बच्चो,माता-पिता की सेवा का महत्त्व समझ लें !

तुष्टायां मातरि शिवे तुष्टे पितरि पार्वति ।
तव प्रीतिर्भवेद्देवि परब्रह्म प्रसीदति ।। २६ ।।
– महानिर्वाणतंत्र

भावार्थ : माता-पिता के संतुष्ट होनेपर परमेश्वर भी प्रसन्न होते हैं । इसलिए माता-पिता की कही हुई बात माना करें । उनके कामकाज में उनकी सहायता करें । उन्हें भगवान समान मानकर उनकी सेवा करें ।

बालको, माता-पिता को भगवान समान आदर देने की सीख देनेवाली महान हिंदु संस्कृति का पालन करें !