दूरदर्शनसंच को कैसे दूर रखें ?

दूरदर्शन देखना, यह एक प्रकार का व्यसन है । छोटे-बडे सभी लोग दूरदर्शन देखने का मोह छोड नहीं पाते हैं । अत: बच्चो हमने तुम्हारे लिए कुछ पर्याय ढूंढे हैं । जीवन में निश्चित किये उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इनका अवश्य उपयोग करें ।

वाचन अथवा अन्य कार्य करें

दूरदर्शन के कारण होनेवाली हानिका विचार कर उसका ‘दूर..से..दर्शन’ करो । बच्चो, इस ‘इडियट बॉक्स’का दास न बन मैदानी खेल खेलो, नए-नए विषयों में कुशलता प्राप्त करो, नई-नई कलाएं सीखो, व्यायाम करो । इसी प्रकार, ‘रिमोट छोडो पुस्तक पकडो !’ यह मूलमंत्र स्मरण रखो एवं इसे आचरण में भी लाओ !

– कु. इंद्राणी पुराणिक, गोवा.

दूरचित्रवाणी का सीमित उपयोग हितकारी अथवा शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए करें !

‘दूरचित्रवाणीपर मनोरंजनात्मक चलचित्र, अश्लील नृत्य का कार्यक्रम इत्यादि निरर्थक कार्यक्रम देखने की अपेक्षा ‘रामायण, महाभारत, छ. शिवाजी महाराज जैसे धारावाहिक; संत तुकाराम महाराज, संत ज्ञानेश्वर महाराज जैसे संतों के जीवनपर आधारित चलचित्र अथवा क्रांतिकारियोंपर आधारित धारावाहिक देखें । ज्ञानवृदि्ध करनेवाले एवं राष्ट्रप्रेम जागृत करनेवाले कार्यक्रम (‘डिस्कवरी’ एवं ‘नेशनल जिओग्रॉफिक’ इन चैनलोंपर) सीमित समयके लिए ही देखें ।’

चलो बच्चो, आज से दूरदर्शन के कार्यक्रमों को देखने का समय हफ्ते में आधा घंटा न्यून करो !

अवकाश के दिन दूरदर्शन के कार्यक्रम अत्यअल्प देखें ! परिक्षा पास आनेपर दूरदर्शन देखना बंद ही कर दें ।

संदर्भ : सनातन निर्मित ग्रंथ ‘ सुसंस्कार एवं उत्तम व्यवहार’