ज्योतिषशास्त्र

ज्योतिषशास्त्र किसी व्यक्ति के प्रारब्ध के अनुसार क्या होनेवाला है, केवल यही नहीं बताता, अपितु उसको टालने के लिए क्या करना चाहिए, इसका भी मार्गदर्शन करता है । अर्थात वह प्रारब्धपर विजय प्राप्त करने हेतु कौनसे क्रियमाण कर्म का उपयोग करना चाहिए, यह भी सिखाता है ।

शारीरिक एवं मानसिक कष्टोंपर उपयों के संदर्भ में आध्यात्मिक उपायों का महत्त्व

१. शारीरिक : उपरसे नीचे गिरने के कारण यदि किसी की हड्डी टूट गई, तो उपायों की दृष्टि से वहां पर केवल शारीरिक बातों के संदर्भ में विचार करना पर्याप्त होता है । वहां पर मानसिक विश्‍लेषण उपयोगी नहीं होता । इसका कारण यह कि उसके गिरने का कारण अध्यात्मशास्त्र ही बता सकता है । … Read more

जीवनभर प्राथमिक चरण की साधना कर भी अपेक्षित उन्नति न होने के कारण

कई लोग कहते हैं, ‘‘मैं अनेक वर्षों से प्रतिदिन १-२ घंटे ग्रंथों का पठन करता हूं अथवा मंदिर की परिक्रमा करता हूं । ऐसा करनेवाले अधिकांश लोगों की साधना में उन्नति होते नहीं दिखाई देती । इसके कारण निम्नानुसार हैं – १. उपर्युक्त कृत्य करना साधना के शिशुविहार में शिक्षा लेने जैसा है । हम … Read more

अनेक संत एवं महर्षि सनातन के साधकों की सहायता करते हैं; क्योंकि साधकों की साधना समष्टि साधना है ।

अनेक संत एवं महर्षि सनातन के साधकों की सहायता करते हैं; क्योंकि साधकों की साधना समष्टि साधना है ।

कलियुग के अधिकांश माता-पिताआें का साधना के संदर्भ में दृष्टिकोण

१. पहले लडके को साधना करने न देनेवाले माता-पिताआें के उदाहरण बहुत अल्प थे, उदा. प्रह्लाद । अब अधिकांश माता-पिता असात्त्विक वृत्ति के होने से वो अपने बच्चों की साधना का विरोध करते हैं । २. हम स्वयं भी साधना नहीं करेंगे और तुम्हें भी (बच्चों को) नहीं करने देंगे । ३. साधना, साधना क्या … Read more

समष्टि साधना के कारण व्यक्तिगत जीवन में निहित स्वेच्छा शीघ्र न्यून होती है ।

व्यक्तिगत जीवन में निहित स्वेच्छा को नष्ट करने हेतु अनेक वर्षोंतक व्यष्टि साधना करनी पडती है । इसके विपरीत समष्टि साधना के कारण व्यक्तिगत जीवन में निहित स्वेच्छा शीघ्र न्यून होती है ।

साम्यवाद की व्यर्थता !

एक बार सभी को समान पैसे देना संभव हो सकेगा; किंतु क्या शारीरिक प्रकृति, स्वभाव, बुद्धिमत्ता इत्यादी सभी को समानरूप से दे पाना संभव है ? यदि ऐसा है, तो साम्यवाद शब्द का क्या अर्थ रह जाता है ?

संत, गुरु एवं ऋषियों द्वारा सिखाई जानेवाली साधना तथा सनातन द्वारा बताई जानेवाली साधना

१. संत एवं गुरु : ये शिष्य को व्यष्टि साधना सिखाते हैं । यह सिखाना स्थल एवं समय में सीमित होता है । २. ऋषी : ऋषी शिष्य को विश्‍व के संदर्भ में समष्टि साधना सिखाते हैं । इस सीख के लिए स्थल एवं समय की सीमा नहीं होती । ३. सनातन संस्था : सनातन … Read more

हिन्दुआें को अधोगति की ओर ले जानेवाला सर्वधर्मसमभाव !

हिन्दुआें को छोडकर अन्य धर्म का एक भी व्यक्ति सर्वधर्मसमभाव को नहीं मानता । सर्वधर्मसमभाव का पुरस्कार करनेवाले हिन्दुआें की स्थिति दयनीय हो गई है और वैसा न कहनेवाले सभी की स्थिति हिन्दुआें की तुलना में बहुत अच्छी है ।