अभिभाव को, हमारे युवकों की नैतिकता घट रही है !

पूर्वकाल में सायंकाल दीप लगाने के समय घर आने की परम्परा थी । आज स्थिति यह है कि अभिभाव रात्रि में विलम्ब से आनेवाले अपने लडके की प्रशंसा करते नहीं थकते । Read more »

मातृदिन के उपलक्ष्य में…

हमारी भारतीय संस्कृति में, ‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । आचार्यदेवो भव ।’, अर्थात माता, पिता एवं गुरु को देवता समान माना गया है । इसमें भी मां को प्रथम स्थानपर रखा गया है । आर्इए प्रस्तुत लेख से मां की महत्ता देखेंगे । Read more »

अभिभावकों, बच्चों के अर्थहीन नाम रखने से होनेवाले परिणाम जान लें !

अध्यात्मशास्त्र के अनुसार बच्चों के नाम रखने से क्या लाभ होते है, यह हम प्रस्तुत लेख से देखेंगे । Read more »

सुसंस्कारों का महत्त्व !

’सुसंस्कारित मन जीव को कहीं भी भटकने नहीं देता । इसीलिए बच्चों का मन सुसंस्कारित करना, यह बडों का, हिंदु धर्माचरण करनेवालों का, समाज का कर्तव्य है । Read more »

बच्चों को समयपर संस्कारित करना आवश्यक !

रेलगाडी से यात्रा करते समय एक प्रसंग देखा । उससे ‘आजकल के बच्चों को समयपर ही संस्कारित करने का कितना महत्त्व है’ यह ध्यान मे आया । यह प्रसंग प्रस्तुत लेख मे दिया है । Read more »

बच्चो, भगवानजी का पूजन-अर्चन उपासना आदि करें !

यदि भगवानजी का पूजन हो गया हो, तो स्नान के (नहाने के) उपरांत सर्वप्रथम भगवानजी के सामने खडे होकर हलदी-कुमकुम एवं पुष्प अर्पण करें । अगरबत्तीद्वारा भगवानजी की आरती उतारें (अगरबत्ती दिखाएं) । Read more »

बच्चों में राष्ट्र एवं धर्म के प्रति अभिमान कैसे निर्माण करें ?

वर्तमान में हम यदि बच्चों का अवलोकन करें तो ध्यान में आता है कि बच्चों में राष्ट्र तथा धर्म के प्रति अभिमान का अत्यंत अभाव है । यदि यह स्थिति ऐसी ही रहती है तो राष्ट्र का विनाश होने में समय नहीं लगेगा । अत: हमें बच्चों में राष्ट्राभिमान निर्माण करने हेतु प्रयास करने ही होंगे । Read more »

माता-पिता को नमस्कार करने में लज्जा नहीं आनी चाहिए !

`मातृदेवोभव । पितृदेवो भव । (अर्थात माता-पिता देवता समान हैं ।)’, ऐसी हमारी महान हिंदू संस्कृति की सीख है । `माता-पिता तथा गुरू की सेवा करना, सबसे उत्तम तपस्या है’, ऐसा `मनुस्मृति’ ग्रंथमें कहा गया है । Read more »

२ से ५ वर्षतक के बच्चोंपर कौन – कौन से संस्कार करें ?

बालमनपर जिस प्रकार के संस्कार किए जाते है, उसी के अनुसार आगे के काल में बच्चों का वैसा ही स्वभाव हो जाता है । बालआयु में होनेवाले संस्कारों के कारण ही बच्चों का व्यक्तित्व निर्भर करता है । Read more »