कल्याण (ठाणे) : हिन्दवी स्वराज्य की नौसेना की नींव बने दुर्गाडी किले पर भी धर्मांधों का अतिक्रमण !

  • नमाज पढने के लिए आधा किला ही आरक्षित किए जाने की चौंकानेवाली घटना !

  • अवैध ईदगाह को पुलिस सुरक्षा देकर किले के आधे क्षेत्र पर हिन्दुओं को स्थाईरूप से प्रवेशबंदी !  (ईदगाह का अर्थ ईदगाह के दिन नमाज पढने का स्थान)

किले पर अवैध ईदगाह का निर्माण

ठाणे : छत्रपति शिवाजी महाराज ने केवल हिन्दवी स्वराज्य ही नहीं, अपितु जिस किले पर भारतीय नौसेना की नींव रखी, उस किले का आधा क्षेत्र अब धर्मांधों का धार्मिक केंद्र बन चुका है । इस किले पर अवैधरूप से बनाए गए ईदगाह को २४ घंटा पुलिस की सुरक्षा दी गई है तथा इस क्षेत्र में हिन्दुओं को स्थाईरूप से प्रवेशबंदी की गई है । धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के नाम पर किले पर स्थित अवैध ईदगाह को पुलिस की सुरक्षा देकर उसके विरुद्ध आवाज उठानेवाले हिन्दुओं पर कार्यवाही करने का यह कृत्य पिछले कई वर्षाें से सर्वदलीय सत्ताधारियों से चल रहा है । छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा इस किले का निर्माण करने से उसका अनन्यसाधारण महत्त्व है । दुर्गाडी किले पर स्थित श्री दुर्गादेवी मंदिर के पीछे कुछ दूरी पर ईदगाह का स्थान है । यहां जानेवाले धर्मांधों के लिए स्वतंत्र सडक बना दी गई है । ईदगाह के लिए यहां एक दीवार का निर्माण किया गया है, जिसका इतिहास में कोई संदर्भ नहीं मिलता ।

किले पर स्थित मंदिर तथा उसके पीछे होनेवाला अवैध ईदगाह

वर्ष में २ बार नमाज पढने के लिए आधा किला स्थाईरूप से आरक्षित !

यहां वर्ष में २ बार ही नमाज पढा जाता है । वर्ष में २ बार नमाज पढने के लिए संपूर्ण वर्षतक किले का आधा क्षेत्र आरक्षित कर उसे २४ घंटे पुलिस की सुरक्षा दी गई है । अवैध निर्माणकार्याें पर कार्यवाही करने के स्थान पर अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के लिए सर्वदलीय सरकारों की ओर से किया जानेवाला यह कृत्य बहुत चौंकानेवाला है ।

अवैध ईदगाह की सुरक्षा के लिए लाखों रुपए का व्यय !

किले पर स्थित इस अवैध ईदगाह की सुरक्षा के लिए २४ घंटे राज्य रिजर्व बल के पुलिसकर्मी रखे गए हैं । कुछ वर्ष पूर्व यहां २७ पुलिसकर्मी थे । अब यह संख्या ८ तक पहुंच गई है । इस अवैध ईदगाह की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार लाखों रुपए का व्यय कर रही है ।

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा निर्मित दुर्गाडी किले का इतिहास !

कल्याण की खाडी की बाजू में स्थित एक टीले पर यह किला बनाया गया है । वर्ष १६५७ में छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाह से कल्याण बंदरगाह जीत लिया था । उस समय कल्याण एक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह था । बंदर जीत लेने पर महाराज ने वहां इस किले का निर्माण किया । किले के नींव की खुदाई करते समय आबाजी महादेव को भूमि में द्रव्य मिला । इसे श्री दुर्गादेवी की कृपा मानकर इस किले को दुर्गाडी किला नाम दिया गया । इस किले पर दुर्गादेवी का मंदिर भी बनाया गया । इस किले के आश्रय में शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की पहली नौसेना का आरंभ किया । यह नौसेना केवल हिन्दवी स्वराज्य की ही नहीं, अपितु भारतीय नौसेना की नींव मानी जाती है । नौसेना खडी करने के लिए शिवाजी महाराज द्वारा ३४० पोर्तुगीज श्रमिकों को रखा था, इसका इतिहास में उल्लेख है । आगे जाकर पेशवाओं के सुभेदार रामजी बिलवकर ने किले का नवीनीकरण किया । इस प्रकार से इस किले का अनन्यसाधारण ऐतिहासिक महत्त्व है ।

स्वर्गी धर्मवीर आनंद दिघे के नेतृत्व में किले पर नमाज पढने के विरुद्ध हिन्दुओं का आंदोलन !

उस समय हिन्दूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे ने शिवसेना के नेता स्वर्गीय धर्मवीर आनंद दिघे को किले पर अवैधरूप से नमाज पढे जाने के विरुद्ध आवाज उठाने का आदेश दिया था । उसके उपरांत आनंद दिघे ने शिवसैनिकों के साथ जाकर नमाज पढने के समय किले पर स्थित मंदिर में घंटानाद आंदोलन किया; परंतु आगे जाकर पुलिस प्रशासन ने नमाज पढने के समय में आनंद दिघे को शिवसैनिकों के साथ किले पर आने के लिए प्रवेशबंदी की । आनंद दिघे के निधन के उपरांत शिवसेना के नेता और वर्तमान नगरविकासमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस संघर्ष का नेतृत्व किया ।

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