सहजता से परीक्षा का सामना कैसे करें ?

१. आज का विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी होना

‘किसी विषय का अध्ययन करने का अर्थ वह विषय केवल पढना नहीं अपितु वह विषय पूर्णतः समझकर उसपर आचरण करना है । विद्यार्थी एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने के लिए जो प्रयास करते हैं, उसे हम पढाई अथवा अध्ययन कहते हैं; परन्तु वह केवल परीक्षा की सिद्धता होती है; क्योंकि परीक्षा समाप्त होने के पश्चात उस विषय से सम्बन्धित प्रश्न पूछने पर बालक उसका उत्तर नहीं दे पाते । इसलिए आज का विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी बन गया है ।

२. मन से परीक्षा का भय अथवा चिंता कैसे दूर करेंगे ?

मित्रो, परीक्षा निकट आने पर हम भयभीत हो जाते हैं । इसका कारण समझ में नहीं आता तथा समझने पर भी आगे क्या करना है, यह नहीं सूझता । इस के लिए निम्नांकित सूत्रों का उपयोग होगा ।

२ अ. परीक्षा आनंददायी होने के लिए यह करें !

१. स्वयं के विषय में नकारात्मक विचार न करें । ऐसे नकारात्मक विचार अथवा मन को भ्रमित करनेवाले विचार लिख लें तथा उस विषय में माता-पिता से चर्चा करें ।

२. स्वयं की क्षमता समझें, स्वयं की तुलना अन्यों से न करें ।

३. परीक्षा में मिलनेवाले अंकों को सर्वस्व न मानें ।

४. परीक्षा के लिए जाने से पूर्व मारामारी, हत्या इत्यादि प्रसंगवाले कार्यक्रम न देखें । आनन्द के क्षणों का स्मरण करें ।

५. घर के अन्नपदार्थ ग्रहण करें ।

६.प्रत्येक विषय की गत वर्ष की प्रश्नपत्रिका हल करें, जिस से आप के मन में परीक्षा का जो भय है वह दूर होगा तथा आप का आत्मविश्वास बढेगा ।

७. परीक्षा के प्रसंग का अभ्यास करें ।

मित्रो, ऊपर दी गई बातें आप कर सकते हैं न ! फिर परीक्षा एवं तनाव को भूल जाओ ! परीक्षा का आनन्द उठाओ ! बुद्धिदेवता श्री गणेश के चरणों में प्रार्थना कर पढने में जुट जाओ !’

२ आ. परीक्षा के लिए जाने से पूर्व……..

१. परीक्षा के लिए जाने से पूर्व दस मिनट कुलदेवता / उपास्यदेवता का नामजप करें तथा उन से प्रार्थना करें ।

२. उत्तरपत्रिका लिखते समय उत्तर का स्मरण न हो, तो प्रार्थना करें ।

३. ईश्वर ही मुझ से उत्तरपत्रिका लिखवा रहे हैं, ऐसा भाव रखें ।

– श्री. राजेंद्र पावसकर (गुरुजी), पनवेल

संदर्भ : सनातन-निर्मित-ग्रंथ’ अध्ययन कैसे करें ? ‘