बच्चों से अधनंगे बदन पर पेंटिंग करवाने वाली रेहाना फातिमा ने किया आत्मसमर्पण : SC ने खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका

केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में घुसने की कोशिश करने और साजिशन अपनी सोशल मीडिया पोस्ट से श्रद्धालुओं की भावनाओं को भड़काने को लेकर विवादों में आई एक्टिविस्ट रेहाना फातिमा ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) की शाम को एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया

एर्नाकुलम साउथ पुलिस ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को रेहाना फातिमा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। मामला अर्ध नग्न शरीर पर अपने बच्चों से पेटिंग करवाते हुए एक वीडियो जारी करने से जुड़ा है।


बच्चों कैसी संस्कृति सीखेंगे ? : अधनंगे बदन पर पेंटिंग करवाने वाली रेहाना फातिमा से SC

August 8, 2020

केरल की रेहाना फातिमा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। मामला अर्ध नग्न शरीर पर अपने बच्चों से पेटिंग करवाते हुए एक वीडियो जारी करने से जुड़ा है।

इस संबंध में मामला दर्ज होने के बाद रेहाना ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वहां अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर वह सुप्रीम कोर्ट पहुॅंची थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया में यह अश्लीलता फैलाने का मामला है। इससे नाबालिग बच्चों पर देश की संस्कृति को लेकर क्या प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या वह सामाजिक कार्यकर्ता होते हुए कोई भी तर्कहीन हरकत करेंगी। इससे बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली एक शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा, “आप यह सब क्यों करती हैं? आप एक कार्यकर्ता हो सकती हैं लेकिन यह किस प्रकार की बकवास है? यह अश्लीलता फैला रही है क्या आप? यह समाज में एक बहुत बुरा असर छोड़ देगा।”

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, “इस तरह के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है। आप इसके लिए बच्चों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? बच्चे किस तरह की संस्कृति सीखेंगे?”

जवाब में रेहाना के वकील ने कहा कि वीडियो कामुकता को लेकर संकीर्ण विचारों पर जागरूकता फैलाने के इरादे से बनाया गया था। उन्होंने कहा, “उनका स्टैंड हमेशा से रहा है अगर कोई पुरुष आधा नग्न खड़ा है, तो उसके बारे में कुछ भी सेक्सुअल नहीं है, लेकिन अगर कोई महिला ऐसा करती है, तो यह अश्लील है। वह कहती हैं कि इसमें सुधार लाने का एकमात्र तरीका लोगों को इस बारे में संवेदनशील बनाना है।” इसके जवाब में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “वे इन बातों को समझने के लिए काफी उम्रदराज हैं।”

क्या है मामला?

रेहाना फातिमा ने 19 जून 2020 को ही यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था।

रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंं सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।

हालाँकि, एक भाजपा नेता की शिकायत के बाद फातिमा को पॉक्सो एक्ट की धारा 13, 14, 15, आईटी एक्ट की धारा 67 (B) और धारा 75 के तहत एर्नाकुलम पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि रेहाना फातिमा अक्सर विवादों में रहती हैं। इससे पहले भी बहुत बार हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के आरोप में उनपर मामला दर्ज हो चुका है। वहीं, केरल मुस्लिम जमात काउंसिल ने भी ‘लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत करने’ को लेकर फातिमा को मुस्लिम समुदाय से निष्कासित कर दिया था।

फातिमा ने 2018 में तरबूजों के साथ टॉपलेस फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। ये फोटो फातिमा द्वारा तब शेयर की गई थी जब कोझिकोड के एक प्रोफेसर ने महिलाओं के वक्ष की तुलना तरबूज से की थी। उस समय फातिमा की हरकत पर फेसबुक पर बहुत बवाल हुआ था।


नग्न शरीर पर बच्चों से पेंटिंग कराने वाली रेहाना फातिमा की अग्रिम जमानत याचिका HC ने की खारिज

July 25, 2020

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 जुलाई, 2020) को ’एक्टिविस्ट’ रेहाना फातिमा की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। रेहाना फातिमा पर नाबालिक बच्चों से नग्न शरीर पर ड्राइंग कराने और फिर सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उसने अब शीर्ष अदालत में जाने का फैसला किया है।

मातृभूमि की एक रिपोर्ट के अनुसार, फातिमा ने सूचित किया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय से ‘अनुकूल निर्णय’ की उम्मीद कर रही है। इस बीच, उसने राज्य सरकार से उक्त मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी कहा है। फातिमा ने दावा किया कि अदालत के फैसले जनता की राय से प्रभावित होते है। इसलिए इस तथ्य को बदलना होगा।

रेहाना ने कहा, “मुझे न्यायालय से अनुकूल निर्णय मिलने की उम्मीद है। कानून हमेशा लोगों के एक वर्ग के अनुसार नहीं हो सकता। यह सभी के लिए समान है।” रेहाना फातिमा ने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी के पास अपने अधिकारों को अर्जित करने की जिम्मेदारी है।

रेहाना ने अपने अर्धनग्न शरीर पर नाबालिग बच्चों से पेंटिंग कराने और वीडियो यू-ट्यूब पर डालने पर नैतिकता को लेकर उठ रही बहस के बीच, राज्य सरकार पर अपना चेहरा छुपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। फातिमा ने आरोप लगाया कि पिनाराई विजयन की अगुवाई वाली केरल सरकार ‘किसी और सभी का बलिदान’ करने के लिए तैयार है। यह सरकार के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड की पुनरावृत्ति है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने केरल उच्च न्यायालय से उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने को कहा है। इसके साथ ही सरकार ने यह तर्क दिया कि लोगों को ‘कला’ के नाम पर कुछ भी करने तथा बच्चों सहित किसी को भी अपने किसी भी गतिविधि में शामिल करने का अधिकार नहीं है। केरल सरकार ने अदालत से रेहाना के पिछले कार्यों का संज्ञान लेने के लिए भी कहा है।

रेहाना ने बच्चों से कराया था अपने नग्न शरीर पर पेंट

गौरतलब है कि, केरल में पथनमथिट्टा जिले के तिरुवल्ला पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत रेहाना फातिमा और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (गैर-जमानती अपराध के लिए यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रसारित करना) मुकदमा दर्ज किया था।

रेहाना फातिमा ने 19 जून 2020 को ही यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था। रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंं सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।

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