‘लव जिहाद’ यह हिन्दू महिलाआें के विरोध में धर्मांधों का आतंकवाद ही है – अधिवक्ता (श्रीमती) चेतना शर्मा

हिन्दू जनजागृति समिति का ग्रंथ ‘‘लव जिहाद’’ जनजागृति हेतु बडा सहायक !

Chetana_sharma
अधिवक्ता (श्रीमती) चेतना शर्मा

विद्याधिराज सभागृह, रामनाथी (गोवा) – ‘लव जिहाद’ धर्मांध मुसलमानों द्वारा हिन्दू महिलाआें के विरोध में पुकारा गया आतंकवाद ही है । इस आतंकवाद के विरोध में हिन्दुआें को सर्व प्रकार से प्रशिक्षित होना और साधना के बल पर सक्षम होना अत्यावश्यक है । ऐसा आग्रही प्रतिपादन उत्तरप्रदेश की ‘हिन्दू स्वाभिमान’ की राष्ट्रीय अध्यक्षा अधिवक्ता (श्रीमती) चेतना शर्मा ने किया ।पंचम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन में विद्युल्लता के समान मार्गदर्शन करते हुए श्रीमती शर्मा ने ‘लव जिहाद’ के विरोध में किए गए कार्य के कुछ छायाचित्र और ध्वनिचित्रचक्रिका (सीडी) के माध्यम से प्रभावी विषय प्रस्तुत किया । उन्होंने ‘लव जिहाद’ के विरोध में धर्मांधों द्वारा उपयोग में लाए जानेवाली आधुनिक पद्धतियों के विषय में मार्गदर्शन किया । इस समय उन्होंने कहा कि ‘लव जिहाद’ के विरोध में गांव गांव जाकर जनजागृति करने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति के ग्रंथ ‘लव जिहाद’ की सहायता मिली ।

अधिवक्ता चेतना शर्मा द्वारा प्रस्तुत ‘लव जिहाद’ का भयावह वास्तव !

१. जो राज्यकर्ता यह कहते हैं कि इस देश में ‘लव जिहाद’ अस्तित्व में है कि नहीं, यह जानकारी नहीं है, उन्हें देश के इतिहास का अभ्यास करना चाहिए । राजा दाहीर के समय से ‘लव जिहाद’ चल रहा है ।

२. ‘लव जिहाद’ के पहले प्रकरण में युवती की बहन से मैंने यह वास्तव जाना है । उसने बताया कि हिन्दू विचार भी नहीं कर सकते, ऐसे प्रयास धर्मांध इस बात के लिए करते हैं ।

३. २०० से ३०० जनसंख्यावाले गांव में २ से ३ सहस्र धर्मांध एकत्रित होते हैं । उनके मदरसों में घातक शस्त्रों का संग्रह होता है । इसलिए वहां जानेवाली युवतियों का वे चाहे जैसा उपयोग कर लेते हैं ।

४. ‘लव जिहाद’ की बलि चढी युवतियों को इन मदरसों में छोडा जाता है । तत्पश्‍चात उन्हें खाडी देशों में देहविक्रय हेतु भेजा जाता है ।

५. वर्तमान में ‘पूल पार्टी’ के माध्यम से १२-१३ वर्ष की हिन्दू युवतियों और युवकों को बुलाया जाता है । उसके आयोजक, प्रसारक, नशीले पदार्थों की आपूर्ति करनेवाले और छायाचित्रकार धर्मांध होते हैं ।

६. इस भोज में अमर्यादित नशीले पदार्थों का उपयोग कर हिन्दू युवक युवतियों का छायाचित्रण किया जाता है । उसके आधार पर हिन्दुआें को ‘ब्लैकमेल’ किया जाता है ।

७. हिन्दू युवकों को मारपीट कर युवतियों पर बलात्कार करते हैं । उनकी ध्वनिचित्रचक्रिका बनाकर उन्हें बार बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए प्रवृत्त किया जाता है ।

८. ये युवक धर्मांध महिला नेता अथवा राजनीतिक पक्षों के नेताआें के पुत्र होते हैं ।

९. ऐसे अनेक युवकों को हमने पुलिस को सौंपा है तथा उनपर अभियोग चल रहे हैं ।

१०. अनेक युवतियों का हमने प्रबोधन किया है । यह भी ध्यान में आया है कि अनेक युवतियों पर वशीकरण का उपयोग भी किया गया है । ऐसे समय साधना करना महत्त्वपूर्ण सिद्ध होता है ।

११. ऐसे धर्मांधों के ये आक्रमण और संभावित आतंकवादी आक्रमणों के विरोध में हिन्दुआें को प्रशिक्षित करना चाहिए । इच्छुक हिन्दुआें को हम सहायता करेंगे !

१२. क्योंकि जब भगवान श्रीकृष्ण की शिष्टाई से भी दुर्योधन नहीं माना, तब युद्ध का विकल्प चुना गया । राष्ट्रद्रोही और धर्मद्रोहियों का भी हिन्दुआें को सर्व प्रकार से प्रतिकार करना पडेगा, यह जान लीजिए !

प्रत्येक युग में अधर्म बढने पर उस के विनाश के लिए हिन्दुओं को पुनर्जन्म की सिद्धता रखनी चाहिए – अधिवक्ता (श्रीमती) चेतना शर्मा, उत्तरप्रदेश

सनातन संस्था के पू. (कु.) अनुराधा वाडेकर के शुभहाथों शर्मा का सम्मान

विद्याधिराज सभागृह, रामनाथी (गोवा) – धर्मांध जिहादियों द्वारा हिन्दू धर्म पर आनेवाले संकटों को देखते हुए उनका सामना करने हेतु हमें बचावात्मक भूमिका का त्याग करना चाहिए । ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना सहज साध्य नहीं होगा । इस के लिए हिन्दुओं को तन, मन एवं धन समान सभी प्रकार के त्याग की सिद्धता रखनी चाहिए । आज देश का सबसे बडा संगठन धर्मांधों के लिए प्रीतिभोज की व्यवस्था करने की इच्छा रखता है । ऐसी ाqस्थति में हमें यह सीखना चाहिए कि किसी भी राजनेता पर निर्भर रह कर नहीं चलेगा । हिन्दू धर्म के विश्‍वासघातियों को जान कर उन्हें इस कार्य से दूर रखना चाहिए । प्रत्येक युग में अधर्म बढने पर उसका विनाश करने हेतु हिन्दुओं को पुनर्जन्म की सिद्धता रखनी चाहिए, मेरठ (उत्तरप्रदेश) के ‘हिन्दू स्वाभिमान’ संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्षा अधिवक्ता (श्रीमती) चेतना शर्मा ने ऐसा सनसना आवाहन किया ।

अधिवक्ता (श्रीमती) चेतना शर्मा द्वारा उत्तरप्रदेश में ‘लवजिहाद’ के विरुद्ध हिन्दू युवतियों को सक्षम बनाने हेतु भारी मात्रा में कार्य किया गया है तथा उन्होंने छोटी आयु में ही स्वसुरक्षा देने कीr सिद्धता की है । उनके इस धर्मकार्य हेतु सनातन संस्था की धर्मप्रसारसेविका पू. (कु.) अनुराधा वाडेकर ने श्रीकृष्ण की प्रतिमा एवं पुष्प देकर उनका सम्मान किया । शर्मा की तेजस्वी वाणी से सभागृह का वातावरण उत्साहवर्धक हो गया था । श्रीमती शर्मा द्वारा संस्कृत श्‍लोकों के आधार पर हिन्दुओं को धर्मकर्तव्य का महत्त्व बताया गया ।

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