प.पू. आसारामबापूजीके कथित लैंगिक शोषणके प्रकरणद्वारा अपकीर्ति करनेके षडयंत्रका घटनाक्रम !

पौष कृष्ण ६ , कलियुग वर्ष ५११५


संतश्रेष्ठ प.पू. आसारामबापूजी पिछले ५० वर्षोंसे जनमानसतक संयम, साधना एवं सत्संगकी महिमा पहुंचा रहे हैं । पिछले ८ वर्षोंसे पूरे विश्‍वके युवकोंको १४ फरवरीको मनाए जानेवाले ओज एवं तेजका विनाश करनेवाले वैलेंटाईन डे के स्थानपर मातृ-पितृ पूजन दिवस मनानेकी सुंदर प्रेरणा दे रहे हैं । प.पू. आसारामबापूजी संयम, स्नेह, ब्रह्मनिष्ठा एवं लोककल्याणके साक्षात रूप हैं । भारतीय संस्कृतिके विरुद्ध कार्य करनेवाली निरपेक्ष शक्तियां तथा जिनको भारतीयोंकी नैतिक एवं सांस्कृतिक उन्नतिके कारण बडी हानि होती है, ऐसे सभी लोग प्रसिद्धिके माध्यमसे करोडों रुपए व्यय कर समय-समयपर संतोंके विरुद्ध बडे-बडे षडयंत्र रच रहे हैं ।
एक लडकीके कथित बलात्कारके प्रकरणमें प.पू. आसारामबापूजी एवं उनके भक्तोंको किसप्रकार प्रताडित किया गया, इस विषयके सुनियोजित षडयंत्रकी जानकारी आगे दे रहे हैं ।


१. विकृत एवं धर्मद्रोही प्रसारमाध्यमोंद्वारा षडयंत्रमें सम्मिलित होकर साफ झूठे एवं बापूजीकी प्रतिमा मलिन करनेवाले समाचार प्रसारित करना

एक षडयंत्रके अनुसार २० अगस्तको उत्तरप्रदेशकी एक लडकीको माध्यम बनाया गया । उसके माध्यमसे पू. बापूजीपर उसके साथ छेडखानी करनेका झूठा आरोप लगाया गया तथा इस बातको बलात्कारके आरोपके रूपमें फैलाया गया । प्रसिद्धिमाध्यमोंद्वारा झूठे, निराधार एवं बापूजीकी प्रतिमा विकृत करनेवाले समाचार फैलाकर करोडों देशवासियोंकी धार्मिक भावनाओंको ठेस पहुंचाई गई । लडकीद्वारा प्रविष्ट एफ.आइ.आर.में स्पष्ट अथवा अस्पष्ट रूपसे कहींपर भी किसी प्रकारके कुकृत्यका (बलात्कार करनेका) उल्लेख नहीं है; परंतु प्रसिद्धिमाध्यमोंने, बलात्कार हुआ है तथा वैद्यकीय जांचमें बलात्कारकी पुष्टि मिली है , इसप्रकारके झूठे समाचार फैलाए ।

२. वैद्यकीय जांचमें बलात्कार होनेके संकेत न मिलनेपर भी बापूजीके विरुद्ध बलात्कारकी धारा लगानेवाली कानूनद्रोही देहली पुलिस !

वैद्यकीय जांचके ब्यौरेके अनुसार उस लडकीके शरीरपर कहीं भी कुरेदने तथा दातोंसे काटनेके निशान नहीं हैं । उसका कोई लैंगिक तथा शारीरिक शोषण नहीं हुआ है । उस लडकीने भी उत्तरमें कहीं भी ऐसा नहीं कहा है कि उसपर बलात्कार हुआ । ऐसा होते हुए भी बापूजीपर बलात्कारके लिए लगाई जानेवाली अप्रतिभूतिपात्र धारा ३७६ लगाई गई है । इससे ध्यानमें आता है कि बापूजीको अपकीर्त करनेका यह एक सुनियोजित षडयंत्र है । इसलिए राजस्थान पुलिसने देहली पुलिसको खरीखोटी सुनाई । जोधपुरके पुलिस उपायुक्त अजय पाल लांबाने भी स्पष्ट रूपसे कहा है कि देहली पुलिसद्वारा परिवादकी प्रविष्टि अयोग्य पद्धतिसे की गई है ।

३. प.पू. बापूजीको समन्स मिलनेपर उसके अनुसार उपस्थित रहने हेतु उनकेद्वारा किया गया प्रयास

३ अ. प.पू. बापूजीको जोधपुर आनेके लिए समन्स मिलना

२७.८.२०१३ को पू. बापूजी इंदौरके आश्रममें थे । उन्हें ३०.८.२०१३ तक जोधपुर आनेका समन्स जारी किया गया । इस अवसरपर अनेक महत्त्वपूर्ण कारण दर्शाकर कुछ सुविधा मांगी । समन्स देनेवाले लोगोंने उस पत्रपर ‘हम यह निवेदन आगे पहुंचाएंगे’ ऐसा लिखकर हस्ताक्षर भी किए । जन्माष्टमीके पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमके निमित्त बापूजी २८.८.२०१३ को सूरतके आश्रममें थे ।

३ आ. बापूजीद्वारा जेट एअरवेजका टिकट निकाला जाना; परंतु तीव्र शारीरिक कष्टके कारण उसे निरस्त करना पडा, तो भी बापूजीका भोपालसे देहली होते हुऐ जोधपुर जानेका प्रयास करना

राजस्थान पुलिसको कालावधि बढानेकी सूचना दी गई; परंतु बापूजीको कोई उत्तर नहीं मिला । इसलिए उन्होंने ३०.८.२०१३ को जेट एअरवेजका टिकट निकाला । तत्पश्चात ट्रायजेमिनल न्यूराल्जिया (आयुर्वेदके अनुसार अनंतवात)  व्याधिकी भयंकर पीडाके कारण उन्हें टिकट निरस्त करना पडा । यह पीडा प्रसूतिवेदना एवं हृदयविकारके झटकेकी पीडासे भी अधिक भयंकर होती है । यदि इस व्याधिमें रत्तीभर भी दुर्लक्ष किया गया, तो व्यक्तिकी मृत्यु हो सकती है । संकेतथलपर (इंटरनेटपर) इस व्याधिका वर्णन सबसे पीडादायी रोगके रूपमें किया गया है ।
इतनी पीडा होते हुए भी बापूजी उसी दिन संध्या समय देहलीमार्गसे जोधपुर जाने हेतु भोपाल विमानतलपर पहुंचे; परंतु प्रसिद्धिमाध्यम एवं लोगोंकी भीडमें फंसनेके कारण बोर्डिंग काऊंटर बंद हो गया था । टिकटके रूपमें इसका प्रमाण भी है ।

३ इ. बापूजी इंदौरके आश्रममें गए हुए थे । उस समय बापूने पलायन किया, ऐसी अफवाह फैलाकर सवेरे ६ बजे ही सैकडों पुलिसकर्मियोंद्वारा बापूजीकी कुटियाको घेरना  परिश्रम, जागरण एवं तनाव होते हुए भी बापूजी वाहनसे इंदौरके आश्रम गए । वे किसी अनजाने स्थानपर नहीं गए थे । तो भी ऐसी अफवाह फैलाई गई कि वे भाग गए । मध्यप्रदेशकी पुलिस ३१.८.२०१३ को सवेरे ६ बजे ही आश्रममें प्रविष्ट हुई एवं सैकडों पुलिसकर्मियोंद्वारा बापूजीकी कुटियाको घेर लिया गया । दोपहरतक वहां प्रचुर संख्यामें भक्त भी एकत्रित हो गए थे ।

३ ई. हम जोधपुर पुलिसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं ! – पू. बापू

३१.८.२०१३ की रात्रिमें इंदौरके आश्रमके व्यासपीठपर हुए सार्वजनिक सत्संगमें बापूजीने १६७ देशोंको संकेतस्थल (इंटरनेट) लाईवद्वारा संदेश देते हुए स्पष्ट रूपसे बताया कि हम जोधपुर पुलिसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं एवं हम उनका स्वागत करते हैं । कुछ कारणसे शरीरमें एकाएक वेदना आरंभ होनेके कारण जाना संभव नहीं हुआ । यह पीडा अबतक वैसी ही चल रही है ।

३ उ. बापूजीद्वारा जोधपुर पुलिसको पूरा सहयोग देनेका वचन दिया जाना

पू. बापूजीका रक्तदाब (ब्लडप्रेशर) १६०/१२० था । हृदयमें भारीपन था एवं छातीमें भी पीडा हो रही थी । वैद्यने पुलिसकर्मियोंसे प्रार्थना की कि हमें आधुनिक वैद्यको (डॉक्टरको) आमंत्रित करना है । तदुपरांत जोधपुर पुलिस आश्रम पहुंची । बापूजीने उनसे कहा कि आप निश्चिंत रहें । हम भागकर नहीं जाएंगे । हम भगोडे नहीं हैं । हम वचन देते हैं कि हम आपको पूरा सहयोग देंगे । पुलिसने कहा कि कल सेवेरे हम आपको विमानसे देहली लेकर जाएंगे । आगे कनेक्टिंग फ्लाईटसे जोधपुर जाना है । बापूजीने इसपर सहमति दर्शाई ।

४. षडयंत्र एवं बलप्रयोगका उपयोग कर पू. बापूजीको बंदी बनाया गया ।

४ अ. पुलिसद्वारा भक्तोंको अपमानजनक शब्द कहकर निर्दयतासे मारना एवं रात्रि १२ बजे आराम कर रहे बापूजीको बाहर आनेके लिए बाध्य करना

३१.८.२०१३ की रात्रिको बापूजी १०.३० बजे अपने कक्षमें विश्रांतिके लिए गए । रात्रि ११ बजे आश्रममें शांतिके साथ बैठकर जप-पाठ करनेवाले भक्तोंको पुलिसने उठाना आरंभ किया । अपमानजनक शब्द कहकर एवं अपनी लाठियोंसे निर्दयतापूर्वक मारते हुए पुलिसने भक्तोंको उठाया एवं आश्रमका मार्ग रिक्त किया । खुला किया । भक्तोंको एक स्थानपर बिठाकर चारों ओरसे बैरियर लगाए गए । उस समय इंदौरके आश्रममें ८०० से भी अधिक पुलिसकर्मी थे । रात्रि १२ बजे पुलिसकर्मियोंकीr गाडी कुटियाके पास (पू. बापूजीके निवासस्थानपर ) आई । पुलिसने वहांके सेवकोंसे कहा कि हमें बापूजीसे १०-१५ मिनट प्रश्‍न पूछने हैं । आप उन्हें बाहर आमंत्रित करें ।

४ आ. सवेरे ६ बजे विमानसे लेकर जाएंगे, ऐसा कहनेवाली पुलिसने अपना रुख बदलकर धमकाते हुए कहा कि हम बापूजीको रात्रि १२ बजे लेकर जाएंगे

पश्चात पुलिसने और ऊंचे स्वरमें बोलना आरंभ किया, तो उस समय गुरुदेव अपने कक्षसे बाहर आए । पुलिसने उनसे कहा, ’रात्रिके १२ बज गए हैं । समन्सके ४ दिनोंकी कालावधि समाप्त हो गई है । हम आपको यहांसे लेकर जाएंगे ।’ इसपर सेवकने कहा कि ’आपने ही तो कहा था कि कल सवेरेके विमानसे लेकर जाएंगे । रात्रि यहींपर आराम कीजिए । तो फिर आधी रातको यह आग्रह क्यों कर रहे हो ?’ इस समय पुलिसने धमकाकर कहा कि क्या हम आपकी सुननेके लिए यहां आए हैं ? समय समाप्त हो गया है । हम आपको निश्चित रूपसे लेकर जाएंगे ।

४ इ. संतोंके साथ उद्दंडतासे आचरण करनेवाले एवं निष्पाप भक्तोंपर लाठीप्रहार कर रोब जमानेवाले उन्मत्त पुलिसकर्मी !

गुरुदेव उठकर पुलिसकी गाडीमें बैठने लगे । उन्होंने सेवकोंसे अपना आसन मांगा । पुलिसने उद्धत होकर कहा कि आसन-वासनकी कोई आवश्यकता नहीं है, बैठिए । एक सेवकने दौडते हुए जाकर पानीकी बोतल एवं बैग लाई; परंतु पुलिसने उसे भी गाडीमें नहीं रखने दिया । गुरुदेवके आगे एवं पीछे दोनों ओर पुलिसकर्मी बैठे एवं पुलिसकर्मियोंकी गाडी कुटियाके दरवाजेसे बाहर निकल गई । शेष पुलिसकर्मियोंने कुटियाके सेवकोंपर लाठीप्रहार करना आरंभ किया । भक्त गुरुदेवकी गाडीकी ओर दौडे । लाठीप्रहार चलता ही रहा । गाडी आश्रमके प्रवेशद्वारसे बाहर निकल गई ।

४ ई. पुलिसद्वारा बापूजीको पूरी रात्रि विमानतलपर बिठाकर रखा जाना, जोधपुरमें उतरते ही दो रात्रिके जागरणसे थके बापूजीकी कानूनी जांच आरंभ होना एवं बापूजीपर दबावतंत्रका उपयोग कर उनके हस्ताक्षर लेना

रात्रि १ बजेसे सवेरेतक बापूजीको विमानतलपर ही बिठाकर रखा गया । सवेरे विमानमें चढते ही प्रसारमाध्यमोंने कष्ट देना आरंभ किया । विमानद्वारा देहलीसे जोधपुरको उतरते ही उनकी कानूनी जांचका आरंभ किया गया । निरंतर दो रात्रि बापूजीको रत्तीभर भी निद्रा संभव नहीं हुई । जांचकी कालावधिमें बापूजीने लैंगिक शोषणके विषयमें कहा कि मैं ऐसा काम कर ही नहीं सकता । पूज्य बापूजीपर पुलिसद्वारा दबावतंत्रका उपयोग किया गया तथा कोई भी दस्तावेज बिना पढे एवं बिना दिखाए उनके हस्ताक्षर लिए गए ।

४ उ. पुलिसकी नजरबंदीमें रहते समय तीव्रतासे पू. बापूजीका दुख बढना

पू. बापूजी पुलिसकी नजरबंदीमे थे, उस समय उनके आसपास छायाचित्रक (कैमरे) लगाए गए थे । उनके साथ रहनेवाले सेवकको बापूजीके सिरके दाहिनी ओर अत्यधिक सूजन आई दिखाई दी । बापूजीने बताया कि उस सूजनके कारण उन्हें अत्यधिक कष्ट हो रहा है । पूरी रात्रिके जागरणके कारण ट्रायजेमिनल न्युराल्जियाकी पीडा भयानक रूप ले रही थी ।
पिछले १३ वर्षोंसे बापूजी इस भयंकर पीडासे त्रस्त हैं । इतने वर्षोंसे किए गए औषधि उपचारके १०० से अधिक अहवाल (रिपोर्ट) नीता वैद्यके पास हैं । अब इनकी मानवता कहां गई ? बापूजीके साथ जो बर्ताव हुआ, वैसा किसीके साथ न हो ।
(८० प्रतिशत जन्मसे हिंदू रहनेवाले भारतमें हिंदुओंके संतोंके साथ किया जानेवाला अपमानजनक व्यवहार ! क्या ऐसी निर्दयी पुलिस अन्य धर्मियोंके पादरी अथवा मुल्ला-मौलवीके साथ इस प्रकारका आचरण करनेका साहस दिखा सकती है ? हिंदुओ, इससे यह ध्यानमें लें कि आपका कोई त्राता (रक्षक) नहीं है एवं अपनी एवं देवी-देवता, धर्म तथा संतोंकी रक्षाके लिए स्वयं सिद्ध हों ! जिस समय राजनीतिज्ञ आपके पास मतोंकी भीख मांगनेके लिए आएंगे, उस समय उनसे इन सब बातोंका स्पष्टीकरण मांगें । अब उन्मत्त राजनेताओंको कुर्सीसे उतारकर हिंदुओंकी एकताका सामर्थ्य दिखानेका समय आ गया है ! – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात )

५. पू. बापूजीके साधकोंपर पुलिसद्वारा किए गए अमानवीय अत्याचार

५ अ. पुलिसद्वारा जांचके नामपर शिवा नामक एक साधकके साथ आतंकवादीके समान आचरण कर कोरे कागजपर उनके हस्ताक्षर लेना

पूज्य बापूजीके ३ साधकोंपर भी झूठे आरोप लगाए गए । उसमें पुलिसद्वारा शिवा नामक एक साधकके साथ जांचके नामपर आतंकवादीके समान बर्ताव किया गया । आरोप लगानेवाली लडकीने कहा था कि उन सभीको शिवाभाईने १५ अगस्तकी रात्रिमें आमंत्रित किया था । इसके विपरीत शिवाकी टिकटसे तथा भ्रमणभाषकी प्रविष्टिसे पता चलता है कि वह संध्या समय ही देहली चला गया था । शिवासे पुलिसद्वारा कोरे कागजपर हस्ताक्षर लिए गए । ऐसा करनेके लिए पुलिसपर कितना दबाव डाला गया होगा ?

५ आ. बापूजीके विरुद्ध प्रमाण देने हेतु साधकको निर्दयतासे मारपीट करना

शिवाके साथ निर्दयतासे मारपीट की गई, प्रलोभन दिखाया गया । उसके कानका पर्दा भी खराब किया गया । हाथकी कोहनी एवं घुटनोंपर जूतोंसे मारा गया । क्या यह षडयंत्र रचनेवाले लोगोंद्वारा  बापूजीके विरोधमें साक्ष देने हेतु पुलिसपर डाला हुआ दबाव नहीं है ? यह सब वैद्यकीय जांचमें नहीं आएगा, ऐसा कहकर शारीरिक एवं मानसिक पीडा भी दी जाती है । भगवान ना करे, ऐसी पीडा किसी भी निर्दोषके भाग्यमें हो !

५ इ. कानूनका उल्लंघन करनेवाली उन्मत्त पुलिसद्वारा ३ दिनके पश्चात शिवाको न्यायालयमें उपस्थित किया जाना

कानूनकी दृष्टिसे किसी भी व्यक्तिको पुलिसकी हिरासत मिलनेपर २४ घंटोंके अंदर न्यायाधीशके समक्ष (मैजिस्ट्रेटके सामने) उपस्थित करना अनिवार्य है । तो भी जोधपुर पुलिसद्वारा अवैध रूपसे शिवाका रिमांड लेनेपर उसे ३ दिन देरीसे न्यायालय लाया गया ।

५ ई. पुलिसद्वारा छिंदवाडा जाकर गुरुकुलके अधीक्षकोंपर (वॉर्डनपर) दबावतंत्रका उपयोग करना एवं आरोप लगानेवाली लडकीकी सहेलियोंको धमकाकर विरोधी प्रमाण देनेके लिए बलपूर्वक आग्रह करना

छिंदवाडा गुरुकुलकी अधीक्षक (वॉर्डन) शिल्पीका पिछले ६ माहसे पूज्य बापूजीसे कोई संपर्क नहीं हुआ था । जोधपुर पुलिसने छिंदवाडा जाकर उनपर दबावतंत्रका प्रयोग किया । साथ ही आरोप लगानेवाली लडकीकी सहेलियोंको भी धमकाया एवं उन्हें विरोध साक्ष्य देने हेतु बलपूर्वक आग्रह किया । जो पूछताछ कुछ घंटोंमें पूरी होनी संभव थी, उसे ३ दिनोंतक जारी रखनेका प्रयास किया गया । इन सब बातोंसे त्रस्त होकर उन छात्राओंने, ‘राजस्थान पुलिस इस प्रकार दबाव क्यों डाल रही है ?’ ऐसा प्रश्‍न पूछा एवं उनके विरोधमें घोषणाएं भी कीं । तब कहीं राजस्थान पुलिस छिंदवाडासे वापस गई ।

६. पुलिसकी संदेहजनक कार्यपद्धति

६ अ. बलात्कार होनेका प्रमाण न रहना

इस घटनाके विषयमें लडकीकी मनगढंत बातोंके अतिरिक्त पुलिसके पास और कौनसी जानकारी है ? उसके आरोपोंके समर्थनके लिए कौनसे प्रमाण हैं ? वैद्यकीय जांच तो सर्वसाधारण ही हैं ।

६ आ. यदि कथित बलात्कारकी घटना जोधपुरमें हुई, तो देहलीके कमला मार्केट पुलिस थानेमें अपराध क्यों प्रविष्ट किया गया ?

१५.८.२०१३ को घटना हुई एवं पुलिसद्वारा २०.८.२०१३ को अर्थात ५ दिनके पश्चात रात्रि २.४५ बजे एफ.आइ.आर.प्रविष्ट किया गया । लडकीr उत्तरप्रदेशकी, पढ रही थी छिंदवाडामें (मध्यप्रदेश), तथाकथित घटना जोधपुरकी (राजस्थान) है तो एफ.आइ.आर.देहलीमें और वह भी कमला मार्केट पुलिस थानेमें ही क्यों प्रविष्ट किया गया ? यदि वे उत्तरप्रदेशसे रेल, एस.टी.अथवा विमानद्वारा देहली गए,तो भीr कमला मार्केट तक आनेसे पूर्व प्रमुख मार्गपर ३ प्रमुख पुलिस थाने हैं । वहां एफ.आइ.आर.क्यों नहीं प्रविष्ट किया गया ? पुलिसकी प्रत्येक गतिपर अनेक प्रश्‍नचिह्न उभरते हैं ।

७. महाभयंकर षडयंत्रके कारण भयभीत करनेवाले प्रश्‍न

७ अ. ५० वर्षोंसे निरंतर जनसेवाका व्रत लिए  पू. बापूजीसमान महान संतको १७ वर्षीय लडकीके आधारहीन आरोपोंके कारण कारागृहमें क्यों जाना पडा ?

जो व्यक्ति भारतीय संस्कृतिका प्रचार-प्रसार,  व्यापक रूपसे समाजकी सेवा, बालक, युवक एवं महिलाओका उत्थान, रोगग्रस्तोंपर उपचार, असहाय-निर्धनोंके लिए भंडारोंका नियोजन, प्रत्येक प्रकारकी नैसर्गिक आपत्तियोंमें सहायता कार्य इत्यादिमें ५० वर्षोंसे सेवारत हैं, ऐसे एक अत्यंत लाडले महान संतको तथाकथित १६ – १७ वर्षकी लडकीद्वारा लगाए गए आधारहीन एवं बिना एक भी सबल प्रमाणके आरोपोंके आधारपर पुलिस कारागृहमें कैसे भेज सकती है ?

७ आ. धर्मको नष्ट कर भारत देशको मिटाना, क्या यही इसके पीछेकी राजनीति है ?

इन सब घटनाओंके पीछे कौनसी राजनीति है ? क्या हिंदु धर्मके सब मूलस्रोत नष्ट करना ही इसके पीछेका उद्देश्य है ? धर्मके ऊपरसे लोगोंकी आस्था नष्ट कर क्या उनको धर्म परिवर्तन करने हेतु  प्रेरित करना है ? जबतक हिंदु धर्म है, तबतक ही भारत देश `भारत’ रहेगा । क्या धर्मको नष्ट कर भारत देशको मिटाना है ? प्रबुद्ध समाजको इन बातोंकी ओर गंभीरतासे ध्यान देना चाहिए ।

८. प्रसिद्धिमाध्यमोंपर नियंत्रण रखनेवाले निश्चित कानून भारतीय घटनामें होने चाहिए !

मनगढंत समाचार फैलाकर टी.आर.पी.बढानेवाले प्रसिद्धिमाध्यमोंपर नियंत्रण रखनेवाले निश्चित कानून भारतीय घटनामें होने चाहिए, अन्यथा समाज भ्रमित होगा तथा धर्म एवं संतोंके ऊपरका विश्‍वास गंवा बैठेगा । यहां इस बातपर ध्यान देना आवश्यक है कि ऐसे आरोप केवल हिंदू संतोंपर ही लगाए जाते हैं । यदि धर्म एवं संस्कृतिके संदर्भमें अपनी आस्था समाप्त हो गई, तो सर्वनाश होगा ! यतो धर्मस्ततो जयः । यतो धर्मस्ततोऽभ्युदयः । अर्थात जहां धर्म है, वहीं विजय एवं अभ्युदय है । यदि संत ही नहीं रहे, तो मानव जीवन दिशाहीन होगा ।  

९. भारतीय संस्कृतिको नष्ट-भ्रष्ट करने हेतु भयानक षडयंत्र रचकर करोडों लोगोंके आस्थास्रोत रहनेवाले संतोंके साथ घृणास्पद आचरण करना न्यायव्यवस्थाका दुरुपयोग करना है !

क्या इन सब बातोंके पीछे षडयंत्र रचनेवाले लोगोंका दबाव स्पष्ट रूपसे दिखाई नहीं देता ? इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृतिको नष्ट भ्रष्ट करने हेतु कितने भयानक षडयंत्र रचे जा रहे हैं । यदि ऐसा नहीं होता, तो पुलिसद्वारा देशसेवा करनेवाले ऐसे महापुरुष एवं उनके साधकोंके साथ आतंकवादियोंके समान आचरण नहीं किया गया होता । यह अत्यंत निंदनीय है । जिनकी वाणी पूरे विश्वके करोडों लोग आस्थापूर्वक सुनते हैं, जिन महापुरुषसे करोडों लोगोकी धार्मिक भावनाएं एकरूप हो गई हैं, क्या ऐसे एक संतपर एक लडकीकी निराधार बातके आधारपर इस प्रकार अत्याचार होना न्यायव्यवस्थाका दुरुपयोग नहीं है ?

१०. जनहो, साहसी बनें एवं समाजमें स्थित दुष्प्रवृत्तियोंका सामना करने हेतु सिद्ध हों !

सनातन संस्कृतिके सुपुत्रो, ऐसे लोगोंको निरीश्‍वरवादी कहें अथवा अपना अहंकार सिद्ध करनेके लिए किसी भी स्तरपर जानेवले तमप्रधान प्रकृतिके कूटनीतिज्ञ कहें ! उनका सामना करने हेतु अब हम सबको सिद्धता करनी होगी । अन्याय करना पाप है, तो अन्याय सहन करना दुगना पाप है । अपनी संस्कृतिकी रक्षा एवं सेवा करने हेतु हमें साहसी बनना होगा । धैर्यवान होकर पूर्णतः विचार कर हमें कदम आगे बढाने होंगे । उद्योगशीलता, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति एवं पराक्रम ये छः सद्गुण अपने घरके भंडार हैं । अब ये भंडार खोलने हैं । (संदर्भ : मासिक ऋषि प्रसाद, सितंबर २०१३)

प.पू. बापूजीपर लगाए गए झूठे आरोपोंका भक्तोंपर परिणाम

अ. कुप्रचारसे व्यथित पू. नारायण साईके श्वसुरद्वारा दो दिनतक अन्न-जलका त्याग करना एवं हृदयविकारके झटकेसे उनका प्राणोत्क्रमण होना

मध्यप्रदेशके अनेक आश्रमोंके सेवाप्रभारी, सेवानिष्ठ साधक, भोपाल आश्रमके वरिष्ठ पदाधिकारी एवं पू. नारायण सार्इंके श्वसुर श्री देव कृष्णानी बापूजीके विरुद्ध किया गया षडयंत्र नहीं सहन कर सके । उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होनेके कारण उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया । उन्होंने अपने अंतःकरणका दुख भोपालके जनपदाधिकारीको निवेदनके रूपमें बताया । जब कुछ भी निराकरण होता दिखाई नहीं दिया, तो हृदयविकारके झटकेसे उन्होंने प्राण त्याग दिए ।
कल्पित कहानियां बनानेवाले लोगोंने २ दिनसे अन्न-जलका त्याग  करनेवाले सेवायोगी साधकके प्राण लिए । २९.८.२०१३ को सवेरे ३.२० बजे उन्होंने प्राणत्याग किया । कुप्रचारसे पूर्व वे पूर्णतः स्वस्थ थे । देव कृष्णानीकी मृत्युका समाचार सुनकर उनके अंतिम संस्कारके लिए पूज्य बापूजी जन्माष्टमीका कार्यक्रम अधूरा छोडकर सूरतसे भोपाल गए । श्री देव कृष्णानीको केवल लडकियां ही हैं । इसलिए बापूजी एवं अन्य सगेसंबंधियोंने उन्हें कंधा दिया ।

आ. साधकोंमें षडयंत्रके विरुद्ध भयंकर असंतोष व्याप्त हुआ !

देश-विदेशके साधकोंमें इस षडयंत्रके विरुद्ध भयंकर असंतोष व्याप्त है । पूरे देशमें शांतिपूर्वक विरोध करते हुए सभा, धरना-प्रदर्शन आदि आरंभ हो गए हैं ।

कथित बलात्कारपीडित लडकीका स्वैर आचरण

अ. मानसिक अस्वास्थताके लिए उपचार लेनेवाली लडकीद्वारा रात्रि अनेक घंटोंतक भ्रमणभाषपर बातें करते रहना

कुछ दिनोंपूर्व वह लडकी अस्वस्थ थी एवं उस समय उसपर उपचार हुए थे, इस बातके प्रमाण हैं । पुनः उसने मानसिक अस्वस्थता दर्शाई । उसकी सहेलियोंसे प्राप्त जानकारीके अनुसार वह प्रसाधनगृह बंद कर तथा रात्रि गुरुकुलकी अटारीपर(टेरेसपर) अनेक घंटोंतक भ्रमणभाषपर वार्तालाप करती थी ।

आ. स्वैराचारी रहनेके कारण उस लडकीको गुरुकुलका संयत एवं सात्त्विक वातावरण पसंद न रहनेके कारण  आश्रमसे बाहर जाने हेतु उसका सदैव प्रयत्नरत रहना

बापूजीपर आरोप लगानेवाली इस लडकीके विषयमें छिंदवाडा गुरुकुलकी एक छात्राने कहा कि उसे गुरुकुलमें रहनेकी इच्छा ही नहीं थी । उसे चलचित्र देखना, लडकोंके संदर्भमें बोलना, फास्ट फूड खाना इत्यादिमें अधिक रुचि थी । अपनी लडकीके बिगडनेके भयसे उसके पिताजीने उसे बलपूर्वक गुरुकुलमें रखा था । गुरुकुलका सात्त्विक भोजन, नियम, जप इत्यादि करना एवं वहांके संयत वातावरणमें रहना उसके लिए कठिन था । वह चुराकर एवं छिपकर चलचित्र देखती थी । उसे गुरुकुलसे निकल कर जाना था । वह निरंतर यही विचार करती थी कि आश्रमसे बाहर कैसे जाएं । साथ ही मध्यरात्रिके समयतक गुरुकुलकी (टेरेसपर) घूमती थी ।

इ. गुरुकुलकी अपकीर्ति करने हेतु बापूजीका चारित्र्यहनन करनेका सुलभ मार्ग चयन करना एवं लडकीद्वारा, ‘मुझे जैसा कहा गया, वैसा मैं कहती हूं,’ ऐसी स्वीकृति देना

इसी छात्राने आगे कहा कि जानेसे कुछ दिन पूर्व वह लडकी कहती थी कि मुझे मेरा नाम बडा करना नहीं है । मैं इस गुरुकुलकी अपकीर्ति करूंगी । पश्चात गुरुकुल अपनेआप बंद होगा एवं मेरे पिताजीको मुझे यहांसे निश्चित रूपसे ले जाना पडेगा । गुरुकुलकी अपकीर्ति करने हेतु उसने बापूजीका चारित्र्यहनन कर उनकी अपकीर्ति करनेके सुलभ मार्गका चयन किया ।
एक सहेलीने उसे पूछा, आपने बापूजीपर आरोप क्यों लगाया ? उस समय उसने कहा, मुझे जैसा बोलनेको कहा गया, वैसा मैं बोलती हूं ।

लडकीके भाईने दिए उलट-पुलट उत्तर

अ. आरंभमें गुरुकुलके सकारात्मक विचार प्रस्तुत करना

मां-बापके साथ लडकी शाहजहांपुरको गई । कुछ दिनोंमें उसके भाईको पुलिसद्वारा छिंदवाडा गुरुकुलसे पुनः आमंत्रित किया गया । वहांसे जाते समय उसने लिखित तथा वीrडीयोके साक्षात्कारमें गुरुकुलके प्रति सकारात्मक विचार प्रस्तुत किए ।

आ. गुरुकुलके विषयमें विपरित बातें बताना

तदुपरांत षडयंत्र करनेवाले व्यक्तियोंसे मिलीभगत करनेपर भाईने कहा कि गुरुकुलमें भोजन नहीं दिया जाता । वहां भूखा रखा जाता है । केवल मांस तथा मछलियां खिलाई जाती हैं ।

भाईद्वारा दिया गया उत्तर साफ झूठा है । ये बिलकुल झूठे आरोप प्रसारमाध्यमोंद्वारा लगाए गए हैं । इस प्रकारके अनेक निरर्थक आरोप लगाए गए । लडकीने भी अनेक मनगढंत आरोप लगाए । षडयंत्र करनेवाले लोगोंने इन बहन भाईसे इस प्रकार झूठ कहलवाया । इन उत्तरोंसे षडयंत्रकी दुर्गंध आती है ।

प्रथम स्वामी केशवानंदको झूठे आरोपोमें फंसाया जाना एवं पश्चात निर्दोष सिद्ध होनेपर उनका मुक्त होना

गुजरात राज्यके द्वारकामें अधिकारियोंकी मिलीभगतसे स्वामी केशवानंदजी नामक संतपर ऐसा ही अत्याचार हुआ था । उन्हें  बलात्कारके झूठे प्रकरणमें फंसाकर १२ वर्षका दंड सुनाया गया था । केशवानंदजीको प्रसिद्धिमाध्यमोंने अपकीर्त किया था । कोई भी अधिवक्ता उनका अभियोग चलानेके लिए सिद्ध नहीं होता था । अंततः उन्हें कारागृहमें भेजा गया । केशवानंदजीको आज भी वहांके लोग मानते हैं । उनका सम्मान तथा सत्कार करते हैं । १२ वर्षोंके दंडकी शिक्षामें ७ वर्ष कैदमें रहे एवं तदुपरांत सत्य सामने आनेपर उन्हें निर्दोष घोषित किया गया ।

एक अधिकारीने कहा कि बलात्कारके ९८ प्रतिशत प्रकरण झूठे सिद्ध हुए हैं । मेरे १२ वर्षके कार्यकालमें केवल तीन प्रकरण सत्य सिद्ध हुए हैं  ।

(संदर्भ : मासिक ऋषि प्रसाद, सितंबर २०१३)

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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