जफरुल इस्लाम पर जल्द गिरेगी गाज, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू

ज़फरुल इस्लाम खान का फेक न्यूज़ फैलाने का पुराना इतिहास रहा है

विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के चलते जफरुल इस्लाम खान को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद से हटाए जाने की प्रकिया शुरू हो चुकी है। इसकी जानकारी सोमवार (मई 11, 2020) को दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी।

सोमवार को इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि ज़फरुल इस्लाम को आठ मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

आम आदमी पार्टी सरकार के वकील अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर डीएमसी चेयरमैन जफरूल इस्लाम के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उपराज्यपाल ने यह पत्र 30 अप्रैल को ही लिखा था, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा था कि वो विभाग को डीएमसी ऐक्ट की धारा 4 के तहत जफरूल के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दें।

जानकारी के मुताबिक यह धारा आयोग के चेयरमैन या सदस्य को पद से हटाए जाने से संबंधित है। इसके बाद कोर्ट ने उपराज्यपाल से इस पर जल्द फैसला लेने के लिए कहा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पशेल सेल की तरफ से नोटिस जारी करते हुए जफरुल को 12 मई तक मोबाइल और लैपटॉप जमा करने के लिए कहा था।

बता दें कि जफरुल इस्लाम खान को उनके पद से हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि खान ने अपने सोशल मीडिया पेज पर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दिया था। याचिका पर आज सुनवाई हुई।

आलोक श्रीवास्तव द्वारा दायर किए गए याचिका में कहा गया था कि 2 मई को FIR दर्ज होने के बावजूद जफरुल इस्लाम खान ने 3 मई को कहा कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। वह अपनी बात पर अब भी कायम हैं।

साथ ही याचिका में आरोप लगाया गया कि स्पष्ट है कि वे जान-बूझकर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दे समाज में असंतोष और दरार पैदा करना चाहते हैं। इसमें दावा किया गया कि जफरुल इस्लाम, जो कि एक जिम्मेदार पद पर आसीन है, ने ऐसा घृणित बयान देकर देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल दिया है।

इन्होंने भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल करने और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की है। जफरुल खान का बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, अपमानजनक और देश विरोधी है।

गौरतलब है कि 28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुसलमानों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुसलमान एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

जफरुल खान के समर्थन में 8 मई को 20 मुस्लिम मौलवियों और नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की माँग की थी। इस बयान में उन्होंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज किए गए FIR की निंदा करते हुए कहा था कि खान को उत्पीड़ितों के लिए बोलने के लिए ‘दंडित’ किया जा रहा है।


12 मई तक जमा करें मोबाइल-लैपटॉप : जफरुल इस्लाम को दिल्ली पुलिस का नोटिस

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम को 12 मई तक मोबाइल और वह लैपटॉप जमा कराना होगा जिससे उन्होंने विवादित पोस्ट सोशल मीडिया में की थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी किया है।

इसी दिन दिल्ली हाई कोर्ट में इस्लाम की याचिका पर सुनवाई होनी है। देशद्रोह मामले में अग्रिम जमानत के लिए उन्होंने याचिका दायर कर रखी है।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदुओं को अरब का धौंस दिखाने के बाद से इस्लाम विवादों में हैं। शुक्रवार को कई मुस्लिम संगठनों और मौलवियों ने उनके समर्थन में बयान जारी किया था। देशद्रोह के मामले में दर्ज FIR रद्द करने की मॉंग करते हुए कहा था कि उन्हें उत्पीड़ितों के पक्ष में बोलने के लिए ‘दंडित’ किया जा रहा है।


जफरुल इस्लाम को पद से हटाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका, हिंदुओं को दिखाया था अरब का धौंस

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान को उनके पद से हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि खान ने अपने सोशल मीडिया पेज पर भडकाऊ और देशद्रोही बयान दिया था। याचिका पर 11 मई को सुनवाई होगी।

जफरुल इस्लाम के खिलाफ देशद्रोह का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखे एक पोस्ट में हिंदुओं को अरब का धौंस दिखाया था।

रिटायर बैंक अधिकारी सुभाष चंद्र द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि 2 मई को, एक शिकायत के आधार पर, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास और भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच देशद्रोह और घृणा की भावनाओं को बढ़ावा देने के आरोप में आईपीसी की धारा 124A और 153A के तहत FIR दर्ज किया था।

अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा दायर किए गए याचिका में कहा गया है कि FIR दर्ज होने के बावजूद जफरुल इस्लाम खान ने 3 मई को कहा कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। वह अपनी बात पर अब भी कायम हैं। खान ने कहा था, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं।”

याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्पष्ट है कि वे जान-बूझकर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दे समाज में असंतोष और दरार पैदा करना चाहते हैं। याचिका में आगे दावा किया गया कि जफरुल इस्लाम, जो कि एक जिम्मेदार पद पर आसीन है, ने ऐसा घृणित बयान देकर देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल दिया है। इन्होंने भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल करने और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की है। जफरुल खान का बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, अपमानजनक और देश विरोधी है।

याचिका में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग, दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल से कहा गया है कि वो जफरुल इस्लाम को उनके इस देशद्रोही और घृणित बयान के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के पद से हटा दिया जाए।

इससे पहले, उच्च न्यायालय में एक और याचिका दायर की गई थी जिसमें जफरुल खान के खिलाफ उनकी भड़काऊ टिप्पणी और हिंदू समुदाय के खिलाफ धमकी भरे बयान के लिए FIR दर्ज करने की माँग की गई थी। इस याचिका को भी 11 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। दिल्ली निवासी मनोरंजन कुमार की याचिका में दावा किया गया है कि आयोग के अध्यक्ष ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए हैं जिसमें उन्होंने हिंदू समुदाय को ‘कट्टर हिंदू’ बताया है।

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुसलमानों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुसलमान एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं


मैंने ना तो माफी माँगी है और न ही ट्वीट डिलीट किया है : हिंदुओं को अरब की धौंस दिखाने वाले जफरुल इस्लाम

अरब के मुस्लिमों के नाम पर हिन्दुओं को धमकी देने वाले दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार में माइनॉरिटी कमीशन (दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग) के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ख़ान ने कहा है कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। उन्होंने कहा है कि अपनी बात पर अब भी कायम हैं।

जफरुल इस्लाम ने कहा, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं। 1 मई 2020 को अपने बयान में मैंने कहा था कि मैं अभी भी अपने विचार के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा हूँ। मैं आगे भी देश में घृणित राजनीति के खिलाफ लड़ता रहूँगा। FIR, गिरफ्तारी या फिर जेल भी मुझे अपने रास्ते पर जाने से नहीं रोक सकती, जो रास्ता मैंने अपने देश को, अपने लोगों को भारतीय सेकुलर हुकूमत को और संविधान को बचाने के लिए अपनाए हैं।”

बता दें कि 28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुसलमानों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुसलमान एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे। इस पर माफी की बात आई थी लेकिन अभी उन्होंने इनकार कर दिया है। बता दें कि इस्लाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का केस दर्ज किया है।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं।

इसके बाद कुछ मीडिया हाउस ने बताया कि जफरुल इस्लाम ने अपने इस बयान के लिए माफी माँगी है। जिसमें कहा गया कि इस्लाम ने कहा, “28 अप्रैल, 2020 को मेरे द्वारा जारी किए गए ट्वीट में उत्तर-पूर्वी जिले की हिंसा के संदर्भ में कुवैत को भारतीय मुसलमानों के उत्पीड़न पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया गया, कुछ लोगों को इससे पीड़ा हुई, जो कभी भी मेरा उद्देश्य नहीं था। मुझे महसूस हुआ कि जिस समय पूरा देश मेडिकल इमरजेंसी का सामना कर रहा है, उस समय मेरा ये ट्वीट असंवेदनशील था, मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाएँ आहत हुईं।”


अरब का धौंस दिखाने वाले जफरूल इस्लाम ने मांगी माफी: देशद्रोह का मामला दर्ज

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार (अप्रैल 30, 2020) को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ देशद्रोह के तहत मामला दर्ज किया। इस्लाम ने 28 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भड़काऊ बयान दिया था।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के संयुक्त आयुक्त नीरज ठाकुर ने बताया कि जफरुल इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए के तहत FIR दर्ज की गई है। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनका कहना है, “मैंने एफआईआर नहीं देखा है। जब मैं इसे देखूँगा या फिर इसके बारे में मुझे पता चलेगा, तभी कुछ टिप्पणी करूँगा।”

बता दें कि यह FIR वसंत कुंज के रहने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई है। सफदरजंग एनक्लेव के सहायक पुलिस आयुक्त के जरिए यह शिकायत लोधी कॉलोनी स्थित आतंकरोधी दल के स्पेशल सेल ऑफिस में पहुँची। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 28 अप्रैल को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने ट्विटर और फेसबुक पर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया जो कि भड़काऊ है और इसका मकसद सौहार्द्र बिगाड़ना और समाज में भेदभाव को पैदा करना है।

जफरुल इस्लाम खान ने माँगी माफी

इससे पहले जफरुल इस्लाम खान ने 28 अप्रैल के अपने बयान को लेकर माफी माँगी है। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा, “मेरा इरादा गलत नहीं था।” उन्होंने कहा, “28 अप्रैल, 2020 को मेरे द्वारा जारी किए गए ट्वीट में उत्तर-पूर्वी जिले की हिंसा के संदर्भ में कुवैत को भारतीय मुसलमानों के उत्पीड़न पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया गया, कुछ लोगों को इससे पीड़ा हुई, जो कभी भी मेरा उद्देश्य नहीं था।”

इस्लाम ने आगे कहा, “मुझे महसूस हुआ कि जिस समय पूरा देश मेडिकल इमरजेंसी का सामना कर रहा है, उस समय मेरा ये ट्वीट असंवेदनशील था, मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाएँ आहत हुईं।” उन्होंने कहा, “मैंने मीडिया के एक हिस्से को गंभीरता से लिया है जिसने मेरे ट्वीट के कंटेंट को गलत तरीके से पेश किया और मुझे उन चीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जो मैंने कभी नहीं कहा।” उन्होंने कहा कि इन न्यूज़ चैनल को वह लीगल नोटिस भी भिजवाएँगे।


इतने FIR होंगे कि एमएफ हुसैन की तरह सिर छुपाने की जगह नहीं मिलेगी : जफरुल इस्लाम पर VHP

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद (VHP) देश भर में FIR दर्ज करवाएगी। विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि देश के कोने-कोने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी ताकि एमएफ हुसैन की तरह इस्लाम को भारत में सिर छुपाने की जगह न मिले।

ज़फरुल इस्लाम ने एक पोस्ट में भारत के हिन्दुओं को अरबी मुसलमानों की धमकी दी थी। इस पोस्ट के कारण कल हिंदू सेना ने उनके ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। अब VHP भी इस्लाम के ख़िलाफ़ एक्शन में आ गया है। परिषद का कहना है कि ज़फरुल के ख़िलाफ वे देश भर के अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज कराने का विचार कर रहे हैं। कोशिश की जाएगी कि इस्लाम के ख़िलाफ़ संगीन धाराओं में मामला दर्ज हो, क्योंकि वे विदेशी मुस्लिमों का डर दिखाकर देश के हिंदुओं को धमका रहे हैं।

बता दें, ज़फरुल के ख़िलाफ़ देश के अलग-अलग थानों में एफआईआर की बात, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान कही। इसके अलावा इसका जिक्र उन्होंने अपने एक ट्वीट में भी किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग करके इस्लाम के ख़िलाफ एक्शन की माँग की और लिखा, “ऐसे देशद्रोहियों के विरुद्ध देश भर के थानों में इतनी शिकायतें दर्ज होनी चाहिए कि एमएफ हुसैन की तरह इसे भी भारत में सिर छुपाने को जगह ना मिले।”

इसके अलावा उन्होंने दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “कुछ तो बोलो माननीय अरविंद केजरीवाल जी। यह तो आपकी ही कृपा से संवैधानिक पद पर बैठकर एक अरबी दलाल की तरह भारत को धमकियाँ दे रहा है और आप चुप हैं?”

गौरतलब है कि इससे पहले विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मामले पर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, “जाकिर नाइक जैसे आतंकियों के अनुयायी दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने हिंदुओं के विरुद्ध इस्लामिक देशों के तूफान की सीधी धमकी दी है।”

वीएचपी ने अपने इस ट्वीट में सुरेंद्र जैन का सक्षात्कार भी डाला था। जिसमें उन्होंने कहा, “दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान की देश में तूफान लाने की धमकी 1947 की याद दिला रही है। संवैधानिक पद पर बैठा आदमी आतंकी भाषा में बोल रहा है। केजरीवाल समेत सभी सेकुलर बिरादरी चुप कैसे है? क्या इन्हें ऎसे ही लोग मिलते हैं?”

बता दें ज़फरुल के जिस पोस्ट पर इतना विवाद खड़ा हुआ है। उसमें उन्होंने लिखा था कि कट्टर हिन्दू ये भूल गए थे कि अरबी मुसलमानों की आँखों में भारतीय मुसलमानों की साख काफ़ी ऊँची है। बकौल ज़फरुल, भारत के मुसलमानों ने इस्लाम के लिए जो किया है, उसे देखते हुए अरबी उन्हें सिर-आँखों पर रखते हैं। भारतीय मुसलमान अरबी और इस्लामी अध्ययन में पारंगत हैं और दुनिया भर में इस्लामी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी विरासत में अहम योगदान दिया है।

ज़फरुल ने इन लोगों को शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक का नाम गिनाया। बता दें कि मलेशिया में रह रहे ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं। भारत में कई जगह युवा कट्टर मुसलमानों के यहाँ से ज़ाकिर नाइक की सीडी मिली, जिसे देख कर वो आतंक की राह अपनाते रहे हैं

ज़फरुल ने कहा था कि शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुसलमानों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है। जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुसलमान एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

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