राष्ट्रध्वजका अवमान रोकें !

हिंदू जनजागृति समितिद्वारा निवेदन प्रस्तुत किए जानेपर राष्ट्रध्वजका अपमान रोकनेके लिए महाराष्ट्र राज्यशासनद्वारा परिपत्र जारी !

मुंबई – प्रतिवर्ष २६ जनवरी और १५ अगस्तको कागज तथा प्लास्टिकके राष्ट्रध्वजोंका उपयोग किया जाता है; किंतु इसके उपरांत वह राष्ट्रध्वज सडकोंपर और नालोंमें पडे दिखाई देते हैं । इस प्रकार राष्ट्रध्वजका अपमान होता है । इसके विरुद्ध हिंदू जनजागृति समितिकी ओरसे शासनको प्रस्तुत किए गए निवेदनके कारण अंतत: शासनने राष्ट्रध्वजका सम्मान बनाए रखने हेतु परिपत्र जारी किया । (किसीसे निवेदन प्राप्त होनेके उपरांत परिपत्र जारी करनेवाला शासन ! जो हिंदू जनजागृति समितिको दिखाई देता है, वह शासनतंत्रको क्यों नहीं दिखाई देता ? ऐसा राष्ट्रीय अस्मिताहीन शासन प्रदान करनेवाला निरर्थक लोकतंत्र नहीं चाहिए ! – संपादक) हिंदू जनजागृति समिति पिछले पांच वर्षोंसे शासनको राष्ट्रध्वजका अपमान रोकनेके लिए समय-समयपर निवेदन दे रही है । (पांच वर्ष निवेदन देनेके उपरांत कार्यवाही करनेवाला सुस्त शासन ! – संपादक) इस बार समितिकी ओरसे मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, विधानसभा और विधान परिषदके विपक्षी नेता, विधानसभाके अध्यक्ष तथा विधान परिषदके सभापति तथा महाराष्ट्रके कुछ जिलोंके अधिकारियोंसे शिकायत कर इस प्रथापर प्रतिबंध लगाने हेतु निवेदन प्रस्तुत किया गया था ।

इसपर महाराष्ट्र शासनके सामान्य प्रशासन विभागने ‘राष्ट्रप्रतिष्ठा अपमान प्रतिबंध कानून १९७१ के प्रबंधानुसार गृहविभागकी ओरसे राष्ट्रध्वजका अपमान करनेवालोंपर कार्यवाही की जाती है’, ऐसा २२ अगस्तको जारी किए गए परिपत्रकी एक प्रति अॅड्. निलिमा वैद्य तथा अन्य वकीलोंको भेजे गए उत्तरके साथ जोडी गई ।

देशभक्तिपर कर्मकांड की अपेक्षा धार्मिक कर्मकांड अधिक श्रेष्ठ !

स्वतंत्रता दिवस अथवा गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वोंकी पूर्वसंध्यापर तथा उस दिन भाषण देने, झंडावंदन करने, सार्वजनिक स्थानोंपर देशभक्तिपर गीत लगाने जैसी बातें कर्मकांड करनेके समान सर्वत्र दिखाई देती हैं । इसके उपरांत अगले वर्ष वह दिन आनेतक पुन: इनका नाम भी नहीं लिया जाता । अनेक वर्षोंसे देशवासी यही कर रहे हैं, इससे उनमें देशभक्तिका पोषण होता हुआ नहीं दिखाई दिया । धार्मिक कर्मकांड करनेवाले हिंदुओंपर कुछ लोग हंसते हैं अथवा उनकी ओर उपहासात्मक दृष्टिसे देखते हैं; परंतु नित्य धार्मिक कर्मकांड करनेवाले कमसे कम कुछ मात्रामें तो ईश्वरके निकट जाते हैं । ऐसा कौनसा लाभ वर्षमें एक बार यह देशभक्तिपर कर्मकांड करनेवालोंको हुआ है?

स्वतंत्रताके ६० वर्ष उपरांत भी आतंककी छायामें गणतंत्रदिवस मनानेवाला लज्जास्पद भारत !

देशके राष्ट्रीय त्यौहार आते ही आतंकियोंसे धमकियां मिलनेके समाचार प्रकाशित होते हैं । राजधानी एवं राज्योंमें कार्यक्रम उद्ध्वस्त करने और रक्तपात करनेकी धमकियां मिलने लगती हैं । ऐसेमें कडी सुरक्षा-व्यवस्था हेतु देशके करोडों रुपयोंका व्यय तो होता ही है, साथ ही जनतामें तनाव और भय बना रहता है । उत्तर-पूर्वी भारत एवं कश्मीर जैसे भागोंमें आतंकवादियोंके हाथ सफलता ही लगती हैं । ऐसेमें राष्ट्रीय त्यौहार मनानेका आनंद जनताको कैसे मिलेगा ?

देश जिस दिन गणतंत्र बना, वह तिथि ‘माघ शुक्ल अष्टमी’ थी ! अंग्रेजोंके अंधानुकरणके कारण यह दिन ईसाई कालगणनाके अनुसार २६ जनवरीको मनाया जाता है ।

राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु सनातन संस्था एवं हिंदु जनजागृति समितिद्वारा किए गए प्रयास

२६ जनवरी, गणतंत्र दिवसपर बडी मात्रामें प्रयोग किए जानेवाले प्लास्टिकके राष्ट्रध्वज कुछ समय उपरांत कूडे-कचरेमें फेंक दिए जाते हैं तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिकोंको ये सब देखना पडता  है । इसप्रकार राष्ट्रध्वजका अपमान न हो इस हेतु उत्तर भारतमें सनातन संस्था तथा हिंदु जनजागृति समिति तथा अन्य धर्माभिमानियोंद्वारा संयुक्तरूपसे चलाए गए अभियानके मुख्य अंश प्रस्तुत हैं ।

राष्ट्रध्वजका हो रहा अपमान रोकने हेतु जिलाधिकारीद्वारा अध्यादेश जारी

  • १. वाराणसीमें २६ जनवरीके दिन राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु मा. जिलाधिकारी श्री. अजयकुमार उपाध्यायजी को हिंदु जनजागृति समितिद्वारा ज्ञापन दिया गया । इस निवेदनपर मा. जिलाधिकारीने पत्रमें वर्णित तथ्योंके अनुसार अपने काउंटरपार्ट पुलिस क्षेत्राधिकारीके साथ क्षेत्रोंका भ्रमण कर नियमानुसार कार्यवाही करने हेतु नगर मॅजिस्ट्रेट-वाराणसी, अपर नगर मॅजिस्ट्रेट (प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ), पुलिस अधीक्षक नगर वाराणसी को आदेश पत्र जारी किया । वाराणसी के महापौर मा. श्री कौशलचंद्र सिंहजी को भी ज्ञापनकी एक प्रति दी गई । ज्ञापनकी प्रतिलिपि मा. राष्ट्रपति महोदय-भारत सरकार, मा. राज्यपाल, मा. मण्डल आयुक्त तथा मा. मुख्य सचिवको डाक द्वारा भेजी गई ।

  • २. ज्ञानपुरमें हिंदु जनजागृति समितिके श्री. राजन त्रिपाठी, भाजपाके जिला उपाध्यक्ष श्री. विकास नारायण सिंह, ज्ञानपुर डिस्ट्रीक्ट बार असोसिएशनके पूर्व महासचिव श्री. धीरज शुक्ला एवं पूर्व संयुक्त मंत्री श्री.बी.के. सिंह आदिने जिलाधिकारी महोदयको गणतंत्र दिवसपर प्लास्टिकके झंडे, बिल्ले तथा स्टिकरकी बिक्रीपर रोक लगाकर राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु ज्ञापन दिया । इसपर जिलाधिकारीने पूरे जनपदमें प्लास्टिकके ध्वजके विक्रयपर रोक लगाने तथा प्लास्टिक राष्ट्रध्वज विक्रय करते हुए दिखनेपर तुरंत जप्त करनेके आदेश दिए ।

विद्यालयोंमें चलाए गए अभियान

  • १. फरीदाबादमें लगभग ४० विद्यालयोंके प्रधानाचार्यको राष्ट्रध्वजके प्रयोगसे संबंधित ज्ञापन सौंपा गया । साथ ही राष्ट्रध्वजके उचित प्रयोगसे संबधित नाटिका, राष्ट्रपुरुषों एवं राष्ट्रभक्तिपर आधारित प्रश्नमंजुषा, गणतंत्र दिवसको केवल एक अवकाशके रूपमें नहींr मनाकर उसे राष्ट्रभक्तोंसे प्रेरणा लेनेवाले दिवसके रूपमें मनाना, भारतपर मंडरा रहे देशी एवं विदेशी संकटोंसे संबंधित अनेक विद्यालयोंमें प्रवचनका आयोजन भी किया गया ।

  • २. राजस्थान, जयपुरके १२ विद्यालयोंमें हिंदु जनजागृति समितिके कार्यकर्ताओंद्वारा राष्ट्रध्वजका अपमान रोकनेकी मांग की गई ।

  • ३. वाराणसी के ६७ विद्यालयोंके प्रधानाध्यापकोंने त्वरित अपने विद्यालयमें प्लास्टिकके राष्ट्रध्वज का उपयोग न करने के निर्देश  दिए । इस कार्यक्रम मे लगभग १५००० विद्यार्थी तथा ५०० शिक्षक सहभागी हुए ।

  • ४. भदोहीके ९ शिक्षण संस्थाओंमे राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु प्रबोधन किया गया ।

विशेष : फरीदाबादमें सनातनके साधक जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती काननबाला गोयल तथा उप जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती रेखाजीसे मिले । उन्होंने फरीदाबाद जिलेमें होनेवाले कार्यक्रमके अभ्यासके समय उपस्थित लगभग ५०० विद्यार्थियोंका प्रबोधन करनेका अवसर भी दिया ।

वाराणसीमें विभिन्न स्थानोंपर किए गए प्रयास

  • १. विद्यालय-महाविद्यालय, कालोनियों, व्यवसायी समितियां तथा रिक्शाचालकोंने बडी मात्रामें कागजके राष्ट्रध्वजको बंदनवारकी तरह सडकके किनारे एवं अन्य प्रकारसे सजावट की थी । इससे राष्ट्रध्वजका अपमान होनेके विषयमें समितिद्वारा बतानेपर नागरिकोंने त्वरित हटाया एवं भविष्यमें ऐसा न करनेका आश्वासन भी दिया ।

  • २. जगतगंजकी व्यवसायी समितिद्वारा चित्रपट गीतोंकी तरह राष्ट्रगानको लाउडस्पीकरपर बजाए जानेपर उनका उद्बोधन किया गया, जिससे उन्होंने वह बंद किया ।

  • ३. कुछ स्थानोंपर झुके हुए राष्ट्रध्वज दिखाई दिए, उद्बोधन करनेके पश्चात वे ठीक ढंगसे लगाए गए । वाहनोंपर लगे फटे हुए राष्ट्रध्वज दिखाई दिए जानेपर उन्हें बताने पर वे हटा दिए गए ।

उपक्रममें सहभाग

  • १. शिवसेना वाराणसी के जिलाध्यक्ष श्री. गुलशन कपूर द्वारा वाराणसीके अनेक स्थानोंपर राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु होर्डिंग लगाए गए ।

  • २. वाराणसीमें श्री. संजय ओझा दूरदर्शन वाहिनी डेन काशीद्वारा इस उपक्रमके संबंधित चक्रिकाका प्रसारण किया ।

  • ३. २५.०१.१० को रेडियो वाराणसीद्वारा चक्रिकाका पुनः-पुनः प्रसारण किया गया ।

  • ४. व्यवसायी श्री. गौरव दवे एवं स्वामी नारायण मंदिरके प्रबंधक श्री. कन्नु भगत द्वारा क्रमश: ५००० और १००० पत्रक छपवाकर सहयोग दिया ।

  • ५. जयपुरके मैरी लैंड स्कूलके प्रधानाचार्यने धर्मफलक ग्रंथ लिया तथा प्रत्येक शनिवारको विद्यालयमें प्रार्थनासभामें १० मिनट बच्चोंको नैतिक मूल्योंके बारेमें बतानेके लिए कहा ।

क्षणचित्र

  • १.  एक मुसलमान दुकानदारको पत्रक देने पर उसने पत्रक मरोडकर फेंक दिया ।

  • २. भदोहीमें एक व्यक्तिने पत्रक पढनेके उपरांत कहा कि हिंदु जनजागृति समितिके स्थानपर राष्ट्रजागृति समिति होना चाहिए, हिंदु शब्द राष्ट्रको दुर्बल बना रहा है ।

  • ३. वाराणसीमें कुछ दुकानोंमें प्लास्टिकके राष्ट्रध्वजका विक्रय रोकनेके लिए जानेपर दुकानदारोंने क्षमा मांगकर विक्रय तुरंत बंद कर दिया ।  उन्होंने बताया कि रेडियो तथा दूरचित्रवाहिनीद्वारा किए गए उद्बोधनके कारण इसबार विक्रय अत्यंत अल्प हो रहा है ।

भारतीयों, राष्ट्रध्वजका यह अपमान हम अब और कबतक सहते रहेंगे ?

  • १. दिसंबर २००७ में ऑस्ट्रेलिया-भारत क्रिकेट सामनाके समय एक ऑस्ट्रेलियाके प्रेक्षकने आकस्मिक ही मैदानपर विवस्त्र आकर भारतके झंडेको शरीरपर लपेटकर इस प्रकारसे अपमान किया !

  • २. ५ फरवरी २००३ की संध्यापर कराचीमें कश्मीरदिन मनाते समय पाकिस्तानियोंने भारतके झंडेका अपमान किया ! सानिया मिर्जा जैसी राष्ट्रीय खिलाडियोंमें राष्ट्रध्वजका सम्मान न होना, यह दुर्भाग्यपूर्ण है !

राष्ट्ररक्षणके लिए धर्मरक्षण एवं धर्मप्रसार आवश्यक !

स्वातंत्र्योत्तर कालमें निधर्मी तत्त्वके कारण  भारतमें बहुसंख्यक हिंदु होते हुए भी उन्हें पाठशाला तथा महाविद्यालयोंमें धर्मपालनके विषयमें कुछ नहीं सिखाया जाता । राज्यकर्ता धर्मभ्रष्ट एवं नीतिहीन होनेके कारण प्रजा भी धर्मके प्रति उदासीन हो है । इस कारण आज भारतकी दुर्दशा हो गई है । राष्ट्र जीवित रहेगा, तो समाज जीवित रहेगा तथा समाज जीवित रहेगा तब ही हम जीवित रह पाएंगे । समाजमें आई धर्मग्लानि राष्ट्ररक्षणके लिए दूर करनी ही होगी । जहां संपूर्ण समाज सामूहिक उपासना करता है, वहां समाजमें आत्मविश्वास दृढ होता है तथा राष्ट्रका उत्कर्ष होता है; इसलिए राष्ट्रके लिए अनुकूल श्रद्धाका प्रचार-प्रसार करना आवश्यक है ।

देशभक्तिगीत सदैव लगाएं !

शहरकी नगरपालिका अथवा गांवकी ग्रामपंचायतें स्वतंत्रता दिवस अथवा गणतंत्र दिवस इत्यादि राष्ट्रीय त्यौहार निकट आनेपर कर्मकांड करने समान देशभक्तियुक्त गीतोंकी  ध्वनिचक्रिका (कॅसेट) लगाते हैं । वास्तवमें साधनाद्वारा जिस प्रकार हम सदैव ईश्वरके संधानमें रहते हैं, उसी प्रकार राष्ट्रके विषयमें भी प्रेम सतत जागृत रखना आवश्यक है । इसके लिए देश अथवा राज्यके प्रति गर्व तथा भक्ति जागृत करनेवाले गीत केवल राष्ट्रीय पर्वके समय लगानेकी अपेक्षा वर्षभर लगाने चाहिए ।

राष्ट्रके लिए सर्वस्वका त्याग करनेके लिए कितने लोग सिद्ध हैं ?

‘राष्ट्रका मान, गौरव एवं उत्कर्ष इत्यादिके लिए प्राणार्पण हेतु सिद्ध होना, यह प्रत्येकका कर्तव्य है ऐसा प्रतीत होना’ इसे ही राष्ट्रभक्ति कह सकते हैं । भारतमें जन्मे तथा यहीं पदवी प्राप्त किए हुए अनेक लोग अर्थार्जनके लिए विदेश जानेका मार्ग अपनाते हैं । राष्ट्रके लिए सर्वस्वका त्याग करनेके लिए ऐसे कितने भारतीय आज सिद्ध हैं ? कितने लोग भारतकी सेनामें प्रवेश हेतु उत्सुक हैं ? राष्ट्रभक्तिका अर्थ समझनेके लिए देशके लिए प्राणोंका त्याग करनेवाले महान वीरोंका स्मरण करनेका समय आ गया है ।

‘हिंदुराष्ट्र’ अर्थात ‘सुराज्य’के लिए इतना तो करें !

  • १.  स्वयंकी पहचान ‘हिंदु’के रूपमें ही करवाएं !

  • २. अंग्रेजी भाषाकी लत (आदत) छोडकर प्रत्येक स्थानपर अधिकाधिक स्वभाषा एवं राष्ट्रभाषा हिंदीका ही प्रयोग करें ।

  • ३. धर्म ही राष्ट्रका प्राण है एवं हिंदुराष्ट्रकी आत्मा सनातन हिंदु धर्म है । जहां धर्मका अपमान होता है, उसका तीव्र विरोध करें ।

  • ४. धर्मरक्षणसे ही राष्ट्ररक्षण संभव है । इसलिए स्वसंरक्षण प्रशिक्षण लें !

  • ५.  प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा राष्ट्रके लिए दें । यदि समझमें न आए कि, क्या करना चाहिए, तो सनातनसे संपर्क करें ।

  • ६. ईश्वरकी कृपा प्राप्त करने हेतु योग्य साधना करें । योग्य साधना जानने हेतु सनातन संस्थाके सत्संगसे संपर्क करें ।

राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु ‘हिंदु जनजागृति समिति’ एवं राष्ट्रप्रेमी संगठनोंद्वारा अभियान

शासकीय अधिकारियोंको ज्ञापन   
हस्तपत्रक बांटनेके माध्यमसे उद्बोधन
विद्यालयोंमें चलाया अभियान    
उद्बोधक नाटिकाका आयोजन
गिरे हुए राष्ट्रध्वज हेतु बक्सोंका आयोजन   

अभियानकी क्षणिकाएं

१५ अगस्तके निमित्त संपूर्ण देशमें प्लास्टिक ध्वज वितरित करना, ध्वजकी पताकाएं बनाकर लगाना, मुखमंडल अथवा वस्त्रोंपर राष्ट्रध्वज रंगवाना इत्यादिद्वारा राष्ट्रध्वजका अपमान किया जाता है । स्वतंत्रता दिवसके दूसरे दिन राष्ट्रके प्रतीक रास्तेभरमें बिखरे दिखाई देते हैं । केंद्रशासनकी ओरसे राष्ट्रध्वजका अपमान न हो, इसके स्पष्ट आदेश हैं; परंतु कहीं भी उसका अनुपालन होते हुए दिखाई नहीं देता । राष्ट्रध्वजका सम्मान बनाए रखने हेतु हिंदु जनजागृति समितिद्वारा सनातन संस्था एवं अन्य राष्ट्रप्रेमी संस्थाओंके सहयोगसे राष्ट्रध्वजका अपमान रोके यह  उपक्रम प्रतिवर्ष समान पूरे देशभरमें चलाया गया । प्रस्तुत है उत्तर भारतमें चलाए अभियानकी कुछ झलकियां…

शासकीय अधिकारियोंको ज्ञापन

  • १. वाराणसीमें हिंदु जनजागृति समितिद्वारा ४ अगस्त २०१० को वाराणसीके न्यायदंडाधिकारीके कार्यालय (अपर नगर मैजिस्ट्रेट) चतुर्थ कार्यालयमें १५ अगस्तके निमित्त राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु ज्ञापन दिया गया । समितिके इस ज्ञापनको पढकर न्यायदंडाधिकारी  श्री. सभाजित तिवारीने समितिके कार्यसे सहमति दर्शाई और जिलाधिकारी कार्यालयमें इस निवेदनपत्रको प्रस्तुत करनेका आश्वासन दिया ।

  • २. जमशेदपुरमें हिंदु जनजागृति समिति एवं अन्य संगठनोंके १७ लोगोंके शिष्टमंडलद्वारा पूर्व सिंहभूम प्रभागके उपायुक्त श्री. विजय कुमारजीको ८ अगस्त २०१० को निवेदन दिया गया ।

  • ३. राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु फरीदाबादके उपायुक्त डॉ. प्रवीण कुमारजीको हिंदु जनजागृति समितिके फरीदाबाद प्रभारी श्री. सुरेश मुंजाल, विश्व हिंदु परिषदके श्री. वैषाखीराम सिंगलाजी तथा हिंदु जनजागृति समितिके अन्य कार्यकर्ताओंने मिलकर ज्ञापन दिया ।

(इसके अतिरिक्त महाराष्ट्रमें कुडाल, मालवण, वेंगुर्ले (सिंधुदूर्ग), गोवामें पणजी आदी स्थानोंपर भी ज्ञापन दिया गया ।)

ज्ञापनके माध्यमसे उपायुक्तजीके समक्ष रखी मांगें

  • १. प्लास्टिकके बने ध्वजोंका उत्पाद तथा प्रयोग बंद हो ।

  • २. बच्चे ध्वजका उपयोग खिलोने जैसे न करें ।

  • ३. राष्ट्रध्वजको अपने मुखपर तथा वस्त्रोंपर बनाकर उसका अनादर न करें ।

  • ४. राष्ट्रीय ध्वजका मान रखें ।

हस्तपत्रक बांटनेके माध्यमसे उद्बोधन

  • १. धनबादके रणधीर वर्मा चौक और उपायुक्त आवास एवं राजकीय वाचनालयमें ५०० पत्रक बांटे गए । इसीके साथ २००० से अधिक लोगोंका उद्बोधन किया गया ।

  • २. कतरासमें भी अखंड भारत कार्यक्रमके अंतर्गत  राष्ट्रध्वजकी अवमानना रोकने हेतु पत्रक बांटे गए ।

विद्यालयोंमें चलाया अभियान

  • १.  मथुराके पांच विद्यालयोंमें राष्ट्रध्वजके सम्मान हेतु आवेदनपत्र देकर उद्बोधन किया गया ।

  • २. धनबादके २ विद्यालयोंके १,३०० विद्यार्थी तथा ४० शिक्षकोंका उद्बोधन किया गया ।

  • ३. कतरास (झारखंड)के ‘श्यामडीह सरस्वती शिशु मंदिर’ विद्यालयमें २०० पत्रकोंका वितरण और १४०० विद्यार्थियोंको इस विषयसे अवगत कराया गया ।

  • ४. जमशेदपुरके १२ विद्यालयोंके एवं २ महाविद्यालयोंके ६ सहस्त्रोंसे अधिक विद्यार्थियोंका राष्ट्रध्वजका सम्मान बनाए रखने हेतु उद्बोधन किया गया । जिसमें प्लास्टिक ध्वजका उपयोग न करना, किसी भी प्रकारसे राष्ट्रध्वजका अपमान न हो इसपर ध्यान देना, अन्योंको भी राष्ट्रध्वजका अपमान रोकने हेतु जागृत करना आदि बातें बताई गर्इं ।

  • ५. सनातन संस्थाकी श्रीमती शुभ्रा बैनर्जी एवं श्रीमती शुभ्रा भार्गवजीने जयपुरके छ: विद्यालयोंमें जाकर राष्ट्रध्वजके सम्मान हेतु आवेदनपत्र देकर उद्बोधन किया ।

  • ६. फरीदाबाद जनपदमें सेक्टर क्षेत्रमें आईशर पब्लिक स्कूलकी ८वीं, ९वीं एवं १०वीं कक्षाके विद्यार्थियोंके लिए श्री. सुरेश मुंजालजीने राष्ट्रीय ध्वजका सम्मान तथा उसकी विशेषताओंपर धर्मशिक्षा वर्ग लिया । इस कार्यक्रमका लाभ २०० से अधिक विद्यार्थियोंने लिया ।

  • ७. १४ अगस्त २०१० को फरीदाबाद अग्रवाल हाईस्कूलमें विद्यार्थियों और शिक्षकोंके लिए ‘१५ अगस्तका महत्त्व और राष्ट्रध्वजका सम्मान कैसे करें’ इस विषयपर विद्यालयमें श्रीमती वंदना सचदेवाजीने मार्गदर्शन किया । इस मार्गदर्शनका लाभ लगभग १२५ विद्यार्थियोंके साथ १२ शिक्षकोंने लिया ।

  • ८. समस्तीपुर (बिहार)में सिटी सेंट्रल स्कूलमें २५० विद्यार्थियों एवं ५० अभिभावक तथा अध्यापकोंके समक्ष राष्ट्रध्वजके अपमानको रोकनेके लिए उद्बोधन किया ।

  • ९. एर्नाकुलम (केरल)में ३ विद्यालयोंमें प्रवचन लिए गए । लगभग २३०० विद्यार्थियोंने इसका लाभ लिया । २५ विद्यालयोंमें पोस्टर्स लगाए गए ।

उद्बोधक नाटिकाका आयोजन

फरीदाबादके सैक्टर ३० में श्रीराम मॉडल स्कूलमें १५ अगस्तके कार्यक्रममें फरीदाबादके बाल-युवा साधकोंने मिलकर ‘२०१२ का स्वतंत्रता दिवस’ नाटिका प्रस्तुत की । इस नाटिकाके माध्यमसे वर्ष २०१२ में भारतका मुगलिस्तान बन सकता है, इस वास्तविकताकी ओर लोगोंका ध्यान आकर्षित कर, उन्हें राष्ट्र और धर्मके लिए कुछ करने हेतु प्रेरित किया गया । उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकोंने नाटिकाकी सराहना की ।

गिरे हुए राष्ट्रध्वज हेतु बक्सोंका आयोजन

  • १. झारखंड राज्यमें इधर-उधर बिखरे पडे ध्वज एकत्रित करने हेतु चौकमें एक बक्सा रखा गया एवं नागरिकोंसे उसमें ध्वज एकत्रित करनेकी विनती की गई ।

  • २. इंदौरमें राजवाडा एवं रीगल चौराहेपर राष्ट्रध्वज एकत्रित करनेके लिए बक्से रखे थे ।

अभियानकी क्षणिकाएं

  • १. ‘‘हिंदु जनजागृति समिति एवं समविचारी संगठनों और संस्थाओंका यह विशेष उपक्रम है । मेरे पास लोग निजी स्वार्थ हेतु अपनी मांगें लेकर आते हैं । राष्ट्रके लिए अपनी मांग लेकर आनेवाले आप जैसे कोई भी नहीं हैं’’, ऐसी प्रतिक्रिया जमशेदपुरमें पूर्व सिंहभूम प्रभागके उप-उपायुक्त श्री. विजय कुमारजीने हिंदुत्ववादियोंके समक्ष व्यक्त की । उप-उपायुक्त श्री. विजय कुमारजीने शीघ्र ही सर्व पुलिस थाने, प्रशासकीय कार्यालयोंको सूचना भेजनेकी कृति की । ज्ञापन देते समय स्थानीय नियतकालिक एवं वाहिनीके प्रतिनिधियोंकी उपस्थिति उल्लेखनीय थी ।

  • २. धनबादके बिरसा मुंडा पब्लिक स्कूलके ८० विद्यार्थियोंको जब पता चला कि प्लास्टिक ध्वजका उपयोग करना अनुचित हैं तब उन्होंने त्वरित अपने हाथमें लिए हुए ध्वज विद्यालयमें जमा किए ।
  • ३. जयपुरके इंडिया इंटरनेशनल स्कूलके सांस्कृतिक उपक्रम तथा अर्थशास्त्रके अध्यापक श्री. रामेश्वरजी एवं रावत सेकंडरी स्कूलके प्रधानाचार्य श्री. मनोज शर्माजीको सनातन संस्थाका यह उपक्रम अच्छा लगा और उन्होंने संस्थाके साधकोंसे विद्यार्थियोंके लिए नैतिक मूल्योंपर मार्गदर्शन करनेकी मांग की ।

  • ४. मथुराके रामकृष्ण मेमोरियल पब्लिक स्कूलकी प्रधानाचार्य श्रीमती सुनिता यादवजीको संस्थाका कार्य अच्छा लगा तथा उन्होंने अपने विद्यालयमें बालसंस्कार वर्ग आरंभ करनेकी मांग की । इसीके साथ वे मासिक सनातन प्रभातकी सदस्य भी बन गर्इं और उन्होंने संस्थाद्वारा प्रकाशित अध्यात्मशास्त्रीय जानकारी देनेवाले कुछ ग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पाद भी खरीदे । यही नहीं अपितु उन्होंने अपने घरपर भी संस्थाका सत्संग आरंभ करनेके लिए कहा ।

  • ५. एक नागरिकने अपने मुखपर राष्ट्रध्वज गोदा है (टैटू बनाया है), यह समितिके सदस्योंके ध्यानमें आनेपर उन्होंने उस व्यक्तिको समझाया; परंतु उसने सुधार करनेकी अपेक्षा समितिके सदस्योंका उपहास किया । तब सदस्योंने त्वरित उपस्थित जनसमुदायको बताया कि भारतके नागरिक ही राष्ट्रध्वजका अपमान किस प्रकार करते हैं और उससे अन्योंको भी वैसा करनेकी उत्प्रेरणा मिलती है ।

  • ६. समितिके सदस्योंद्वारा समझानेपर एक नागरिकने अपने हाथमें राष्ट्रध्वज जैसी बंधी हुई पट्टी तुरंत उतार दी ।

  • ७. इंदौरमें विगत वर्षोंकी तुलनामें इस वर्ष राष्ट्रध्वजके अपमानमें कमी देखी गई । रीगल चौराहेपर एक भी राष्ट्रध्वज नहीं मिला ।

  • ८. सरस्वती विद्या मंदिर, एर्नाकुलम (केरल)के मुख्याध्यापक श्री. देवन् गोपाल इंटरनेटके माध्यमसे अनेक गुटोंसे संपर्वâमें है । उन्होंने उन गुटोंके सहस्त्रों सदस्योंको मेल भेजकर उनका प्रबोधन किया

राष्ट्रध्वजका अवमान रोकने हेतु हिंदु जनजागृति समितिद्वारा जिलाधिकारियोंको ज्ञापन प्रस्तुत !

२६ जनवरीके उपलक्ष्यमें राष्ट्रध्वजका प्रतिवर्ष हो रहा अपमान रोकने हेतु तथा प्लास्टिकके राष्ट्रध्वजकी बिक्रीपर वैधानिक रोक लगाने हेतु वाराणसीमें हिंदु जनजागृति समितिकी ओरसे प्रभारी जनपद अधिकारी श्री. सहदेवजीको ज्ञापन सौंपा गया । उन्होंने १८ जनवरी २०११ को पुलिस उपमहानिरीक्षक वाराणसीके नाम प्लास्टिकके राष्ट्रध्वज, बिल्ले, स्टिकर आदिकी बिक्रीपर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करनेके लिए लिखित आदेशपत्र जारी किया । श्री. सहदेवजीने कार्यकी सराहना की एवं विषयकी गंभीरता समझते हुए शीघ्र ही आदेश जारी कर, संबंधितोंको कार्यवाहीकी सूचना दी ।

उपरोक्त उपक्रमको दैनिक हिंदुस्थान, आज, कॉम्पैक्ट, आय नेक्स्ट, चेतना विचारधारा,  समाचार ज्योति, स्वतंत्र चेतना, युनाईटेड भारत जैसे दैनिक समाचार पत्रिकाओंने प्रसिद्धी दी है । कुछ धर्माभिमानी हिंदु धर्मप्रसार हेतु हस्तपत्रकोंकी छपाई हेतु प्रयोजक बने हैं ।

ऐसा ही ज्ञापन राजस्थानके पाली जिलाके जिलाधिकारीको भी दिया गया

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