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त्र्यंबकेश्वर मंदिर में अब पैसे लेकर ही दर्शन की सुविधा !

नासिक के सुप्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर तीर्थक्षेत्र में कुंभमेले की पाश्र्वभूमि पर अब भक्तोंके लिए २०० रुपये देकर शीर्घ दर्शन की सुविधा की गई है। कहा गया…

सिंहस्थ पर्व – नासिक : बिना कुडे के मार्गोंको स्वच्छ करने हेतु प्रति मार्ग साढेआठ सहस्र रुपए दिए जा रहे हैं !

सिंहस्थपर्व के उपलक्ष्य में नासिक महानगरपालिकाद्वारा प्रतिदिन साधुग्राम के मार्ग स्वच्छ किए जा रहे हैं। लेकीन, बिना कुडेवाले मार्ग भी स्वच्छ किए जा रहे हैं।…

महामंडलेश्वरकी नियुक्ति पर प्रतिबंध ! – महंत ग्यानदास, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाडा परिषद

तथाकथित साध्वी त्रिकाल भवन्ता का पोल खुल जाने के संदर्भ में, महामंडलेश्वर पद के सर्व प्रकार के नियुक्तीयोंको अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत…

नासिक सिंहस्थपर्व : स्वच्छतागृह से मूत्रविसर्जन सीधा गोदापात्र में !

एक संतापजनक प्रकार यहां सामने आया है कि, गोदावरी नदी के तट पर स्थित स्वच्छतागृह का मूत्रविसर्जन सीधा गोदापात्र में जा रहा है।

रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रभु श्रीरामचंद्र ने त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर किया था सिंहस्थ विधी !

‘सिंहस्थ विधी’ ! रावण ने सीतामाता का अपहरण करने के पश्चात रावण पर विजय प्राप्त करने हेतु प्रभु रामचंद्र ने इसी त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ…

नासिक (महाराष्ट्र) : गोदावरी नदी के तट पर रामकुंड का फलक ही नहीं है : श्रध्दालुओं में संभ्रम !

गोदावरी नदी के तट पर रामकुंड का फलक न होने के कारण देशविदेश से आनेवाले श्रध्दालुओंके मन में संभ्रमावस्था निर्माण हुई है।

नासिक के प्राचीन श्री सुंदरनारायण मंदिर की पीछे की दीवार का लघुशंका के लिए हो रहा है उपयोग !

पवित्र गोदावरी नदी के घाट पर बसे अतिप्राचीन एवं प्रसिद्ध सुंदरनारायण मंदिर की पिछली दीवार का उपयोग लघुशंका करने हेतु किया जा रहा है; परंतु…

सिंहस्थ पर्व में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा समाजसहायता, राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति विषय पर जनजागृति !

नासिक में आरंभ सिंहस्थ पर्व में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा समाजसहायता, राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति, इन विषयोंपर व्यापक जनजागृति की गई। प्रस्तुत कर रहें…

सिंहस्थ पर्व के उपलक्ष्य में टिकट मूल्यवृद्धि करने से जगद्गुरु शंकराचार्य क्रोधित !

सिंहस्थ पर्व के उपलक्ष्य में रेल प्रशासनद्वारा टिकट मूल्य में वृद्धि करने से द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बहुत क्रोधित हुए।