भारतीय पद्धति से जन्मदिन मनाने का महत्त्व !

भारतीय पद्धति से जन्मदिन मनाने का महत्त्व और केकपर मोमबत्तियां जलाकर बुझाने का दुष्परिणाम !

पश्चिमी सभ्यता के अनुसार जन्मदिन मनाते समय केकपर मोमबत्तियां लगाई जाती हैं, पश्चात फूंककर बुझाई जाती हैं । इस फूंक के माध्यम से लाखों रोगाणु (बैक्टेरिया) केकपर आते हैं । इसलिए, यह पद्धति उचित नहीं है । यह बात अब पाश्चात्य लोग भी समझ गए हैं । अतः, उन्होंने इस पद्धति से जन्मदिन मनानेपर प्रतिबंध लाने का निर्णय लिया है । वास्तविक, यह हुआ इस विषय का स्थूल कारण । किंतु, जिन्हें सूक्ष्म बातों का ज्ञान है, वे ही बता सकते हैं कि जलती हुई मोमबत्ती फूंककर बुझाना तथा चाकू से केक काटना अशुभ होता है ।

स्थूल कारणों से कई गुना अधिक प्रभावी सूक्ष्म कारण होते हैं । इसलिए, जन्मदिन मनाने की यह स्थूल पद्धति अनुचित है । भारतीय पद्धति के अनुसार (हिंदु संस्कृति के अनुसार) जन्मदिन इस पद्धति से मनाने के लिए कहा गया है कि उससे व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ हो । इस पद्धति में व्यक्ति का जन्मदिन उसकी जन्म तिथिपर मनाने के लिए कहा गया है । संबंधित व्यक्ति अथवा बालक का औक्षण करने के पश्चात, उसे भगवानजी के और घर के सभी बडे सदस्यों को नमस्कार करने के लिए कहा गया है ।

ऐसा करनेपर संबंधित बालक को भगवानजी के और घर के बडे लोगों से आशीर्वाद प्राप्त होते हैं और वह चैतन्य भी ग्रहण करता है । इस पद्धति में, न दिया बुझाना पडता है, न केक कांटना पडता है और न किसी प्रकार का कोलाहल होता है । इस पद्धति में, जन्मदिन को मानसिक स्तरपर न मनाकर, आध्यात्मिक स्तरपर मनाने के लिए कहा गया है । इसीलिए यह पद्धति सबके लिए लाभप्रद है ।

१. केकपर मोमबत्तियां जलाना और उसे फूंककर बुझाने से, केकपर असंख्य रोगाणु (बैक्टेरिया) आना और बालक का रोगों से ग्रस्त होने की आशंका होना !

कुछ लोग जन्मदिन मनाने के लिए केकपर जलती हुई मोमबत्तियां रखते हैं । पश्चात, उन्हें फूंककर बुझाते हैं । ऐसा करनेपर फूंक के माध्यम से लाखों रोगाणु केकपर जमा हो जाते हैं । ऐसा रोगाणुयुक्त केक नहीं खाना चाहिए; क्योंकि इससे रोग हो सकता है । इसलिए, जन्मदिन पाश्चात्य पद्धति से न मनाकर, भारतीय संस्कृति के अनुसार मनाएं ।

 २. ऑस्ट्रेलिया में इस विषयपर शोध करने के पश्चात, वहां जन्मदिनपर जलती हुई मोमबत्तियां केकपर रखने और बुझानेपर प्रतिबंध लगाया जाना

ऑस्ट्रेलियाका ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ अपने प्रयोगों के निष्कर्ष में लिखता है, ‘जन्मदिनपर जलती हुई मोमबत्तियां केकपर रखकर, फूंककर बुझाया जाता है । ऐसा करते समय मुंह की वायु के माध्यम से रोग के लाखों कीटाणु केकपर जमा हो जाते हैं । ऐसे केक को खाने से लडके विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं !’

इसीलिए, ऑस्ट्रेलियामें जन्मदिनपर जलती हुई मोमबत्तियां केकपर रखने और फूंककर बुझानेपर प्रतिबंध लगा दिया गया है ।

संदर्भ : दैनिक हिन्दुस्तान, ८ जनवरी २०१३,; मासिक ऋषिप्रसाद, मार्च २०१३

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