देश्य

भारतीय परंपरा के अनुसार मनुष्य का प्रत्येक कृत्य संस्कारयुक्त होना चाहिए । सनातन धर्म ने प्रत्येक जीव को सुसंस्कृत बनाने हेतु गर्भधारणा से विवाह तक प्रमुख सोलह संस्कार बताए हैं । इन संस्कारों का उद्देश्य इस प्रकार है – Read more »