अभिभाव को, बच्चों को सफलता प्राप्त करने में सहायता करें !

 अपने बच्चे को उत्तम गुण प्राप्त  हों, वे जीवन में सफलता प्राप्त करें, प्रत्येक अभिभावक की ऐसी इच्छा रहती है । अर्थात उसमें उसकी कोई भी भूल नहीं; परंतु सफलता प्राप्त करने के संदर्भमें  अभिभावकों को सभी संकल्पनाएं सुस्पष्ट होनी चाहिए ! अतः अभिभावकों का अपने जीवन की ओर देखने का दृष्टिकोण भी सुस्पष्ट होना चाहिए । इस विषय में निश्चिति करनी है, तो निम्नलिखित प्रश्न स्वयं को ही पूछिए !

१. केवल धन एवं यश ही मेरे जीवन का उद्देश्य है जिसे प्राप्त कर मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं ? तथा अपना बच्चा भी उसी मार्गपर चलना चाहिए जिससे कि, मेरे द्वारा आकलन किए जीवन की व्यापकता का ज्ञान एवं अनुभव का लाभ उसे अभी ही प्राप्त  हो जाए ?
२. मुझे अपने बच्चे को कुछ विशेष बनाना है, ऐसी केवल मेरी इच्छा है या उसकी इच्छा भी वैसी ही है ? कि उसे कुछ अन्य ही करना है ? क्या उसके लिए मैंने उसे संधी प्राप्त कर दी  है ? अथवा इन दोनों बातों का मेल कर दिया है ?

अपने बच्चे की पढाई के समय का नियोजन करते समय निम्नलिखित बातें ध्यान में रखें !

 सभी विद्यार्थियों की समय सारणी एक समान नहीं हो सकती । आपके बच्चे की समय सारणी निम्नलिखित बातों पर निर्भर होगी –
१. बच्चे का व्यक्तित्त्व उदा. नटखट, अभ्यासी, अध्ययनशील, बुद्धू आदि ।
२. उपलब्ध सुविधा
३. अभ्यास के लिए न्यूनतम आवश्यक समय (इसमें कक्षा के अनुसार परिवर्तन होगा ।)
४. पूरे वर्ष विभिन्न कालखंड उदा. परीक्षा के समय एवं अन्य समय
५. बच्चे का कक्ष

समय सारणी बनाते समय ध्यान में रखने के कुछ अन्य सूत्र

१. गृहपाठ के लिए कितना समय लगता है ?
२. पाठ का आकलन करने में कितना समय लगता है ?
३. कुछ सूत्र अथवा उत्तर ध्यान में रखने के लिए कितना समय लगता है ?
४. रटने के / पाठ स्मरण के लिए कितना समय लगता है ?

 सारांश में समय सारणी का उद्देश्य ‘ कुछ  विशेष घंटे अभ्यास’ ऐसा न कर बच्चे की प्रकृति एवं क्षमतानुसार, उसके अभ्यास हेतु आवश्यक समय, अभ्यास का प्राधान्यक्रम, अभ्यास अच्छी प्रकार कब हो सकता है, बच्चा तरोताजा होकर पुन: कितनी देर में अध्ययन हेतु स्वयं को सिद्ध कर पाएगा इत्यादि बातें ध्यान में रखकर यह समय सारणी बनानी चाहिए । अभ्यास अच्छा एवं लाभदायक हो, इसलिए बच्चे को खुली हवा में, मैदान में अथवा अन्य बच्चों के साथ खेलने के लिए कुछ समय देना चाहिए ।

अभिभावक के नाते बच्चों के अभ्यास की ओर किस प्रकार ध्यान देना चाहिए ?

बच्चे किस आयु सीमा में हैं, उनकी क्षमता क्या है, यह ध्यान में लेना चाहिए ।  सच्चे अर्थों में उन्हें किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, यह ध्यान में रखकर उस प्रकार की सहायता उपलब्ध करवानी चाहिए । उदा. कुछ बच्चों को केवल अभ्यास का स्मरण कर देने की आवश्यकता होगी, किसी को केवल प्रोत्साहन देने की, तो किसी को प्रत्यक्ष अभ्यास में मदद करने की आवश्यकता होगी । किसी को विभिन्न समयपर इसमें से विभिन्न बातों की आवश्यकता रहेगी । इसमें अभिभावकों को अपनी पात्रता, क्षमता, समय एवं अन्य प्राधान्यक्रम ध्यान में रखकर ये बातें करनी चाहिए ।

 – मानसोपचारतज्ञ  एवं पालक आधुनिक वैद्या सौ. नंदिनी सामंत