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हमारे बच्चे, जो भारत का भविष्य हैं, उन्हें उसी संस्था द्वारा झूठ सिखाया जा रहा है, जिस पर हमने उनका भविष्य सौंपा है – विद्यालय ! वर्षों से हमें यह सिखाया गया है कि भारत एक ऐसा देश था जिसे हराया गया, दबाया गया तथा जो दुर्बल था । हमें बताया गया कि हम तब तक पिछड़े थे जब तक बाहरी शक्तियां आकर हमें ‘सभ्य’ नहीं बना गईं । यह भी कहा गया कि हिन्दू समाज जातिवादी एवं कट्टर है । भारत की पाठ्यपुस्तकें हमारी महान सभ्यता को नीचा दिखाने में सबसे आगे रही हैं । ये झूठ, जो कक्षा ५वीं से १२वीं तक प्रत्येक वर्ष दोहराए जाते हैं, उसके कारण कई पीढ़ियां अपने ही देश एवं धर्म के प्रति लज्जा तथा घृणा लेकर बड़ी हुई हैं ।

यदि हम अपने राष्ट्र को पुनः ‘विश्वगुरु’ के पद पर देखना चाहते हैं, तो हमें आनेवाली पीढ़ियों को उन महापुरुषों के बारे में सच्चा इतिहास सिखाना होगा जिन्होंने देव, देश तथा धर्म की रक्षा की ! अब समय आ गया है कि हम इतिहास में फैलाई गई अनुचित बातें ठीक करें, सच को सामने लाएं तथा उन वीरों का सम्मान करें जिन्होंने हमारे महान राष्ट्र का निर्माण किया । हिन्दू जनजागृति समिति प्रारंभ से ही इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में सुधार की मांग कर रही है । इस प्रयास का अंग बनते हुए, हम आपसे आग्रह करते हैं कि, आप भी हमारे साथ जुडें, ताकि हमारी आनेवाली पीढी गर्वित भारतीय तथा एक हिन्दू के रूप में आगे बढे ।

क्या आप जानते हैं,
हमारे बच्चों को क्या झूठ सिखाया जा रहा है ?

मुग़लों का महिमामंडन और छिपाए गए अत्याचार

इतिहास की पुस्तकों में मुगल आक्रांताओं को अच्छा शासक दिखाया गया है । किंतु इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा किए गए बलपूर्वक धर्मांतरण, मंदिरों का विध्वंस तथा धर्म के आधार पर किए गए अत्याचारों को या तो अनदेखा किया गया अथवा बहुत ही कम शब्दों में बताया गया ।

तैमूर को ‘महान’ बताना

इतिहास की पुस्तकों में तैमूर जैसे क्रूर आक्रमणकारी को ‘महान’ बताया गया है, जबकि उसने भारत में भारी विनाश किया था । उसे एक निर्दयी आक्रमणकारी की अपेक्षा ‘मुगलों की महान वंश परंपरा का अंग’ बताकार महिमामंडित किया गया ।

जजिया कर को तोड-मरोड कर बताना

पुस्तकों में जजिया कर को गैर-मुसलमानों से लिया जानेवाला एक साधारण टैक्स बताया गया, जिन्हें ‘जिम्मी’ अर्थात संरक्षित लोग कहा गया । इससे ऐसा लगता है कि, उन्हें बराबरी का स्थान मिला था । वास्तव में यह टैक्स एक प्रकार का अत्याचार था, जिससे गैर-मुसलमानों को दोयम स्तर का नागरिक बना दिया गया था तथा उन पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे ।

मुगल सत्ता संघर्ष छिपाना

पाठ्यपुस्तकों में मुगलों की सत्ता का स्थानांतरण शांतिपूर्ण उत्तराधिकार के समान दिखाया गया है, जबकि वास्तव में प्रत्येक मुगल बादशाह ने अपने भाइयों को मारकर अथवा जेल में डालकर सत्ता प्राप्त की थी । यह सच्चाई पाठ्यपुस्तकों में नहीं बताई जाती ।

छत्रपती शिवाजी महाराज की भूमिका कम करके बताना

छत्रपती शिवाजी महाराज द्वारा मुगलों के विरुद्ध किए गए संघर्ष को केवल एक स्थानीय राजा का सत्ता पाने का प्रयास बताया गया है, जबकि वास्तव में वह धर्म पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध एक साहसिक युद्ध था ।

राजपूत–मुगल गठबंधन को तोड-मरोड कर बताना

पुस्तकों में यह कहा गया है कि राजपूतों ने ऊंचे पदों के लिए “स्वेच्छा” से अपनी बेटियों का मुगलों से विवाह करवाया । इससे ये विवाह प्रेम अथवा आपसी समझ से हुए, ऐसा प्रतीत होता है । जबकि वास्तव में ये विवश कर तथा दबाव में करवाए गए थे, जिनके पीछे धर्म से जुडे कारण भी थे ।

गुरु गोबिंद सिंहजी का ऐतिहासिक पत्र छिपाना

गुरु गोबिंद सिंहजी ने औरंगजेब को एक साहसिक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अन्याय के विरुद्ध हथियार उठाने का कारण बताया था । यह पत्र भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है, किंतु उसे पुस्तकों से हटा दिया गया ।

स्वतंत्रता सेनानियों की अनदेखी

सुभाषचंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद तथा कई अन्य क्रांतिकारियों को इतिहास की पुस्तकों में बहुत कम जगह दी गई है, जबकि क्रिकेट जैसे कम महत्त्व के विषयों को अधिक बताया गया है ।

गुरु तेग बहादुरजी की अपकीर्ति करना

1999 तक एक एनसीईआरटी के पुस्तक में गुरु तेग बहादुरजी को ‘लुटेरा’ कहा गया था । 2001 में विरोध के पश्चात इसे हटाया गया, किंतु ऐसा झूठ फैलानेवालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई ।

हिन्दू शास्त्रों की अनुचित व्याख्या

पुस्तकों में मनुस्मृति तथा वेदों को दबाव बनानेवाले शास्त्र के समान दिखाया गया, जबकि ऋग्वेद में महिलाओं के अधिकारों की बात की गई है – जिसे पूर्णरूप से अनदेखा किया गया ।

सामाजिक प्रथाओं को पक्षपात से दिखाना

पुरानी तथा अब न के बराबर रही सती जैसी प्रथाओं को बार-बार नकारात्मक रूप से बताया गया, किंतु मुस्लिम समाज की तीन तलाक, हलाला जैसी दबाव वाली प्रथाओं का कहीं उल्लेख नहीं है ।

गुलामी के सच को छिपाना

एनसीईआरटी की पुस्तकों में मेगास्थनीज के अनुसार प्राचीन हिन्दू समाज में गुलामी जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी, यह नहीं बताया गया । साथ ही ये भी छिपाया गया कि मुस्लिम शासकों ने हिन्दू महिलाओं को गुलाम बनाकर बेचा था ।

क्या आप जानते हैं,
हमारे बच्चों को क्या झूठ सिखाया जा रहा है ?

मुग़लों का महिमामंडन और छिपाए गए अत्याचार

इतिहास की पुस्तकों में मुगल आक्रांताओं को अच्छा शासक दिखाया गया है। किंतु इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा किए गए जबरन धर्मांतरण, मंदिरों का विध्वंस और धर्म के आधार पर किए गए अत्याचारों को या तो नजरअंदाज किया गया है या बहुत ही कम शब्दों में बताया गया है।

तैमूर को ‘महान’ बताना

इतिहास की पुस्तकों में तैमूर जैसे क्रूर आक्रमणकारी को ‘महान’ बताया गया है, जबकि उसने भारत में भारी तबाही मचाई थी। उसे एक निर्दयी आक्रमणकारी की अपेक्षा ‘मुगलों की महान वंश परंपरा का हिस्सा’ बतकार महिमामंडित किया गया है।

जज़िया कर को तोड-मरोड कर बताना

पुस्तकों में जजिया कर को ऐसे बताया गया है जैसे यह केवल एक साधारण टैक्स था जो गैर-मुसलमानों से लिया जाता था, जिन्हें ‘जिम्मी’ यानी संरक्षित लोग कहा गया। इससे ऐसा लगता है कि, उन्हें बराबरी का दर्जा मिला था। किंतु सच यह है कि यह टैक्स एक तरह का अत्याचार था, जिससे गैर-मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया था और उन पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे।

मुगल सत्ता संघर्ष छिपाना

पाठ्यपुस्तकों में मुगलों की सत्ता का स्थानांतरण शांतिपूर्ण उत्तराधिकार की तरह दिखाया गया है, जबकि वास्तव में हर मुगल बादशाह ने अपने भाइयों को मारकर या जेल में डालकर सत्ता प्राप्त की थी। यह सच्चाई पाठ्यपुस्तकों में नहीं दिखाई जाती।

छत्रपती शिवाजी महाराज की भूमिका कम करके बताना

छत्रपती शिवाजी महाराज द्वारा मुगलों के खिलाफ किए गए संघर्ष को केवल एक स्थानीय राजा का सत्ता पाने का प्रयास बताया गया है, जबकि वास्तव में वह धर्म पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक साहसिक युद्ध था।

राजपूत–मुगल गठबंधन को तोड-मरोड कर बताना

पुस्तकों में यह कहा गया है कि राजपूतों ने ऊंचे पदों के लिए “स्वेच्छा” से अपनी बेटियों का मुगलों से विवाह करवाया। इससे ये विवाह प्रेम या आपसी समझ से हुआ, ऐसा प्रतीत किया गया। जबकि वास्तव में ये मजबूरी और दबाव में करवाया गया था, जिनके पीछे धर्म से जुडे कारण भी थे।

गुरु गोबिंद सिंहजी का ऐतिहासिक पत्र छिपाना

गुरु गोबिंद सिंहजी ने औरंगजेब को एक साहसिक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अन्याय के खिलाफ हथियार उठाने का कारण बताया था। यह पत्र भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है, किंतु
उसे पुस्तकों से हटा दिया गया।

स्वतंत्रता सेनानियों की अनदेखी

सुभाषचंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद और कई अन्य क्रांतिकारियों को इतिहास की किताबों में बहुत कम जगह दी गई है, जबकि क्रिकेट जैसे कम महत्त्व के विषयों को अधिक बताया गया है।

गुरु तेग बहादुरजी को बदनाम करना

1999 तक एक एनसीईआरटी के पुस्तक में गुरु तेग बहादुरजी को ‘लुटेरा’ कहा गया था। 2001 में विरोध के बाद इसे हटाया गया, किंतु ऐसा झूठ फैलानेवालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हिंदू शास्त्रों की गलत व्याख्या

पुस्तकों में मनुस्मृति और वेदों को दबाव बनानेवाले शास्त्र की तरह दिखाया गया, जबकि ऋग्वेद में महिलाओं के अधिकारों की बात की गई है – जो पूरी तरह नजरअंदाज की गई है।

सामाजिक प्रथाओं को पक्षपात से दिखाना

पुरानी और अब ना के बराबर रही सती जैसी प्रथाओं को बार-बार नकारात्मक रूप से बताया गया, किंतु मुस्लिम समाज की तीन तलाक, हलाला जैसी दबाव वाली प्रथाओं का कहीं उल्लेख नहीं है।

गुलामी के सच को छिपाना

एनसीईआरटी की किताबों में मेगास्थनीज के अनुसार प्राचीन हिंदू समाज में गुलामी जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी, यह नहीं बताया गया। साथ ही ये भी छिपाया गया कि मुस्लिम शासकों ने हिंदू महिलाओं को गुलाम बनाकर बेचा था।

विकृत इतिहास युवाओं का मन खराब करता है…

1

अपनी संस्कृति से लगाव खत्म हो जाता है

2

देशभक्त और आक्रमणकारियों में फर्क समझ नहीं आता

3

भारतीय होने पर हीनभावना निर्माण होती है

4

देशभक्ति और जिम्मेदारी की भावना कमजोर हो जाती है

5

भारत के पारंपरिक ज्ञान और समझ को नकारा जाने लगता है

हिन्दू जनजागृति समिति के साथ मिलकर

देशभक्ति की भावना को मजबूत करें!

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम वीरों की प्रेरणादायक कहानियां लोगों तक पहुंचाने के लिए हमे आपके क्षेत्र में पोस्टर प्रदर्शनी लगाने के लिए सहायता करें !

हिन्दू जनजागृति समिति के प्रयास

एनसीईआरटी की किताबों में झूठ के खिलाफ अभियान

इतिहास की किताबों, विशेषत: NCERT में फैलाए गए झूठ के खिलाफ 2008 से ही समिति जागरूकता अभियान चला रही है।

फिल्मों द्वारा झूठे इतिहास का विरोध

बाजीराव मस्तानी, जोधा अकबर, पद्मावती जैसी फिल्मों में दिखाए गए गलत इतिहास का विरोध किया।

जागरूकता अभियान और प्रदर्शनी

पोस्टर प्रदर्शनी और व्याख्यानों के माध्यम से जनता को सच्चा इतिहास और गुमनाम वीरों के बारे में जानकारी दी।

सरकार को ज्ञापन

शिक्षा मंत्रालय और अधिकारियों को किताबों में सुधार के लिए भारतभर में ज्ञापन सौंपे।

कानूनी और सामाजिक कार्यवाही

झूठ उजागर करने के लिए शिकायतें दर्ज कीं और सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी जुटाई।

ऑनलाइन माध्यम से जनजागरण

सच सामने लाने के लिए सोशल मीडिया और वेबसाइट्स पर जानकारी साझा की।

आप क्या कर सकते हैं?

पोस्टर प्रदर्शनी

स्वतंत्रता सेनानी, योद्धा और महान राजाओं के सच्चे इतिहास को दिखाने वाली प्रदर्शनी लगाएं।

ऐतिहासिक नाटकों का आयोजन

सच्ची घटनाओं और भूले-बिसरे वीरों पर आधारित नाटकों के माध्यम से इतिहास को जीवंत बनाएं।

ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करें

किले, युद्धभूमियां और ऐतिहासिक स्थानों पर जाकर सच्चे भारतीय इतिहास को समझें और लोगों को जागरूक करें।

सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं

हमें टैग करें और ऐसे वीरों व घटनाओं की सच्ची जानकारी साझा करें जिन्हें इतिहास में नजरअंदाज किया गया है।

किलों का संरक्षण करें

भारतीय राजा-रानियों द्वारा बनाए गए किलों की देखभाल और रक्षा में भाग लें, ये स्वराज्य और संघर्ष के प्रतीक हैं।

वीरगाथाएं और देशभक्ति गीत प्रस्तुत करें

वीरों की कहानियां और देशभक्ति से भरे गीतों के माध्यम से साहस की भावना को जीवित रखें।

हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में सम्मिलित हों !

हिन्दू जनजागृति समिति हमारी संस्कृति, परंपरा, राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
आप भी इस पवित्र कार्य में अपना योगदान दें और इस ईश्वरीय कार्य का हिस्सा बनें।

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