वामपंथी और जिहादियों द्वारा पुलिस हुए आक्रमणों को मीडिया तथा लिबरल गैंग अनदेखा क्यों करती है ?

कई बार हम समाचर में देखते हैं कि, जेएनयू, एएमयू, जामिया मिलिया आदि विश्वविद्यालयों के सीएए-विरोधी, सरकार विरोधी वामपंथी छात्र पुलिस पर कैसे आक्रमण करते आ रहे है । जब ‘पहलू खान’, ‘जुनैद’ या ‘तबरेज’ मारे जाते हैं तब उचित तथ्यों की जांच किए बिना समाचार चैनल भी ‘आगे’ आकर हिंदुओं और पुलिस प्रशासन को दोषी ठहराना शुरू कर देते हैं। कई लिबरल्स, ढोंगी धर्मनिरपेक्षतावादी और यहां तक ​​कि बॉलीवूड हस्तियां भी इन लोगों का समर्थन करने के लिए सामने आती हैं।

लेकिन जब बात पुलिस पर हुए आक्रमण की आती है, तो ये सभी मीडिया चैनल और सेक्युलर गैंग मौन धारण कर लेते है । अब सवाल यह है कि, मीडिया और लिबरल्स, वामपंथियों और जिहादियों द्वारा पुलिस पर हुए हमलों को अनदेखा क्यों करते हैं ? क्या उन्हें ऐसे लगता है कि, पुलिस के पास मानवाधिकार नहीं हैं ?

तमिलनाडु में पुलिस के एक विशेष उप-निरीक्षक की केरल सीमा के पास पंतथलमुडु चेक-पोस्ट पर अज्ञात व्यक्तियों के एक गिरोह द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वह बुधवार रात तिरुवनंतपुरम से नागरकोइल की ओर आ रहे एक कार की जांच कर रहे थे।


56 वर्षीय मृतक अधिकारी विल्सन, एक स्कॉर्पियो एसयूवी की जांच कर रहे थे, जो टीएन 57 एडब्ल्यू 1559 इस क्रमांक की गाडी थी, जो कि कन्याकुमारी जिले में लगभग 10 बजे प्रवेश किया था और नागरकोइल की ओर जा रही थी।

तमिलनाडु पुलिस ने आपराधिक पार्श्वभूमि वाले दो व्यक्तियों की तस्वीरों को जारी किया है, जिन्होंने विल्सन की कथित तौर पर हत्या कर की।उनमें से एक आरोपी अब्दुल शमीम जो कि 2014 में एक सांप्रदायिक हत्या के मामला का आरोपी है जबकि थौफिक कन्याकुमारी में एक भाजपा नेता की हत्या के मामले का आरोपी है।

जेएनयू में इसी तरह की हुई एक घटना को मीडिया और धर्मनिरपेक्षतावादी गैंग ने नजरअंदाज किया। हाल ही में जेएनयू के विरोध प्रदर्शन दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी ने दिल्ली के अतिरिक्त डीसीपी पर हमला करते हुए उनके हाथ पर काटा ।


रिपोर्ट के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान जेएनयूएसयू (JNUSU) के सदस्यों ने शास्त्री भवन की ओर मार्च निकाले का प्रयास किया, किंतु पुलिस ने इसका विरोध किया, तभी एक महिला प्रदर्शनकारी दक्षिण-पश्चिम के अतिरिक्त डीसीपी इंजीत प्रताप सिंह के पास पहुंची और उनके बाएं अंगूठे पर काट लिया।

हालांकि, पुलिस को काटनेवाले आरोपी की अब तक पहचान नहीं की जा सकी । DCP प्रताप सिंह बहुत संघर्ष के बाद अपने हाथ को मुक्त करने में सफल रहा लेकिन उसे मामूली चोटें आईं। बाद में पुलिस मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई।

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