बच्चोंपर अपने मित्रों का कैसा परिणाम होता है ?

हमारे जीवन में मित्रों का अधिक महत्त्व रहता है; क्योंकि शालेय जीवन में हमें अनेक सहेलीयां तथा मित्र रहते हैं । उनकी कृतीयां अथवा उनकी आदतों का हमारे मनपर कुछ ना कुछ परिणाम होता रहता है । Read more »

बच्चो, ‘त्याग’ हमारी संस्कृति है !

संग्रह करने से मनुष्य संकीर्ण वृत्तिका हो जाता है और त्याग करने से वृत्ति उदार बनती है । इसलिए ‘त्याग में ही खरा आनंद है’, यह ध्यान में रखें! Read more »

‘आत्महत्या ’ से जीवन का अंत नहीं होता !

कुछ वर्ष पूर्व माध्यमिक एवं महाविद्यालयीन परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही असफल विद्यार्थियों की आत्महत्या के कुछ समाचार सुनने में आए थे । Read more »

विद्यार्थियों, आदर्श व्यक्तित्व हेतु स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया कार्यान्वित करें !

हमारे अंतर्मन में सभी तरह के अनुभव, भावना, विचार, इच्छा, आकांक्षा आदि सब कुछ संग्रहित रहता है । फिर भी उसकी कल्पना बाह्यमन को तनिक भी नहीं रहती; क्योंकि अंतर्मन एवं बाह्यमन दोना में एक तरह का पर्दा रहता है । Read more »