‘मंदिरों का अधिग्रहण : सरकारी लूट का तंत्र’ विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद !

मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के ‘दर्शन स्लॉट’ में कालाबाजारी; प्रत्येक व्यक्ति से 300 से 750 रुपयों की लूट ! – डॉ. अमित थडानी, मुंबई

कोरोना काल से मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के लिए ‘ऑनलाइन एप’ पर बुकिंग करना अनिवार्य किया गया है । इसलिए भक्तों को सीधे दर्शन प्राप्त नहीं होते । भक्त बुकिंग के लिए ऑनलाइन एप पर जाते है, तब पहले ही दर्शन की सर्व प्रवेशिकाएं (स्लॉट) बुक होती है । क्योंकि मंदिर परिसर के सभी दुकानदारों ने अनेक बनावटी खाते बनाकर प्रवेशिकाएं बुक की होती है, जिससे भक्तों को स्लॉट नहीं मिलता । स्थानीय दुकानदार ‘हम आपको दर्शन के लिए प्रवेशिका देते हैं’, ऐसा बताकर सिनेमा के टिकटों के समान कालाबाजारी कर प्रत्येक भक्त से 200 से 300 रुपए की लूट की जा रही है । इसमें केवल दुकानदर ही नहीं, अपितु मंडल के कुछ लोग भी सहभागी है । वे दो व्यक्तियों के लिए 1,500 रुपयों की मांग कर रहे हैं । पुलिस ने छापा मारकर कुछ लोगों पर कार्यवाही की हो, तो भी यह संख्या अल्प है । बचे हुए दोषियों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए । इसलिए जिनसे इस प्रकार पैसे लिए गए हो, उस सभी भक्तों को शिकायत करने के लिए आगे आना चाहिए, ऐसा आवाहन यह घोटाला सामने लानेवाले मुंबई के डॉ. अमित थडानी ने किया । वे हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘मंदिरों का अधिग्रहण : सरकारी लूट का तंत्र’ विषय पर आयोजित ‘ऑनलाइन’ विशेष संवाद में बोल रहे थे ।

बिहार में मंदिरों से कर वसूलने वाला कानून स्वीकृत नहीं होने देंगे ! – अधिवक्ता राकेश दत्त मिश्र

बिहार में सरकार को मंदिरों की भूमि दिखाई देती है; परंतु चर्च और मस्जिदों की भूमि दिखाई नहीं देती । बिहार में एक भी पुजारी को शासकीय वेतन नहीं दिया जाता, परंतु मौलवियों को 10 हजार रुपयों का वेतन कैसे दिया जाता है ? यह संविधान की समानता के विरोध में है । मंदिरों से 4 प्रतिशत कर वसूलने के निर्णय को हम विरोध करेंगे । इस हेतु हम माननीय राज्यपाल को निवेदन देंगे । किसी भी परिस्थिति में हम यह कानून बनने नहीं देंगे, ऐसा प्रतिपादन बिहार की ‘भारतीय जन क्रांति दल’ के राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता राकेश दत्त मिश्र ने किया ।

इस समय सर्वाेच्च न्यायालय के अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा कि मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर दर्शन टिकटों के काला बाजारी के प्रकरण में साइबर सेल से शिकायत करनी चाहिए तथा न्यायालय से न्याय मांगना चाहिए । बिहार में केवल मंदिरों से 4 प्रतिशत कर वसूलना और अन्य पंथियों को छूट देना, यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन है । मंदिर व्यवस्थापन धर्मनिरपेक्ष सरकार का कार्य नहीं है ।

पूरे देश में सरकारीकरण हुए विविध मंदिरों के भ्रष्टाचार की जानकारी देते हुए सनातन संस्था के धर्मप्रचारक श्री. अभय वर्तक ने कहा कि स्वतंत्रता के उपरांत देश पर हुआ सबसे बड़ा अन्याय अर्थात विविध राज्य सरकारों द्वारा की गई हिन्दू मंदिरों की लूट ! भ्रष्टाचार करनेवाले शासकीय न्यासियों को कारागृह में होना चाहिए । इसके लिए हिन्दुओं को डॉ. थडानी के समान संघर्ष करना होगा । उत्तराखंड में जैसे पुजारी और हिन्दुत्ववादी संगठनों ने एकत्रित संघर्ष करने से वहां के मंदिरों का सरकारीकरण निरस्त हुआ, वैसा ही पूरे देश के हिन्दू संगठित होने पर भी हो सकता है ।

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