धर्मसम्राट करपात्र स्‍वामीजी !

करपात्र स्‍वामीजी ने विश्‍वेश्‍वराश्रम के निकट वेदशास्‍त्रों का अध्‍ययन किया । उन्‍होंने हिमालय में निवास कर, तपस्‍या की । समाधी अवस्‍था उन्‍हें ईश्‍वर से धर्म की संस्‍थापना का कार्य करने का दैवी आदेश मिला । स्‍वामीजी ने राष्ट्र और धर्मजागृति के लिए दैवी कार्य किया था । Read more »

देशभक्‍त बाल क्रान्‍तिकारी दत्तू रंगारी और हेमू कलानी !

बाल क्रांतिकारियों ने कितनी कम आयु में अपने देश के लिए त्‍याग किया और अपना बलिदान दिया था । भारतमाता को किस प्रकार से अंग्रेजों से स्‍वतंत्र कराया जाए, उसके लिए मर मिटने तक की तैयारी होना और यही एकमात्र विचार होने के कारण वे आज भी देशभक्‍त कहलाते हैं । हम ऐसे ही दो बाल देशभक्‍तों की कहानी देखनेवाले हैं । Read more »

बालक्रांतिकारि सुशील सेन और काशीनाथ पागधरे !

हम दो बाल बालक्रांतिकारियों की कहानी देखेंगे जिन्‍होंने अपने देश के लिए सर्वस्‍व का त्‍याग किया था । भारतमाता को स्‍वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है । हम सुशील सेन और काशीनाथ पागधरे इन बाल क्रांतीकारियों द्वारा किए गए उनके त्‍याग को एक कहानी के माध्‍यम से सीखेंगे । Read more »

झांसी का किला

उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी में बंगरा नामक पहाड़ी पर १६१३ इस्वी में यह दुर्ग ओरछा के बुन्देल राजा बीरसिंह जुदेव ने बनवाया था । २५ वर्षों तक बुंदेलों ने यहाँ राज्य किया उसके बाद इस दुर्ग पर क्रमश मुगलों, मराठों और अंग्रजों का अधिकार रहा । Read more »

मेहरानगढ

मेहरानगढ किला भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है । पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है । Read more »

ब्रिटीशपूर्व काल में भारत ज्ञानार्जन के, अर्थात शिक्षा के शिखर पर होना

‘भारत की ब्रिटीशपूर्व काल की शिक्षा उत्कर्ष साधनेवाली थी । इस सन्दर्भ में यूरोपियन यात्रियों एवं शासनकर्ताओं के निःसन्दिग्ध साक्ष्य उपलब्ध हैं । रामस्वरूप ने उनके Education System during Pre-BritishPeriod इस प्रबन्ध में इस विषय में चर्चा की है ।’ Read more »

भारत में मैकाले के आने से पहले ब्रिटेन में अंग्रेजोंद्वारा भारतीय शिक्षाप्रणाली अपनाने का प्रयास

‘वर्गप्रमुख, स्लेट एवं गुटचर्चा इन संकल्पनाओंको आधुनिक शिक्षापद्धतिमें बहुत महत्व दिखाई देता है; परंतु, इन संकल्पनाओंका मूल स्रोत क्या है ? तो सुनिए, यह संकल्पना भारतीयोंकी हैं । १६२३ में, ‘पेट्रो डेला वाले’ इन नामका एक यात्री भारत आया था । उसने यहांकी शिक्षाव्यवस्था देखी । उसके लेखोंमें उपर्युक्त सभी बातोंका वर्णन मिलता है । … Read more

रामराज्य में शिक्षा कैसी थी ?

श्रीराम ने स्वतंत्र शिक्षा देकर घरघर में श्रीराम निर्मित किए थे ! रामराज्य में आर्थिक योजनाओें के साथ ही उच्च कोटिका राष्ट्रीय चरित्र भी निर्मित किया जाता था । उस समय के लोग निर्लाेभी, सत्यवादी, सरल, आस्तिक एवं परिश्रमी थे । आलसी नहीं थे । Read more »

रामराज्य में शिक्षा कैसे प्रदान की जाती थी ?

रामराज्यमें आर्थिक योजनाके साथ ही उच्च राष्ट्रीय चरित्रका निर्माण किया गया था । तत्कालिन लोक निर्लाेभी, सत्यवादी, अलंपट, आाqस्तक और सक्रिय थे; क्रियाशून्य नहीं थे । जब बेकारभत्ता मिलता है तब मनुष्य क्रियाशून्य बनता है । तत्कालिन लोग स्वतन्त्र थे; कारण शिक्षा स्वतन्त्र थी । Read more »