महाराष्ट्र – कांग्रेस ने फिर किया वीर सावरकरजी की वीरता का अपमान, कहा – ‘स्वातंत्र्यवीर’ नहीं, ‘माफीवीर’ !

उद्धव सरकार में शामिल कांग्रेस ने वीर सावरकरजीजी का एक बार फिर अपमान किया है  । महाराष्ट्र कांग्रेस की मराठी पत्रिका ‘शिदोरी’ के फरवरी अंक में सावरकरजी पर दो लेख छापे गए हैं। पत्रिका में सावरकरजी पर लेखों को रखा जाए या नहीं, इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस में शुरुआत में असमंजस दिखा। हालांकि, बाद में हाइकमान के दखल के बाद इस पत्रिका को प्रकाशित कर दिया गया। पत्रिका में दो लेख वीर सावरकरजी पर प्रकाशित किए गए हैं, इनके शीर्षक ‘स्वातंत्र्यवीर नव्हे, माफीवीर’ (स्वातंत्र्यवीर नहीं, माफीवीर)। और ‘अंधारातील सावकर’ (सावरकरजी के अनजाने पहलू) शामिल हैं।

पहले आलेख में कहा गया है कि, सावरकरजी से जुड़े जो तमाम दस्तावेज सामने आते हैं, उन्हें देखने के बाद वह स्वातंत्र्यवीर नहीं, बल्कि माफीवीर के तौर पर सामने आते हैं। यह लेख मराठी की एक मासिक पत्रिका ‘साम्य योग साधना’ से लिया गया है। वहीं दूसरे लेख में सावरकरजी के जीवन से जुड़े कुछ बेहद निजी पहलुओं को रखा गया है। इसमें ऐसी घटना का जिक्र है, जो सीधे उनके चरित्र से जुड़ा है !

कांग्रेस पहले भी कर चुकी है सावरकरजी का अपमान

बता दें कि, शिवसेना हमेशा से सावरकरजी को स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर प्रस्तुत करती रही है। पिछले दिनों में लोकसभा में शिवसेना ने केंद्र सरकार के सामने सावरकरजी को भारत रत्न देने की मांग भी रखी थी। यह कोई पहला अवसर नहीं होगा, जब सावरकरजी को लेकर कांग्रेस की ओर से हमला बोला गया हो। इससे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस के सेवादल की ओर से सावरकरजी पर लिखित आपत्तिजनक सामग्री बांटी गई थी।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने वीर सावरकरजी को लेकर कांग्रेस पर निशाना भी साधा था। उन्होंने कहा था कि, जो लोग वीर सावरकरजी का विरोध करते हैं वे किसी भी विचारधारा या पार्टी से हों। उन्हें अंडमान के सेल्यूलर जेल में दो दिन रहने दें। जहां सावरकरजी को बंधक बनाया गया था। तब उन्हें उनके बलिदान और उनके योगदान का अहसास होगा ! कांग्रेस के सेवा दल की किताब के किए गए दावे पर भी संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। संजय राउत ने कहा था कि, सावरकरजी महान थे और महान रहेंगे। जो लोग उनकी देशभक्ति पर प्रश्न उठा रहे हैं और उनकी आलोचना कर रहे हैं, उनके दिमाग में गंदगी भरी है !

अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल ने जनवरी में भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में ‘वीर सावरकरजी कितने वीर ?’ नाम से एक किताब वितरित की थी जिसे लेकर विवाद हुआ था। इसमें राजनीतिक हिंदूवादी विचारधारा के जनक कहे जानेवाले विनायक दामोदर सावरकरजी पर प्रश्न उठाए गए थे। भाजपा ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि, कांग्रेस मतिभ्रम की स्थिति में है, इसलिए राष्ट्रभक्तों का अपमान कर रही है। किताब में आरोप लगाया गया था कि, सावरकरजी ने तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत से पैसे लिए थे !

स्त्रोत : अमर उजाला

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