प.पू. आसारामबापूके आश्रमके विषयमें भ्रम एवं वास्तविकता !

कार्तिक कृष्ण ९ , कलियुग वर्ष ५११५


]प्रणाल माध्यमोंद्वारा पिछले माहसे संतश्री प.पू. आसारामबापूपर विभिन्न प्रकारके अत्यंत घृणास्पद एवं गंभीर आरोप प्रणाल माध्यमोंद्वारा कि लगाए गए । उन आरोपोंकी सत्यता सिद्ध करने हेतु तथाकथित शोधपत्रकारिता की गई, ऐसा बहाना बनाकर इन राष्ट्र तथा धर्मद्रोहियोंने पूरी तरहसे झूठी ध्वनिचित्रचक्रिका बनाकर प्रसारित करनेका इन राष्ट्र तथा धर्मद्रोहियोंने दुस्साहस किया ! किंतु प्रत्यक्षमें प.पू. आसारामबापूको अध्यात्मिक, धार्मिक एवं राष्ट्रीय कार्य अलौकिक हैं । उन्होंने लक्षावधि लोगोंको साधना करनेके लिए प्रवृत्त किया है, उन्हें धर्माचरणी बनानेका प्रयास किया है, उनमें राष्ट्र एवं धार्मिक विचारोंकी जागृति की है, पाश्चात्त्य संस्कृतिके आक्रमणोंके विषयमें उन्हें सतर्क किया है । ये सर्व महत्कार्य करनेवाले उनके साधकोंको प्रेरणास्त्रोतवाले प.पू. आसारामबापूजीके आश्रम कैसे हैं, मुझे यह निकटसे अनुभव करनेका अवसर मुझे प्राप्त हुआ । उस समय प.पू. बापूजीके गुजरातके कर्णावती(अहमदाबाद)के आश्रमके संदर्भमें ध्यानमें आए कुछ सूत्रं यहां प्रस्तुत कर रहा हूं । वह जिसे पढकर यह स्पष्ट होगा कि, देश-विदेशकी कुछ हिंदूद्वेषी शक्तियोंद्वारा आश्रमसे बाहर निकले कुछ विकल्प पिडित साधकोंके सहयोगसे प.पू. आसारामबापूजीका संप्रदाय उद्ध्वस्त करनेका महाभयंकर षडयंत्र रचाया गया है, इसमें कुछ आशंका ही नहीं !

संकलक – श्री. अभय वर्तक, तत्कालीन प्रवक्ता, सनातन संस्था





प.पू. आसारामबापूके आश्रममें किए जानेवाले अभियान : लडकियोंके लिए प्रशिक्षण, बंदियोंके लिए सत्संग, गोपालन, वैद्यकीय सेवा

रॉबर्ट वढेराके समान व्यक्तिको छोडकर संतश्री प.पू. आसारामबापूपर पूरी तरहसे झूठे आरोंपोंकी शृंखला आरंभ रखनेवाले प्रसारमाध्यमं !

     हिंदुदूद्वेषी प्रसारमाध्यमोंने संतश्री प.पू. आसारामबापूपर बलात्कारसे हत्यातक अनेक आरोप लगाए; उनमें भूमि गबन करना, बच्चोंका शोषण करना, तांत्रिक विधि करना, महिलाओंका शोषण करना, अफूअफीम सेवन करना, इस प्रकारके गंभीर आरोप भी समाविष्ट थे । हमने आरोप लगानेवालोंसे पास प्रमाणकी मांग की ! किंतु कोई भी प्रमाण देनेके लिए सिद्ध नहीं हुआ, अपितु कोई भी प्रमाण न होनेवालोंकोसे इन प्रसारमाध्यमोंने उनका पक्ष प्रस्तुत करनेके लिए इन प्रसारमाध्यमोंने अधिक समय दिया ! एक कार्यक्रममें जब रॉबर्ट वढेरा, इस सोनियाके इस दामादके विषयमें प्रामाणिक प्रशासकीय अधिकारी खेमकाने सप्रमाण आरोप लगाए, तो उन्हें अपना मत व्यक्त करनेका अवसर नहीं दिया गया । उनके आरोपोंके संदर्भमें मास-मासतक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए । उनके संदर्भमें जांच करनेके लिए अपने पत्रकारोंको नहीं भेजा; उलट यह प्रकरण शीघ्रसे शीघ्र किस प्रकार दबाया जाएगा, इसका ही प्रयास किया गया ।
       विश्वमें प.पू. आसारामबापूके ४५० से अधिक आश्रम हैं । उनमें सूरत, बडोदा, गोरेगांव, मुंबई ये आश्रम इससे पूर्व ही देखनेका अवसर प्राप्त हुआ था; किंतु सर्व आश्रमोंका प्रमुख गुजरातको कर्र्णावती (अहमदाबाद) का आश्रम दर्र्शन करनेका अवसर पहली बार ही प्राप्त हुआ । शब्दोंद्वारा इस आश्रमका विवरण शब्दमें करना, अत्यंत कठिन है । ऐसो होते हुए भी मेरे मनका इस आश्रमके प्रति अपने मन को भाव व्यक्त करनेका अल्प स्वरूपमें प्रयास कर रहा हूं ।

भाव, लगन तथा नम्रतासे होनेवाले परिपूर्ण अधिकांश पूर्णकालीन साधकोंका आश्रममें निवास !

          आश्रममें बचपनसे ही निवास करनेवाले श्री. नरेशभाईने हमारा स्वागत किया । आश्रमके मुख्य प्रवेशद्वारमें ही वे हमारे स्वागत हेतु आए थे । उन्होंने अत्यंत प्यारसे हमारी पूछताछ की तथा दिनभरका मेरा नियोजन क्या होगा, यह भी बताया । श्री. नरेशभाई बचपनसे ही आश्रममें पूर्णकालिके लिए होकर निवास करनेके लिए आए । अब उनकी आयु लगभग २८ वर्षकी है । उनका भाव, लगन, नम्रता, अभ्यासूसी वृत्ति अत्यंत प्रशंसनीय थी । यहां श्री. नरेशभाईका वर्णन करनेका कारण केवल इतना ही है कि, इस प्रकारके सैकडों नरेशभाई इस आश्रममें निवास कर रहे थे !

प्रणालोंद्वारा किए गए विवरणके अनुसार पंचतारांकित नहीं, तो अपितु अत्यंत सीधा एवं साधनाके लिए पोषक वातावरण होनेवाला प.पू. आसारामबापूका आश्रम !

          आश्रमके सभी साधकोंमें भाव एवं निरंतर नामजप करनेकी लगन दिखाई दे रही थी । कहीं भी ऊंची आवाजमें वक्तव्य नहीं, सर्वत्र शांतिपूर्ण वातावरण; आचरणमें भी किसी भी प्रकारका दिखावा नहीं, अपितु अत्यंत सीधापनसरल तथा निरंतर नामजपमें एवं तथा सेवामें व्यस्त साधक, ऐसा इस आश्रमका वातावरण था । प्रणालोेंपर उनके आश्रमोंका विवरण सुननेके पश्चात् बडीडे-बडीडे भव्यदिव्य इमारतेंभवन, संगमरवरीके कट्टे, इस प्रकार कुछ तो पंचतारांकित वातावरणका विवरण मेरे मनमें था । किंतु प्रत्यक्षमें आश्रममें गुरुकुलकेी भव्य इमारतभवनके अतिरिक्त एक भी भव्य इमारतभवन नहीं थी, यह देखकर मैं आश्चर्यचकित हुआ । साधकोंकी रहन-सहनदिनचर्या अत्यंत सीधी थी । पूरे आश्रमका दर्शन करनेके पश्चात् प्रणालोंद्वारा बताए गए फाईवह स्टारमेंसे एक भी स्टारका मुझे दर्शन नहीं हुआ ! दर्शन हुआ, तो केवल प.पू. बापूके भक्तोंकी ईश्वरप्राप्तिकी लगनका !

न्यायतंत्रद्वारा बताए गए तथा दैैवी संस्कारवाला गुरुकुल !

          आश्रमदर्शन करते समय सबसे पहले मुझे गुरुकुलका दर्शन कराया गया । गुरुकुलमें सर्वत्र शांति एवं स्वच्छता थी । सर्व दिीवारोंपर वेदोंकी ऋचा लिखी गई थी । सर्व विद्यार्थियोंके लिए दिनमें चार बार आहारका प्रबंध, उत्तम निवासकी व्यवस्था, संगणक शिक्षाकी व्यवस्था, उत्कृष्ट ग्रंथालय इस प्रकारकी सुविधाएं वहां उपलब्ध हैं । २०० से अधिक विद्यार्थी इस गुरुकुलमें पढते हैं ।
          इसी गुरुकुलमेमें तांत्रिक कारणसे दो विद्यार्थियोंकी तांत्रिक कारण हत्या हुई है, ऐसा झूठा वक्तव्य दे कर प्रसारमाध्यमोंने प.पू. बापूकी अपकीर्ति की थी । न्यायमूर्ति त्रिवेदी आयोग, केंकेंद्रीय गुनाह अन्वेषण विभाग (सी.बी.आयइ.)के समान बडे तंत्रोोंने इस संदर्भमें जांच की है । इस गुरुकुलके उस समयके प्रमुख श्री. पंकज भाईने उस समयके न्यायालयीन प्रक्रियाके सर्व कागजात मुझे दिखाए तथा मुझे उसकी एक प्रति भी दी । भारतके सर्वोच्च न्यायालयनेद्वारा यह सिद्ध करना कि कोई भी तांत्रिक विधि नहीं हुआई हैंहै, वे सभी कागजात इसकी निश्चितिी देनेके वे सभी कागजात ही हैं; किंतु प.पू. बापूकी अपकीर्ति करनाी ही है, यह षडयंत्र रचनेवालोंको इन कागजातोंसे कुछ भी लेन-देन नहीं था एवंऔर ना ही नहीं भी हैंहै; इसलिए प्रसारमाध्यमोंने मनमानी कर उनकी अपकीर्ति उस समय भी की थी तथा अब भी कर रहे हैं ।

आश्रमके विभिन्न कक्ष तथा उनकी विशेषताएं !

अ. संगणकीय संरचना कक्षमें २० फीट लंबाईके तथा १२ फीट चौडाईवाले छोटे आकारके कक्षमें ७-८ संगणक रखे हैं । वहां मंद स्वरमें भजन लगाया गया था । इतनसे छोटे स्थानपर `ऋषिप्रसाद’, इस मासिकका टंकलेखन, संरचना एवं उनका अनेक भाषाओंमें उनका अनुवाद करनेकी भी सेवा की जाती है । वर्तमानमें  `ऋषिप्रसाद’के २० लक्षोंसे अधिक ऋषिप्रसादके वाचक हैं ।

आ. यहांका बालसंस्कार समन्वय केंकेंद्र यह कक्ष १७ सहस्त्रा्र ५०० बालसंस्कारवर्गोंका संवाद केंद्रके इस रूपमें कार्यरत है । इस बालसंस्कार केंद्रद्वारा बडे बडे पाठशालाओंमें जाकर वहांके छात्रोंपर संस्कार करनेका कार्य इस बालसंस्कार केंद्रद्वारा किया जाता है । छात्रोंकी परीक्षा लेना, उन्हें प्रोत्साहनपर पारितोषिक वितरित करना, येह इस संस्कार केंद्रको कार्य हैहैं ।

इ. यहांके ध्वनिचित्रीकरण कक्षमें प.पू. बापूके कार्यक्रमोंकी ध्वनिचित्रचक्रिकाका संकलन होता है । श्री. अश्विनमामा इस कक्षके प्रमुख हैं । पिछले ३० वर्षोंसे वे प.पू. बापूके आश्रममें निवास कर पूर्णकालीन साधना कर रहे हैं । अत्यंत नम्र, मुंहपर सािित्त्वक भाव, प.पू. बापूजीके प्रति अत्यंत श्रद्धा भाव इन शब्दोंमें उनका वर्णन किया जाएगा । उनकी सहायताके लिए २० से २५ वर्षके होशियारबुद्धिमान लडके हैं । उनके मुखपर भी वैसे ही भाव थे । सभीने आत्मीयतापूर्वक स्वागत किया । वहां ‘सनातन संस्थाको प.पू. बापूके संदर्भमें क्या लगता है ?’, इस विषयपर छोटेसे साक्षात्कारका ध्वनिचित्रीकरण भी किया गया ! उन्होंने इस कक्षका नामकरण ‘शब्दब्रह्म’ ऐसा किया है ! यहां एक छोटासा साऊंडप्रूफ स्टुडिओ भी है । इस कक्षके सभी उपकरणं अत्याधुनिक हैं ।

ई. अनुमानसे २० सहस्त्र्र लोग बैठेंगे, इतना बडा सभामंडप है । इमारतभवन पक्की है; किंतु सभामंडपमें कहीं भी ऐश्वर्यका प्रदर्शन नहीं । यहां भी प.पू. बापूके भजन लगाए गए थे । एक कोनेमें प्रोजेक्टरकी व्यवस्था थी । यदि पूरे देशमें कहीं भी प.पू. बापूका कार्यक्रम आरंभ है, तो वह प्रत्यक्ष (लाईव) देखनेकी व्यवस्था इस स्थानपर है । सभामंडपमें बाहरगांवसेअन्य स्थानोंसे आएं से सैकडों भक्त जप करने बैठे थे ।

उ. मौन मंदिर इस स्थानपर ७ दिन मौनका पालन करनेका अनुष्ठान करनेवालोंकी निवासव्यवस्था है.

ऊ. प्रशस्त अन्नपूर्णाभवन है । भोजनशालामें सुबह ९ से ११ तथा सांयकाल ५ से ७ यह महाप्रसादका समय है । १ वर्ष पूर्व आश्रममें सुबहकी न्याहरी बनाई जाती थी; किंतु आयुर्वेदानुसार अब यह भोजनका समय निश्चित किया गया है । भोजनमें रोटी-सब्जी, डदाल-चावल, येह पदार्थ समाविष्ट रहते हैं । उत्सवके समय लक्षावधियोंके लिए महाप्रसाद सिद्ध करनेकी क्षमता इस भोजनशालामें है । सर्व साधक शांतिसे तथा एक-दूसरेके साथ अनावश्यक बातें न कर अथवा मौन धारण कर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं । यह कक्ष भी साधारण है । कहीं भी ऐश्वर्यका प्रदर्शन (प्रणालोंकी भाषामें स्टार)नहीं; किंतु सािित्त्वक आहार देनेका कार्य अवश्य है !

प्रणालोंद्वारा प.पू. बापूके आश्रमके साधिकाओंकी की गई अपकीर्ति तथा उस पृष्ठभूमिपर साधिकाओंके साथ संवाद करनेके पश्चात् सामने आया सत्य !

अ. प.पू. बापूकी साधिका साध्वी कृष्णा बहनके कार्यक्रम पूरे भारतमें कार्यक्रम होते हैं । प.पू. बापूकी ओरसे वे प्रवचनके कार्यक्रम करती हैं । उनके आचरण एवं वक्तव्यमें करारीपन दृढ निश्चय, अनुशासन, तथा निर्मलताका दर्शन उनके आचरणमें-वक्तव्यमें दिखाई देता था । प.पू. बापूका होनेवाला अनादर तथा आश्रमकेी महिलाओंके प्रति कुछ भी वक्तव्य करनेवालेी प्रसारमाध्यमोंद्वारा होनेवाला शोषण इन सभीके प्रति उनकी भावनाएं अत्यंत तीव्र स्वरूपकी थी ।

आ. श्रीमती कनकबहनने बताया कि, मैं तथा मेरे पति हम दोंनों भही पिछले १७ वर्षोंसे आश्रममें निवास कर रहे हैं । प्रज्ञाबहनने बताया कि, मैं तथा मेरी बेटी दोनों भी आश्रममें रहते हैं । यदि इस आश्रममें ऐसे अपप्रकार होते, तो क्या मैं मेरी बेटीको यहां रखती ? इसी प्रकारके अनेक उदाहरणं… ! मेरे इसन बहनोंकेी गुरुचरणोेंके विरहकी व्यथाका विवरण मैं शब्दोंमें नहीं कर सकता !

इ. इस प्रकारकी निर्मल महिलाओेंके सदर्भमें न्यूज २४ प्रणालपर आश्रमसे निकाले गए किसी भ्रष्ट व्यक्तिने आश्रममें निवास करनेवाली सभी लडकियोंके चारित्रयपर कीचड उछाला तथा यह सभी प्रणालोंने इसे प्रसारित कर सबको दिखाया ! वह भी बिना प्रमाणके आधारपर ! इसी प्रकारके अनेक अभिभावक वहां अपने बच्चोेंके साथ निवास करते हैं ।

तुलसीके खेतमें प.पू. बापूकी कुटी !

          आश्रमसे ३-४ कि.मी. की दूरीपर प.पू. बापूकी कुटी है । जिस स्थानका दर्शन किया । कुटी अर्थात् लगभग २५० चौरस फीटका छोटासा घर । केवल दो खानेवाला ! उस घरके आसपास चारों ओर बडी मात्रामें तुलसीके पौधे हैं ! बडी मात्रामें अर्थात् हम कल्पना भी नहीं कर सकते, इतनेी बडी मात्रामें ! सारांशमें तुलसीके खेतमें प.पू. बापूकी कुटी है, ऐसा ही कहना पडेगा । इस क्षेत्रको वे वाटिका कहते हैं । केवल आंवला तथा तुलसीवाले खेतको प्रसारमाध्यमोंने, प.पू. बापू अफूफीमकी खेती करते हैं, ऐसा संबोधित किया !

प.पू. बापूकी सगी बहननेद्वारा आंसूभरे नयनोंनेसे प.पू. बापू उनके बंधु नहीं, तोअपितु उनके गुरु हैं ! यह बताना !

उस कुटीमें प्रवेश करते समय प.पू. बापूकी सगी बहनसे भेभेंट हुई । उन्होंने आंखोंमेंसे आंसू बहाते हुए पूछा, मेरे बापू कब आएंगे ? वे मेरो भाई नहीं, तो वे तो मेरे गुरु हैं ! उन्हें शीघ्र लेकर आईए । उनपर बहुत बडा अन्याय हो रहा है !

तुलसीकी माला बनानेका केंद्र देखकर हिंदूद्वेषियोंके द्वारा ही हिंदुओंको संतसेवासे वंचित करनेको हिंदुद्वेषियोंके षडयंत्रका भान प्रकर्षरूपसे हुृआ !

यहांकी तुलसीका माला बनानेके केंद्रमें खेतसे लाई गई तुलसीकी डंडीसे ५-६ साधक तुलसीकी माला बनानेकी सेवा अत्यंत मनःपूर्वक कर रहे थे । पास ही यंत्रपर प.पू. बापूका सत्संग आरंभ था । पिछलेी अनेक वर्षोंसे वे यह सेवा अविरतरूपसे कर रहे हैं । वह दृश्य देखकर यह ध्यानमें आया कि, प्रसारमाध्यमोंको एवं विदेशी षडयंत्रकारोंको यहींी अच्छा नहीं लगता ! हिंदुओंको संतसेवासे वंचित कर हिंदू धर्मसे उन्हें दूर करना, यही ही उनका उद्देश्य है !

गोशालामें भावपूर्ण सेवा करनेवाले साधक देखकर
प्रसारमाध्यमोंद्वारा की गई अपकीर्तिके विषयमें मन प्रक्षुब्ध होना !

यहांकी गोशालामें सर्व गौएं गीर जातिकी गौएं हैं । २०० से अधिक गोमाताएं यहां हैं । आश्रममें निरंतर हवन भी होता है । आश्रमका अधिकांश हिस्सा गौके गोबरसे लिंीपा जाता है । गोशालाके साधक अत्यंत भावपूर्ण शब्दोेंमें इस गोशालाकी जानकारी दे रहे थे । उनका भाव एवं लगन देखकर मेरेी ही आंखें भर आईर्इं, साथ ही अंतरमनमें प्रसारमाध्यमं तथा झूठे व्यवहार करनेवाले राजनेताओंद्वारा आश्रमकी की जानेवाली अपकीर्ति करनेके विषयमें अंतरंगमें तीव्र संताप उत्पन्न हुआ !

प.पू. बापूका सर्व कक्षोंमें जाकर यदि कहीं भी अनुचित बातें दिखाई दी, तो डांटना, अहंका भान कर देना तथा निरंतर चुकाएंचूकें करनेपर आश्रमसे निकाल देना !

सर्व साधक बता रहे थे कि, प.पू. बापू आस्थापूर्वक इन सर्व कक्षोंको आस्थापूर्वक भेंटभ्रमण देकरते हैं ! कहीं भी बेशिस्तअनुशासनहीन आचरण दिखायाी देतानेपर है, तो उन्हें बहुत डांटते हैं !
साधकोंके अहंकारमें वृद्धि होनेसे प.पू. बापू यदि साधकोंके अहंकारमें वृद्धि हुई, तो तुरंत उसका भान कर देते हैं । साधकको ८ से १० बार चूक सुधारनेका अवसर देते हैं । जिस समय साधक बात नहीं सुनते अथवा अनुचित व्यवहार, धनका अनुचित उपयोग, महिलाओंके साथ अशिष्ट व्यवहार आदि चुचूकोंएं करते हैं, उस समय उन्हें आश्रमसे निकाला जाता है ।

आश्रमके साधकोंकी विशेषताएं

अ. आश्रममें एक भी साधक वेतन लेनेवाला नौकर नहीं ।
आ. साधक कहीं भी समय व्यतिीत नहीं करते, निरंतर सेवारत रहते हैं ।

इ. १३-१४ वर्षके साधकने पिछले १ वर्षसे मौनका पालन किया है । उसकी इतनी छोटी आयुमें भी उसकी साधनाकी लगन देखकर मुझे भी प्रेरणा प्राप्त हुई !

ई. वहांसे निकलते समय श्री. नरेशभाईने पूछा कि, क्या हमसे कुछ चुचूक हुई हैं ? यदि हमसे कुछ चुचूक हुई हैंहै, तो हम क्षमा मांगते हैं !

उ. श्री. अजय पाटिल, सर्वश्री अशोकभाई, राजेंद्रभाई येह सर्व लगनसे, विनम्रतासे दिनरात सेवा कर रहे हैं तथा सर्व संतोंको इकट्ठा करनेका प्रयास कर रहे हैं ।

ए. एअयर इंडियाके निवृत्त जेनरल मैॅनेजर, सेनादलके मेजर स्तरके अधिकारी, आधुनिक वैद्य, अधिवक्ताएं, इस्त्र्रोसे नौकरी छोडकर धर्मकार्य करनेवाले पूर्णकालीन युवक, इस प्रकारके अनेक मान्यवर विभिन्न सेवाओंमें कार्यरत थे ।

ऐ. पूरे आश्रमका दर्शन करते समय अनेक साधक मेरे साथ थे । सभी साधकोंका व्यवहार अत्यंत प्रेमपूवर्णक था । क्या चाहिए- क्या नहीं इसके बारेंविषयमें पूछताछ करते थे । स्वार्थसे भरे इस विश्वमें प.पू. बापूने ऐसे साधक निर्माणसिद्ध किए हैं, इसीमेंसे ही प.पू. बापूकाी श्रेष्ठतव सिद्ध होताी है । यदि प्रसारमाध्यमोंने कितना भी विषवमन किया, तो भी वे गुरु-शिष्य संबंध तोड नहीं सकते, यह बात इन साधकोंके आचरणद्वारा प्रतीत हो रही थी !

प.पू. बापूकी सीख !

अ. सभी साधकोंका कहना हैंहै कि, एक रुपया भी व्यर्थ जाना नहीं चाहिए, यह प.पू. बापूकी सीख है ।

आ. प.पू. बापू जब आश्रममें आते हैं, उस समय वे सर्व कक्षमें आस्थापूर्वक जाते हैं । यहांके साधकोंने इस विषयकेपर अनेक सूत्रं यहांके साधकोंने बताए । इस बातसे यह बात सीखनेको प्राप्त हुईमिला कि, गुरु अपने शिष्योंको किस प्रकार सिद्ध करते हैं !

इ. वे किसीको भी स्पर्श नहीं करते ।

ई. वे किसीको भी चरणोंको स्पर्श कर नमस्कार करने नहीं देते ।

उ. वे स्पंदनोंके विषयमें सतर्क रहते हैं ।
  यह आश्रम देखकर अत्यंत आनंद हुआ । ३०० से अधिक साधक इस स्थानपर पिछले कुछ वर्षोंसे अविरत सेवा कर रहे हैं । उनकी सेवासे उन्हें वंचित करनेके लिए विदेशी हाथ आगे बढे हैं । हिंदू धर्मको नष्ट करनेका यह एक अांंतरराष्ट्रीय षडयंत्र है । अब वास्तवमें हिंदू समाजकी परीक्षा है ! समाजनेको संतोंपर विश्वास करना या प्रसारमाध्यमोंपर; यह निश्चित करनेका समय आ गया है ! यह अधिकई बार सुना है कि, सुपारी लेकर हत्या की जाती है; सुपारी लेकर संप्रदाय समाप्त किया जाता है, इसका अनुभव करनेका अवसर निकटसे प्राप्त हो रहा है ! स्वयंको इस घटनासे अलिप्त रखनेवालीे बलशाली हिंदूनिष्ठ संगठनाएं, दल, संप्रदाय केवल इतना ही ध्यानमें रखें कि, प.पू. आसारामबापू चक्कीमें हैं तथा हम सुपलीमें हैं !

प.पू. बापू जिस स्थानपर बैठकर साधना कर रहे थे, वहां अनेक लारियां (ट्रक) रक्षा प्राप्त होना !

आश्रममें प.पू. बापूने जिस वटवृक्षके नीचे बैठकर साधना की, उस वटवृक्षका दर्शन किया । वहां निर्माणकार्य करते समय खुदाई की, उस समय अनेक लारियां रक्षा बाहर निकली गई ! इतिहासका अभ्यास करनेके पश्चात् यह बात ध्यानमें आई कि, उस स्थानपर जाबल्यऋषिने तपश्चर्यातपस्या एवं यज्ञ किया था !

प.पू. बापूने बताया है; इसलिए हम शांत हैं, अन्यथा प्रणालोंको हम रणचंडिकाका अवतार दिखाएंगे ! – साधिकाओंद्वारा उत्स्फूर्त प्रतिक्रिया

आश्रमसे लगभग ५०० मीटरकी दूरीपर महिला साधिकाओंका निवासस्थान है । उस स्थानपर जाकर वहां निवास करनेवाली महिलाओंके साथ संवाद करनेकी व्यवस्था की गई थी । वहांका अनुभव विशेषरूपसे यहां नमूदप्रस्तुत कर रहा हूं । वहां निवास करनेवाली महिलओंको बहन कहकर संबोधिात किया जाता है । उनके आश्रमको ‘अनसूया आश्रम’ संबोधाकहते जाता हैहैं । उन्हें मिलनेके पश्चात् वेह सभी रणरागिणनी हैं, यह बात ध्यानमें आई । येह सभी साधिकाएं भगिनी प्रसारमाध्यमोंपर तीव्र प्रक्षोभित हुई थीीं ।
  उन्होंने अपनी भावना व्यक्त करते समय बताया कि, प्रसारमाध्यमोंने आश्रमकी सािित्त्वकता एवं अनुशासनका अनादर प्रसारमाध्यमोंने किया है । प.पू. बापू हमें संयमसे रहनेके लिए कह रहे हैं; इसलिए हम शांत हैं । अन्यथा एके-एक प्रणालको हम हमाराअपना रणचंडिकाका अवतार दिखाई देते !

टाइम्स नाऊ नामक विख्यात समाचारप्रणालके माध्यमसे प.पू. आसारामबापूपर कीचड उछाला गया, उस समय उनमें सुधार लाने हेतु विवश करनेवाले सनातन संस्थाके तत्कालीन प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक !

  ३१.८.२०१३ को टाइम्स नाऊ इस प्रणालके सुप्रसिद्ध समाचारनिवेदक अर्णव गोस्वामी प.पू. आसारामबापूके संदर्भमें हुई बातचीतमें सूत्रसंचालन कर रहे थे । उस समय बातोंके बीचमेंमध्य निरंतर वे प.पू. आसारामबापूका उल्लेख वे निरंतर रेपिस्ट(बलात्कारी)आसाराम इस प्रकार कर रहे थे । उस समय श्री. अभय वर्तकने उन्हें बताया कि, आरोप सिद्ध न होनेके कारण आप इस प्रकार अनादरयुक्त उल्लेख न करें । इसपर उन्होंने त्वरित ही अ‍ॅक्युझ्एक्युज्ड (आरोपी) आसाराम, ऐसा उल्लेख कर अपनी चूकमें सुधार किया ।
  वर्तमानमें टाइम्स नाऊ, यह प्रथम क्रमांकका अंग्रेजी समाचारप्रणाल है । टाइम्स नाऊका टी.आर्.पी. (Television Rating Point) १२९ प्रतिशत, हेडलाईन्स टुडेका २९ प्रतिशत, सी.एन.एन्.का २६ प्रतिशत तथा एन्.डी.टीवीका २३ प्रतिशत है, यह उनके ही विज्ञापनमें प्रसारित किया जाता है । चारों प्रणालोंमें टी.आर्.पी. तिगुनावाले होनेवाले इस प्रणालके माध्यमसे श्री. वर्तकने करोडों लोगोेंके सामने संतोंकी की जानेवाली बदमानी श्री. वर्तकने करोडो लोगोेंके सामने सुधार करनेके लिए विवश किया । – श्रीमती शशिकला पै, पनवेल, रायगढ । (एक सुप्रसिद्ध प्रणालके समाचार निवेदकको चूक सुधार करनेके लिए विवश करनेवाले तत्त्वनिष्ठ श्री. अभय वर्तकका अभिनंदन ! उनके समान साधक ही सनातनकी वास्तविक शक्ति हैं । – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

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