कश्मीरी हिन्दू नरसंहार : आतंकी बिट्टा कराटे का टीवी पर हत्या का कबूलनाला सबूत के तौर पर प्रस्तुत करेगा टिक्कू परिवार

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कश्मीर में हिन्दुओं के खिलाफ नरसंहार का चेहरा रहे बिट्टा कराटे पर अब फंदा कसने जा रहा है। कश्मीरी हिन्दुओं का कसाई कहलाने वाले बिट्टा उर्फ फारूख अहमद डार के खिलाफ सतीश टिक्कू के परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

टिक्कू का परिवार मंगलवार को श्रीनगर न्यायालय में प्रमाण के तौर पर उस टीवी शो का वीडियो पेश करेगा, जिसमें बिट्टा कराटे ने कश्मीरी हिन्दुओं की हत्याएं कबूल की हैं। वीडियो में बिट्टा यह भी कबूल करता दिख रहा है कि, सतीश टिक्कू उसके हाथ से मारे गए पहले कश्मीरी पंडित थे। एडवोकेट उत्सव बैंस के जरिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय साथ में लगाई गई बिट्टा के टीवी कन्फेशन की वीडियो फुटेज और ट्रांसक्रिप्ट पर गौर करेगा।

बिट्टा कराटे मामले की सुनवाई टली, टिक्कू परिवार के वकील को नहीं मिली सुरक्षा, श्रीनगर एयरपोर्ट से लौटे

श्रीनगर की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी पंडित सतीश टिक्कू की हत्या में पूर्व आतंकवादी फारूक अहमद डार उर्फ ​​बिट्टा कराटे के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। याचिका स्थगित करने की वजह याचिकाकर्ता के वकील को श्रीनगर एयरपोर्ट से अदालत तक लाने के लिए सुरक्षा प्रदान न करना है। स्वर्गीय सतीश टिक्कू के परिवार की ओर से यह केस लड़ रहे वकील उत्सव बैंस ने आरोप लगाया कि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की। लिहाजा वह श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से वापस दिल्ली लौट गए।

टिक्कू परिवार की ओर से याचिका दायर करने वाले वकील उत्सव बैंस को श्रीनगर में सुरक्षा मुहैया करने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है। वकील ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया। जब वह श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुंचे और अदालत जाने के लिए तैयार थे, उन्हें वहां से आगे ले जाने के लिए सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया था। दुर्भाग्य से आज सुबह 9 बजे श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद उन्हें दिल्ली वापस लौटना पड़ा। उन्होंने पत्र के माध्यम से अदालत से प्रार्थना की कि वह आज की सुनवाई को स्थगित करें।


26 मार्च

31 साल बाद आतंकी बिट्टा कराटे के खिलाफ खुलेगा केस, श्रीनगर न्यायालय में याचिका प्रविष्ट

क्या मिल पाएगा कश्मीरी हिन्दुओं को न्याय ?

जम्मू कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं एवं अन्य लोगों की हत्या का आरोपी आतंकी बिट्टा कराटे के खिलाफ फिर से केस खुल सकते हैं। बुधवार को बिट्टा के खिलाफ केस खोले जाने की मांग को लेकर लगाई गई एक याचिका पर श्रीनगर के एक न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायालय ने याचिकाकर्ता पीडित सतीश टिक्कू के परिवार को याचिका की हार्ड कॉपी दाखिल करने के लिए कहा। मामले में 16 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।

बिट्टा कराटे खूंखार आतंकी रहा है। कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार में शामिल रहे इस आतंकी का असली नाम फारूक अहमद डार है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म में आतंकी बिट्टा की हैवानियत और लोगों को भडकाने वाला इंटरव्यू दिखाया गया है। उसने इंटरव्यू में बेखौफ होकर कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की बात कबूली है। वह बताता है कि उसने करीब 20 लोगों को मौत के घाट उतारा। इसमें कश्मीर पंडित शामिल हैं। वह बताता है कि उसने सबसे पहले सतीश कुमार टिक्कू को मारा, जोकि कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखता था। सतीश टिक्कू उसका दोस्त था लेकिन पाकिस्तान परस्त लोगों के संपर्क रहने के बाद उसने यहां तक कह दिया था कि कश्मीर की आजादी के लिए तो वो अपनी मां और भाई का गला भी काट देता। आतंकी बिट्टा वर्तमान में तिहाड जेल में बंद है।

बिट्टा कराटे को लेकर पूर्व डीजीपी ने किया था खुलासा

जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कुछ दिन पहले कहा था कि, आतंकी बिट्टा कराटे ने पुलिस की पूछताछ में 20 के करीब लोगों की हत्या की बात कबूली थी, लेकिन पुलिस के सामने यह किया गया कबूलनामा न्यायालय में मंजूर नहीं किया जाता। बाद में उसके खिलाफ किसी ने कोई गवाही नहीं दी। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में आतंकवाद के लिए पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रशिक्षित 70 आतंकियों के पहले ग्रुप को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसका किसी को पता नहीं था। उस वक्त राजनीतिक दबाव के चलते इन आतंकियों को रिहा करने का आदेश दिया गया। बाद में इन्हीं आतंकियों में से कई कश्मीर में आतंकी तंजीमों के सरगना बन गए थे।

बिट्टा कराटे 1987-1988 के वक्त एलओसी पार करके पाकिस्तान में दाखिल हुआ। वहां पर बिट्टा कराटे ने पाकिस्तान आर्मी से ट्रेनिंग ली और पोस्टर बॉय बनकर वापिस हिंदुस्तान आया। ये वो वक्त था जब पाकिस्तान ने कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए यहां के युवाओं को गुमराह करना शुरू किया। कश्मीर की आजादी के नाम पर इन युवकों के हाथों में हथियार थमा दिए। ऐसा कहा जाता है कि बिट्टा और उसके साथ पाकिस्तान जाकर ट्रेनिंग लेने वाले कश्मीरी युवकों का ये पहला बैच ही था।

स्रोत : अमर उजाला

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