एनकाउंटर में मारा गया गैंगस्टर विकास दुबे : STF की गाड़ी पलटने के बाद की थी भागने की कोशिश

बीती 2 जुलाई की रात कानपुर के बिकरु गाँव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोपित और उत्तर प्रदेश का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) सुबह भागने की कोशिश करते हुए पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।

एनकाउंटर में गंभीर रूप से घायल विकास को पुलिस अस्पताल लेकर गई है। जिसके बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस की ओर से इसकी पुष्टि कर दी गई है।

गौरतलब है कि झाँसी में रात करीब 3:15 बजे रक्सा बार्डर से एसटीएफ की टीम विकास दुबे को लेकर कानपुर के लिए रवाना हुई। लेकिन रास्ते में अचानक उत्तर प्रदेश एसटीएफ के काफिले की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस काफिले में कल ही मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार मोस्ट वांटेड गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) सवार था।

रिपोर्ट के अनुसार, जिस गाड़ी में विकास दुबे सवार था, वह हादसे का शिकार हुई है। यह घटना बर्रा थाना क्षेत्र के पास की है। हादसे में कार पलट गई है जिसके बाद विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।

गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने घायल यूपी एसटीएफ के पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में गोली लगने से बुरी तरह घायल विकास दुबे की मौत हो गई।

बता दें कि विकाश दुबे कल सुबह ही उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में मिला था। 6 दिन की तलाश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस उसे गिरफ्तार करने में कामयाब रही थी।


विकास दुबे उज्जैन से गिरफ्तार: अब तक 3 गुंडे मारे जा चुके एनकाउंटर में

July 9, 2020

8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले कानपुर घटना के प्रमुख आरोपित गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। जब उसे गिरफ्तार किया गया, उस समय वह मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर बाहर निकल ही रहा था।

गैंगस्टर विकास दुबे कई दिनों से फरार चल रहा था। उसकी तलाश कई राज्यों में उत्तर प्रदेश की पुलिस कर रही थी। विकास दुबे पर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोप है।

इससे पहले विकास दुबे के दो साथी आज एनकाउंटर में ढेर हो गए। प्रभात मिश्रा पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था, जिसके बाद एनकाउंटर में उसे ढेर कर दिया गया। प्रभात मिश्रा को बुधवार को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा विकास दुबे गैंग का एक और मोस्ट वांटेड क्रिमिनल बउअन शुक्ला भी इटावा में ढेर हो गया।

गत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पुलिस, कानपुर के चौबेपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने पहुँची थी। जहाँ विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिसवालों पर हमला कर दिया था। जिसमें प्रदेश के डिप्टी SP देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवा दी थी। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर 60 आपराधिक मामले दर्ज है।


SHO विनय तिवारी, बीट इंचार्ज शर्मा गिरफ्तार: ‘विकास दुबे एनकाउंटर’ में साथियों को मरता छोड भागे थे

July 8, 2020

8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे की मदद और दबिश की मुखबरी करने के आरोपों में निलंबित चल रहे चौबेपुर के पूर्व SHO विनय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं सब इंस्पेक्टर केके शर्मा की भी गिरफ्तारी हुई है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार विकास दुबे को भगाने के पीछे विनय तिवारी और केके शर्मा का हाथ बताया जा रहा है। इन लोगों ने ही दबिश के दौरान पुलिस की जान खतरे में डाली थी। और उन्हें मरता हुआ छोड़ कर भाग गए थे।

पुलिस अधिकारियों के गिरफ्तारी की पुष्टि आईजी मोहित अग्रवाल ने की है। गैंगस्टर विकास दुबे को बचाने में चौबेपुर थाने के एसएचओ विनय तिवारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर संलिप्तता के आरोप लगने के बाद इसकी जाँच के आदेश दिए गए थे।

गौरतलब है कि कुख्यात अपराधी को पकड़ने के लिए एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और जिला पुलिस ज़मीन आसमान एक कर जाँच पड़ताल में जुटी है। वहीं पुलिस इस बात की भी आशंका जता रही थी कि महकमे के ही किसी शख्स ने इस बात की मुखबिरी की है। इसी सिलसिले में आईजी मोहित अग्रवाल ने चौबेपुर थाना प्रभारी विनय तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया था।


पुलिस और विकास दुबे के संबंधों पर वायरल हुआ लेटर नहीं पहुंचा कार्यालय, जांच में जुटीं IG लक्ष्मी सिंह

July 7, 2020

कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या मामले की जांच में जुटी टीम के साथ अब लखनऊ की आईजी लक्ष्मी सिंह भी जुड़ चुकी हैं। इसी कड़ी में वह आज सुबह बिल्हौर स्थित सीओ दफ्तर पहुँची। यहाँ उन्होंने सीओ के सील दफ्तर की जांच शुरू की और उनके कंप्यूटर को सील करते हुए कहा कि इसकी जांच अब विशेषज्ञों से करवाई जाएगी।

इसके अलावा आईजी लक्ष्मी सिंह मामले से संबंधित उस पत्र की जांच भी कर रही हैं। जिसमें विकास दुबे के साथ पुलिस की दोस्ती के सबूत थे। दरअसल, इस पूरे प्रकरण में सोमवार को एक लेटर सामने आया था। लेटर से कई महत्तवपूर्ण बातों का खुलासा हुआ था। लेटर में विकास दुबे और पुलिस कनेक्शन को उजागर किया गया था।

इस लेटर में बताया गया था कि कैसे विकास दुबे के अपराधों पर पुलिस द्वारा रवैया नर्म रखा गया। इस लेटर को लिखने वाले सीओ देवेंद्र मिश्र थे। जबकि जिनके नाम लेटर लिखा गया वह एसएसपी अनंत देव थे।

इस पत्र के वायरल होने के बाद इस मामले में जांच शुरू हुई। जांच में पाया गया कि यह चिट्ठी तो पुलिस कार्यालय तक पहुँची ही नहीं। यहाँ बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लेटर में चौबेपुर थानेदार विनय तिवारी की भूमिका संदिग्ध होने पर इशारा किया गया था।

लेटर में लिखा था कि एक दुर्दांत अपराधी के प्रति उनकी सहानुभूति सत्यनिष्ठा को संदिग्ध करती है। यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।


शहीद CO देवेंद्र मिश्रा ने जताया था चौबेपुर SHO और विकास दुबे की मिलीभगत का शक, 8 बार की थी शिकायत

July 7, 2020

टीवी 9 रिपोर्ट की अनुसार कानपुर एनकाउंटर (Kanpur Encounter) मामले की जांच में गुजरते समय के साथ नए-नए खुलासे हो रहे हैं. इसी सिलसिले में CO देवेंद्र मिश्रा और SO विनय तिवारी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, देवेंद्र मिश्रा और विनय तिवारी में पहले से ही अनबन चल रही थी.

जुआ पकड़े जाने का घटना के बाद से बड़ी अनबन

सूत्रों ने बताया है कि पांच महीने पहले चौबेपुर के जरारी गांव में तत्कालीन CO बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा ने लाखों रुपए का जुआ पकड़ा था. थानेदार विनय तिवारी के संरक्षण में ये जुआ चलता था. उन्हें इसके बदले में पैसा पहुंच रहा था.

बताया जा रहा है कि जुआ के खुलासे के बाद से ही दोनों के बीच तनातनी चल रही थी. देवेंद्र मिश्रा ने तत्कालीन SSP अनंत देव को भी इसकी रिपोर्ट भेजी थी.

इसके बाद से ही CO बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा और चौबेपुर SO विनय तिवारी की अनबन शुरू हुई थी. अब पुलिस महकमे की इस आपसी अनबन के तार कानपुर एनकाउंटर से जोड़े जा रहे हैं.

शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने निलंबित एसएचओ विनय तिवारी के खिलाफ भेजी थी आठ प्रारंभिक जांच

आज तक की रिपोर्ट की अनुसार, कानपुर शूटआउट में शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने चौबेपुर के निलंबित एसएचओ विनय तिवारी के खिलाफ आठ प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी थी. सूत्रों के मुताबिक, शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने विनय तिवारी को भ्रष्टाचारी बताया था और रिपोर्ट में लिखा था कि विनय तिवारी की जुए के कारोबार में भूमिका है.

सूत्रों के मुताबिक, शहीद क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्रा ने चौबेपुर के निलंबित एसएचओ विनय तिवारी को पहले ही हटाने की सिफारिश उच्च अधिकारियों से की थी, लेकिन इस प्रकरण पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में एसएचओ विनय तिवारी को भ्रष्टाचारी और विवेचना में गड़बड़ी करने वाला बताया था.

इस बीच एक लेटर सामने आया है, जिसमें शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने तत्कालीन एसएसपी से चौबेपुर के एसएचओ रहे विनय तिवारी की शिकायत की थी. शहीद सीओ ने एसएचओ विनय तिवारी का बदमाश विकास दुबे से संबंध होने और भविष्य में गंभीर घटना होने का शक भी जताया था. बाद में विकास ने ही सीओ समेत आठ पुलिसवालों की हत्या कर दी.

शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में एसएसओ विनय तिवारी को जुआ खिलवाने वाला और जनता से अभद्र व्यवहार करने का दोषी बताया था, लेकिन उच्च अधिकारियों के कानों में शिकायत की रिपोर्ट की जूं तक नहीं रेंगी. सूत्रों के मुताबिक, शहीद सीओ ने विनय तिवारी के खिलाफ आठ जांच रिपोर्ट भेजी थी.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिछले आठ से दस महीनों में लगातार सीओ देवेंद्र मिश्रा ने निलंबित एसएचओ विनय तिवारी की शिकायत रिपोर्ट भेजी थी. उसमें एक स्पेशल रिपोर्ट भी भेजकर विनय तिवारी को हटाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन उच्च अधिकारियों ने इसको अनदेखा कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक, उच्च अधिकारियों की ओर से कार्यवाही और जांच ना करने की वजह से एसएचओ विनय तिवारी मनमानी करता रहा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा द्वारा शिकायत की भेजी आठ जांच रिपोर्ट और एक स्पेशल रिपोर्ट के बावजूद भी कार्यवाही क्यों नहीं की गई?

पूर्व एसएसपी अनंत देव ने पत्र को गंभीरता नहीं लिया

सीओ ने शिवली थाने में भाजपा नेता संतोष शुक्ला की हत्या का भी जिक्र कर विकास की दहशत के बारे में भी बताया था। हैरानी की बात यह है कि सीओ के इस पत्र को तत्कालीन एसएसपी अनंत देव ने गंभीरता से नहीं लिया। थानेदार पर उनकी मेहरबानी जारी रही। विकास दुबे पर भी कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अब जब ऐसी घटना को विकास दुबे ने अंजाम दिया है और उसमें थानेदार की मिलीभगत सामने आ रही है, उसमें तत्कालीन एसएसपी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


अगर आ गए तो लाशें बिछा देंगे, दरोगा और सिपाही के फोन की कॉल रिकॉर्डिंग सुन अधिकारी हैरान

कानपुर के बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर के मामले में एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। दबिश से करीब साढ़े सात घंटे पहले एक दरोगा की और करीब 40 मिनट पहले एक सिपाही से दहशतगर्द विकास दुबे की बातचीत फोन पर हुई थी। जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, उसमें ये दरोगा-सिपाही भी शामिल हैं। इन्हीं दोनों के जरिये विकास को दबिश की जानकारी हुई। चौबेपुर एसओ ने बात की है या नहीं इसकी जांच जारी है।

पुलिस पर लगे मुखबिरी के आरोप की जांच एसटीएफ भी अपने स्तर से कर रही है। एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक हलका इंचार्ज दरोगा कृष्ण कुमार शर्मा की दो जुलाई की शाम करीब 5:30 बजे विकास दुबे से फोन पर बातचीत हुई। उसके बाद दबिश से लगभग चालीस मिनट पहले 12:11 बजे सिपाही राजीव की विकास दुबे से फोन पर बात हुई। ये बातचीत कुछ मिनटों की है। दो बार बातचीत के बाद दबिश दी गई और पुलिस पर हमला हुआ तो निश्चित है कि दबिश की सूचना बदमाश को पहले दे दी गई।

अगर आ गए तो लाशें बिछा देंगे

एसटीएफ के अफसरों ने जब इन पुलिसकर्मियों के सामने बदमाश से हुई फोन पर बातचीत के साक्ष्य रखे तो इनकी हालत खराब हो गई। दरोगा का कहना था कि वो धमकी दे रहा था। गालियां दीं और बोला कि अगर आ गए तो लाशें बिछा देंगे। ये दरोगा का रटारटाया बयान है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक खुद को बचाने के लिए दरोगा ऐसा बोल रहा है। एसटीएफ कॉल रिकॉर्डिंग की गहनता से जांच कर रही है।

बता दें कि गुरुवार की रात चौबेपुर के बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने के लिए गई पुलिस पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। घटना के बाद डीजीपी ने यूपी के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर विकास को पकड़े के लिए सात हजार से अधिक पुलिस कर्मियों को लगाया है।


उस रात विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस के साथ क्या-क्या हुआ: घायल SO ने सब कुछ बताया

July 6, 2020

कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपित विकास दुबे अभी तक फरार है। उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही सरकार विकास दुबे को प्रदेश तथा बाहर संरक्षण देने वाले नेता तथा अफसरों का भी कनेक्शन तलाश रही है।

इस बीच बिठूर थाने के एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने उस रात की पूरी कहानी बताई। उन्होंंने बताया कि विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम के साथ क्या हुआ था।

एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उस रात पुलिस एनकाउंटर के इरादे से नहीं गई थी और न ही उनके पास पर्याप्त मात्रा में असलहे थे। लेकिन विकास दुबे और उसका गैंग पूरी तैयारी में था।

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक, घायल एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 2 जुलाई की रात करीब 12 बजे दबिश देने की तैयारी थी। उनके साथ उनकी टीम थी, साथ ही चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी माय फोर्स व एक अन्य थाने की फोर्स भी थी। इसके अलावा सीओ भी थे। सभी लोग करीब साढ़े 12 बजे विकास के घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर गाड़ी से उतरना पड़ा। रास्ते में जेसीबी को इस तरह से खड़ा किया गया था कि कोई गाड़ी न निकल सके। पैदल भी एक बार में एक ही आदमी निकल सके।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वहाँ पर पर्याप्त मात्रा में रोशनी न होने की वजह से वो लोग विकास दुबे की गैंग को नहीं देख पा रहे थे, मगर वो लोग उनको अच्छी तरह से देख रहे थे। उन्होंने बताया कि तीन तरफ से फायरिंग हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक ही समय में 15 लोग गोली चला रहे हों। उन्होंने आरोपितों के पास सेमी ऑटोमेटिक वेपन्स होने की भी आशंका जताई। हालाँकि अँधेरे की वजह से कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं दिखने की बात कही।

बता दें कि पुलिस ने विकास दुबे का किलेनुमा मकान जमींदोज कर दिया है। कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि विकास ने घर की दीवारों में हथियार और कारतूस चुनवा रखे थे। आईजी के अनुसार सूचना मिली थी कि विकास ने अपने घर में भारी मात्रा में असलहे छिपा रखे हैं। पिस्टल जैसे हथियार दीवारों में चुनवाकर छुपाने की जानकारी मिली थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो कोई भी पुलिसकर्मी दोषी पाया जाएगा, उस पर हत्या का मुकदमा चलेगा।

बताया जा रहा है कि विकास दुबे भेष बदलने में माहिर है। इसके अलावा उसके राजस्थान के एक नेता के साथ बेहद अच्छे संबंध की भी बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शातिर गैंगस्टर विकास अपने साथ मोबाइल फोन भी नहीं रखता।

आईजी मोहित अग्रवाल ने कहा है कि जल्द ही विकास पुलिस के शिकंजे में होगा। यह किसी आतंकी घटना से कम नहीं है। विकास के साथ वही सुलूक होगा जो एक आतंकवादी के साथ होता है।

पुलिस ने विकास दुबे के सहयोगी दयाशंकर अग्निहोत्री ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि विकास दुबे को पुलिस स्टेशन से एक फोन आया था। इसके बाद उसने लगभग 25-30 लोगों को बुलाया। उसने पुलिसकर्मियों पर गोलियाँ चलाईं। उसने कहा कि मुठभेड़ के समय वो घर के अंदर बंद था, इसलिए उसने कुछ भी नहीं देखा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद आपराधिक नेटवर्क को जड़ से ख़त्म करने के लिए विकास दुबे को संरक्षण और समर्थन देने वाले हर उस व्यक्ति की सूची बनाई जा रही है, जिसने उसकी मदद की है। विकास दुबे से जुड़े सारे नेताओं की लिस्ट तैयार की जा रही है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक पार्टी में क्यों न हों। इस काम में प्रशासनिक तंत्र के साथ-साथ ख़ुफ़िया विभाग भी लगा हुआ है। यहाँ तक कि भाजपा के भी जिन नेताओं के विकास दुबे से सम्बन्ध हैं, उनका भी ब्यौरा जुटा कर आगे की कार्रवाई तैयार की जा रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बदमाशों ने DSP देवेंद्र मिश्रा पर सिर्फ गोली ही नहीं चलाई, बल्कि उनका सर और पाँव भी कुल्हाड़ी से काट दिया था, उनकी लाश को क्षत-विक्षत भी किया था। वहीं एक सब इंस्पेक्टर को प्वाइंट ब्लैक रेंज से गोलियों से छलनी कर दिया। एक कॉन्स्टेबल पर एके-47 से गोलियों की बौछार की गई थी। विकास दुबे के सभी आदमी आधुनिक हथियारों से लैस थे।


5.5 लाख रुपए, नेताओं-सरकारी बाबूओं की लिस्ट, सोशल मीडिया : विकास दुबे को ऐसे घेर रही UP पुलिस

July 5, 2020

8 पुलिसकर्मियों की जान लेने वाला कानपुर का दुर्दांत अपराधी विकास दुबे अभी तक फरार है और उत्तर प्रदेश पुलिस को आशंका है कि उसे प्रशासन और राजनीति में पैठ किए लोगों से मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस बात को समझा है और आपराधिक नेटवर्क को जड़ से ख़त्म करने के लिए विकास दुबे को संरक्षण और समर्थन देने वाले हर उस व्यक्ति की सूची बनाई जा रही है, जिसने उसकी मदद की है।

ये मामला मुख्यमंत्री और उनके सरकार की छवि को भी नुकसान पहुँचाने वाला बन गया है, इसीलिए सीएम योगी सख्त हैं। विकास दुबे से जुड़े सारे नेताओं की लिस्ट तैयार की जा रही है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक पार्टी में क्यों न हों। इस काम में प्रशासनिक तंत्र के साथ-साथ ख़ुफ़िया विभाग भी लगा हुआ है। यहाँ तक कि भाजपा के भी जिन नेताओं के विकास दुबे से सम्बन्ध हैं, उनका भी ब्यौरा जुटा कर आगे की कार्रवाई तैयार की जा रही है।

इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि सब कुछ एकदम गोपनीय तरीके से हो। ‘अमर उजाला’ की ख़बर के अनुसार, जिन भी नेताओं पर शक की सूई घूमेगी, उन्हें स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तलब करेंगे और उनसे स्पष्टीकरण माँगा जाएगा। सरकार के भी एक मंत्री के साथ विकास दुबे की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसे लेकर सीएम योगी सख्त हैं। विकास दुबे के संरक्षण गैंग पर पुलिस-प्रशासन की टेढ़ी नज़र है और उन्हें बेनकाब किया जाना है।

इधर विकास दुबे पर इनामी राशि भी बढ़ा दी गई है। उस पर 1 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। साथ ही उसके 18 अन्य गुर्गों पर भी 25-25 हज़ार रुपए का इनाम रखा गया है। यह भी पता चला है कि विकास दुबे ने पहले ही पुलिस विभाग को धमकी दी थी, जिसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया। अपनी धमकी में उसने पुलिसिया कार्रवाई के बाद बागी हो जाने की बात कही थी। पुलिस बल में कम ही जवान थे, जिससे उसे फरार होने का मौका मिल गया

कानपुर मुठभेड़ के आरोपित विकास दुबे को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और इसमें कई टीमें लगाई गई हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे ‘ब्राह्मण बनाम ठाकुर’ बना कर पेश करते हुए उसके समर्थन में लिख रहे हैं। सोशल मीडिया में लोग पुलिस के जवानों के बलिदान का अपमान करते हुए विकास दुबे के कृत्य को सही ठहरा रहे हैं, जिसके कारण कई केस दर्ज किए गए हैं।

पुलिस गैंगस्टर विकास दुबे के समर्थन में लिखने वालों पर शिकंजा कसने के लिए सोशल मीडिया पर नज़र रख रही है। विकास दुबे के तीन अन्य भाई भी हिस्ट्रीशीटर हैं। साथ ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले राहुल तिवारी भी फरार हैं क्योंकि उनके परिवार को डर है कि विकास उन्हें नुकसान पहुँचा सकता है। सोशल मीडिया पर इन अपराधियों के समर्थन में लिखने वालों को पुलिस चिह्नित कर रही है।

‘हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, पुलिस एनकाउंटर में मार गिराए गए विकास दुबे के मामा और चचेरे भाई का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। बताया गया है कि पुलिस ने परिजनों को इसकी सूचना दे दी थी, इसके बावजूद कोई भी नहीं आया। इसके कारण पुलिसकर्मियों ने ही भैरोघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में इन दोनों का अंतिम संस्कार करा दिया। वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की गई।

गौरतलब है कि कानपुर में दो जुलाई को हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला किया। हमले में आठ पुलिसकर्मी की मौत हो गई। इस घटना के बहाने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस का मजाक उड़ाने की कोशिश की है। विकास दुबे की सपा-बसपा के कई नेताओं से करीबी रही है। उसकी पत्नी सपा के टिकट पर पंचायत चुनाव भी लड़ चुकी है।

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