सत्ययुग में नियतकालिक, दूरचित्रवाहिनियां, संकेतस्थळ इत्यादि की आवश्यकता ही नहीं थी; क्योंकि . . .

सत्ययुग में नियतकालिक, दूरचित्रवाहिनियां, संकेतस्थळ इत्यादि की आवश्यकता ही नहीं थी; क्योंकि उस समय अनिष्ट वार्ताएं ही नहीं थी तथा सभी लोग निरंतर ईश्‍वर के अनुसंधान में होने से आनंदित थे ।